Bindash News || तब कीजिये बेहतरी की चर्चा: चंदन
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

State

तब कीजिये बेहतरी की चर्चा: चंदन

Bindash News / 11-07-2021 / 643


दिन में पाठशाला और रात में मधुशाला


आशुतोष रंजन
गढ़वा

सबको शिक्षा सबको मान,पढ़ कर बच्चे बने महान,कोई भी बच्चा छूटे ना,क्रम शिक्षा का टूटे ना,ऐसे कई नारों को सरकार और सरकारी महक़मा अपने ज़बान से दुहराते नहीं थकता,पर शैक्षणिक हालात की ज़मीनी सच्चाई देखनी हो तो ज़रा गढ़वा का रुख़ कर लीजिए जहां की स्थिति देख आप खुद बोल पड़ेंगें की हे भगवान एक स्कूल ऐसा भी..

दिन में पाठशाला,रात में मधुशाला:- टूटे पड़े शराब के बोतल,बाहर से ले कर अंदर तक पसरी पड़ी गंदगी,इन सबके बीच जर्जर हो कर ढह जाने के हालात में पहुंच चुका भवन,जी हां यह चर्चा हम किसी पुराने मधुशाला की नहीं बल्कि पाठशाला की कर रहे हैं,उस पाठशाला की नहीं जो नवीन है बल्कि सैकड़ा साल पहले का यानी प्राचीन है,दरअसल हम बात गढ़वा जिला मुख्यालय में 105 साल पूर्व अवस्थित प्रमोद संस्कृत विद्यालय की कर रहे हैं,कभी सैकड़ो बच्चों से भरा रहने वाला उक्त विद्यालय आज बच्चों की राह ताक रहा है,वर्ग एक से आठ तक के इस विद्यालय में दहाईं संख्या में भी बच्चे नहीं आते,वो आ कर भी क्या करें क्योंकि यहां उनकी प्रतिभा शिक्षित हो कर निखरती नहीं बल्कि कुंठित होती है,क्योंकि जहां एक तरफ़ ना तो उन्हें बैठने की माकूल व्यवस्था है और ना ही उन्हें कभी किताब और ड्रेस ही मिला है,उधर पढ़ाने कहें या सारी व्यवस्था देखने के लिए मात्र एक शिक्षक ही मौजूद थे,लेकिन अब तो वो भी नहीं रहे,क्योंकि पिछले दिनों उनका निधन हो गया,अब विद्यालय और बच्चे दोनों शिक्षक विहीन हो गए।

 

गाड़ियों के शोर में गुम हुआ संस्कृत का श्लोक:- जिस विद्यालय में कभी अन्य विषयों की पढ़ायी के साथ साथ संस्कृत के श्लोक गूंजते थे आज वो आवाज व्यवस्था की बदहाली में कहीं गुम हो गयी,उधर यहां आने वाले कुछ बच्चों की आवाज़ विद्यालय के पास में स्थित गैराज की गाड़ियों के शोर में दब कर रह गयी,पिछले साल कोरोना के पहले दौर से पूर्व जब स्कूल खुले हुए थे तब हम उक्त स्कूल के हालात को देखा था,जब हम वहां पहुंचे थे तो एकमात्र शिक्षक और बच्चे एक आशा भरी नज़रों से हमारी ओर तब तक देखते रहे थे जब तक हम ख़बर संकलन के लिए वहां मौजूद रहे,बच्चों ने बताया था कि इतने विषम हालात के बाद भी अगर हम पढ़ना चाहें तो पढ़ नहीं पाते,दूसरी ओर अब तलक स्वच्छता का ढिंढोरा पीटा जा रहा है,लेकिन उस रोज़ विद्यालय में जाने के लिए कितना जुगत करना पड़ा था उसे शब्दों में बयां करना आज भी मुश्किल लग रहा है,क्योंकि विद्यालय के बरामदे से ले कर बाहर तक पटी पड़ी गंदगी उस अभियान की विफ़लता को परिलक्षित कर रहा है,खुद भी सोचने पर विवश हो जाना पड़ा था,जब यहां पढ़ने वाली बड़ी बच्चियों ने कहा था कि उनके लिए शौचालय तक नहीं है,विद्यालय की रसोइया ने तो पूरी तरह प्रमाणित कर दिया था कि यह केवल दिन में पाठशाला है जबकि रात में मधुशाला बन जाया करता है,कारण की रोज़ सुबह उसे गोबर से ज़्यादा शराब की कुछ खाली तो कुछ टूटी हुई बोतलें उठा कर फेंकनी पड़ती है।

 

तब कीजिये बेहतरी की चर्चा:- कर के सरज़मीन पर माक़ूल ख़र्चा,तब न कीजिये बेहतरी की चर्चा",जी हां शहर के साथ साथ गांव की छोटी से ले कर बड़ी समस्या के बावत समय समय पर जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराने वाले युवा समाजसेवी सह सांसद के नगर परिषद प्रतिनिधि चंदन जायसवाल द्वारा पूरी तरह बदहाल उक्त संस्कृत विद्यालय के हालात सुधरे इसे ले कर जिला शिक्षा अधीक्षक से मुलाक़ात की,और उन्हें बजाप्ते एक आवेदन देते हुए अनुरोध किया गया कि प्राचीन संस्कृत विद्यालय की दुर्दिन्ता को दूर करते हुए इसे सुव्यवस्थित किया जाए ताकि आने वाली पीढ़ियां शिक्षा ग्रहण करने के साथ साथ अपने यहां प्राचीन विद्यालय होने को ले कर गर्व कर सकें,साथ ही चंदन ने कहा कि कालांतर से गुज़र रहे वर्तमान वक्त तक शिक्षा व्यवस्था में सुधार करने के वादे और कुछ दिखावा कर के दावे भी सरकार और सरकारी स्तर पर किये जाते रहते हैं,लेकिन कितना हद तक नेक नियति और ईमानदारी से कार्य हो रहा है उसे इस विद्यालय के हालात से बेशक समझा जा सकता है,साथ ही कहा कि जिस तरह किसी भी कार्य को ज़िम्मेवारी के साथ धरातल पर मूर्तरूप दे रहे जिला शिक्षा अधीक्षक संजय पांडेय से बुझ चुकी उम्मीद एक बार फ़िर से जागृत हुई है,और आशा है कि वो हमारे अनुरोध पर ध्यान देते हुए इस ओर गंभीरता से पहल करेंगें।

सुदूर गांव के बच्चों को भी शिक्षित कर जिले और राज्य को पूर्ण शिक्षित बनाने के उद्देश्य से किये जा रहे सरकार और सरकारी प्रयास को केवल दिखावा करार देने के लिए इस प्राचीन विद्यालय की बदहाली काफ़ी है,अब देखना यह होगा कि कब तलक हालात में सुधार होता है और बच्चे एक सुव्यवस्थित शैक्षणिक माहौल में पढ़ायी कर पाते हैं ?

Total view 643

RELATED NEWS