Bindash News || आ तुझे हांक दूं मैं बेना...
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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आ तुझे हांक दूं मैं बेना...

Bindash News / 10-06-2021 / 1659


दूर करेंगें भगवन आपकी हर हारी बीमारी,सुनिए ये राजकुमार,कह रही आपकी ये राजकुमारी


आशुतोष रंजन
गढ़वा

हर सुहागन महिलाएं आज वटवृक्ष को पूज रही हैं,रखोगे न भगवन अमर मेरे सुहाग को उनसे पूछ रही हैं",जी हां अमर सुहाग की कामना लिए आज हर सुहागन महिलाओं द्वारा वटवृक्ष की पूजा की जा रही है,कई रोज़ की विधिवत तैयारी के बाद आज अहले सुबह से महिलाओं द्वारा वटवृक्ष को पूजा जा रहा है,कुछ महिलाएं पूजा करने और पेंड़ में कलावा बांध उस धागे की लंबाई से कहीं ज़्यादा पति की लंबी उम्र की कामना कर रही हैं तो कुछ महिलाएं उक्त वटवृक्ष के नीचे पूजा से जुड़ी कथा भी सुन रही हैं।

आ तुझे हांक दूं मैं बेना:- गांव हो या शहर सभी पेंड़ से महरूम हो रहे हैं,और लोग आधुनिकता के चकाचौंध में कृत्रिम हवा पा कर ख़ुद को जबरदस्ती का तरो ताज़ा समझ रहे हैं,लेकिन आज के इस आधुनिक दौर में भी कई व्रत त्योहार ऐसे हैं जो हमें प्रकृति के क़रीब रहने का संदेश देते हैं,छठ व्रत में तो हम सुप दउरा से अर्ध्य देना देखते आ ही रहे हैं,अब इस वटवृक्ष पूजन को ही नज़र कीजिये,जहां एक ओर वृक्ष की पूजा हो रही है,उसमें कलावा बांधा जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर पूजा कर घर को लौटी महिलाएं पति को पंखा,कूलर और ऐसी के सामने बैठा उससे हवा लगाने की जगह आज के दौर में भी बांस के बने पंखे जिसे गंवई बोली में बेना कहा जाता है उससे हवा लगा रही हैं,क्योंकि यह पौराणिक परंपरा है जो कालांतर से चली आ रही है,यह बात प्रकृति सदैव क़रीब रहने की हुई,तो उधर ज़रा आज की व्रती सुहागन महिलाओं की भी हो जो अपने पति की सलामती के लिए इस पूजन को करने के साथ साथ उन्हें बांस के पंखे से हवा लगाती हैं,कुछ तो खुल कर बोलती हैं तो कुछ मन ही मन एक लालसा जरूर रखती हैं कि रखना ख़ुश बस यूं ही,ना कभी कोई कष्ट देना,आ तुझे हांक दूं मैं बेना।"

कह रही आपकी ये राजकुमारी:- ऐसे तो हर वक्त एक पत्नी अपने पति के लिए सलामती की दुआ मांगती रहती है,घर में अवस्थित पूजा का कमरा हो बाहर का मंदिर पत्नी की हर पूजा में अमर सुहाग की कामना ही शामिल होता है,पति को हर बुरी बला से महफ़ूज रखते हुए उसके ऊपर आने वाले हर संकट को ख़ुद पर ले लेने को आमादा पत्नी लाख कष्ट में होने के बावजूद भी पति के शाम में घर वापस लौटने पर दरवाज़ा खोलने से पहले ही मुरझाए चेहरे पर रौनक वापस ले लाती है और सुबह में हंस कर विदा करने वाली पत्नी शाम में भी मुस्कुरा कर ही स्वागत करती है,और उधर दिन भर का थका मांदा और बाहरी तनाव से बोझिल पति का मन उसी मुस्कान से लबरेज़ चेहरे को देख हल्का हो जाता है,या यूं कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि सारा थकान और सारा झंझावात काफ़ूर हो जाता है,जहां एक ओर पत्नी पति के चेहरे पर किसी भी वक्त कोई शिकन नहीं देखना चाहती तो वहीं वक्त बे वक्त पति के माथे को चूमती हुई यही दुहराती है कि "दूर करेंगें भगवन आपकी हर हारी बीमारी,सुनिए ये राजकुमार,कह रही आपकी राजकुमारी।"

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