Bindash News || आख़िर क्यों गर्म हुआ ज़मीनी सूरज.?
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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आख़िर क्यों गर्म हुआ ज़मीनी सूरज.?

Bindash News / 03-07-2021 / 1713


कह कर कुछ सूरज जता गए बहुत कुछ


आशुतोष रंजन
गढ़वा

ऐसे तो बारिश के मौसम में भी हम पूरे दिन आसमानी सूरज की तपिश से यानी तेज़ गर्मी से झुलसते हैं,चिलचिलाती धूप में किसी तरह काम निबटाते हैं,यह बात तो आसमानी सूरज की हुई जो गर्म होता ही है,लेकिन क्या ज़मीनी सूरज भी इतना गर्म होता है इसका अहसास पहली बार हुआ,अब आप पूछियेगा की आज तलक तो हम आसमां के सूरज को ही जानते थे अब भला यह ज़मीनी सूरज की चर्चा कहां से शुरू हो गयी,आपका पूछना और जानना भी बिल्कुल लाज़िमी है,लेकिन आपको बताऊं की हम बात यहां आसमानी सूरज की भांति किसी और सूरज की नहीं बल्कि इंसानी सूरज की कर रहे हैं,जो उस सूरज की भांति एकाएक गर्म हो गया है,आख़िर वज़ह क्या है जानने के लिए आप इस ख़ास रिपोर्ट को पढ़िये।

 

आख़िर क्यों गर्म हुआ ज़मीनी सूरज:- यह बिल्कुल सोचने वाली बात है कि हर वक्त नरम रहने वाला ज़मीनी सूरज आख़िर ऐसे एकाएक गर्म कैसे और क्यों हो गया,बात यहां ज़मीनी सूरज यानी राजद के नए जिलाध्यक्ष सूरज सिंह की हो रही है,अब तो आप बेशक समझ गए होंगें बात किस सूरज की हो रही है,यहां बताएं कि कभी तेज़ रौशनी के साथ पलामू प्रमंडल में प्रज्ज्वलित होने वाले राजनीतिक पार्टी यानी राजद के लालटेन की कमज़ोर होती लौ को और तेज़ करने के ख़्याल से पार्टी संगठन द्वारा युवा नेता सूरज सिंह को गढ़वा जिलाध्यक्ष बनाया गया है,जो पद पर आते ही गढ़वा में पार्टी संगठन को नयी रौशनी देने में जुट गए हैं,लेकिन बात तो हमें यहां उनके गर्म होने के वज़ह की करनी है तो उस बावत बताऊं की अंदरखाने में लाख गतिरोध है फ़िर भी झारखंड में सत्तासीन गठबंधन की सरकार की बात अब तलक बाहर नहीं आ रही है,लेकिन आज जैसा राजद जिलाध्यक्ष द्वारा कहा गया उससे यह बात निश्चित रूप से ज़ाहिर हो गया कि बहुत कुछ ठीक नहीं है और अब उसका सतह पर आना शुरू हो गया है,दरअसल जिला राजद कार्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए सूरज सिंह ने सीधे रूप में यह कह डाला कि राज्य के साथ साथ पलामू प्रमंडल और गढ़वा में जेएमएम राजद वोट के बदौलत ही चुनाव जीता है,लेकिन उसके बावजूद भी हमारी यानी राजद की अनदेखी हो रही है,बात अग़र गढ़वा की हो तो यहां राजद को यह समझना मुश्किल हो रहा है कि हम गठबंधन में हैं या नहीं,साथ ही साथ उनका कहना है कि वो चाहे सड़क हो या रेल की पटरी अगर गाड़ियां संतुलित हो कर चलती हैं तो ससमय गंतव्य तक पहुंचती हैं,लेकिन वहीं वो असंतुलित हो कर चलना शुरू कर देती है तो उसे दुर्घटना का शिकार होना पड़ता है,अब यहां सवाल उठता है कि क्या ऐसा कह कर सूरज सिंह ने बहुत कुछ संकेत दे दिया..?

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