Bindash News || कुंद करने नक्सलियों की नीति,गढ़वा में बनी रणनीति
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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कुंद करने नक्सलियों की नीति,गढ़वा में बनी रणनीति

Bindash News / 30-08-2021 / 610


गढ़वा में हुई इंटरस्टेट बैठक...


आशुतोष रंजन
गढ़वा

कभी रात के अंधेरे में कौन कहे दिन के उजाले में दस्तक देते हुए बेख़ौफ़ हो कर नक्सली विचरण करने के साथ साथ घटना को सफ़लता से अंजाम दिया करते थे,लेकिन यह बात कालांतर की हो गयी,वर्तमान गुज़र रहे वक्त को नज़र करें तो नक्सली जहां एक पॉकेट में सिमट कर रह गए हैं वहीं अपनी उपस्थिति दर्ज़ कराने की स्थिति में भी नहीं हैं,यह सब संभव हुआ है पुलिस और सीआरपीएफ द्वारा चलाये जा रहे अनवरत अभियान के कारण,अब उस पॉकेट से भी उन्हें बेदख़ल करते हुए जिला सहित अन्तर्राजिय इलाक़े को पूरी तरह नक्सल मुक्त कराने को ले कर एक बड़ी रणनीति बनी,कहां हुई बैठक और कौन कौन आलाधिकारी रहे मौजूद आइये आपको इस ख़ास ख़बर के जरिये बताते हैं।

जहां वो ख़ुद को छुपाए बैठे हैं:- यही है वो पॉकेट,जहां वो ख़ुद को छुपाए बैठे हैं",जी हां आपने शुरू में पढ़ा कि नक्सली एक पॉकेट में सिमट कर रह गए हैं,ऐसे में आप यह जानना चाह रहे होंगें की वो पॉकेट कौन सा है तो आपको बताऊं की वो पॉकेट है झारखंड छतीसगढ़ सीमा पर अवस्थित बूढ़ा पहाड़,जहां एक मांद में छुप कर वो ख़ुद के वजूद को बचाये रखने की जद्दोजहद जुटे हैं,इस जानकारी से तो आप भी पूरी तरह वाक़िफ़ हैं की कई इलाक़ों से खदेड़े जाने के बाद कुछ साल पहले नक्सलियों के बड़े नेताओं द्वारा इसी बूढ़ा पहाड़ को अपना शरणगाह बनाया गया,यहीं से बैठ वो झारखंड,बिहार और छत्तीसगढ़ में घटना को अंजाम देने लगे,इधर एक छोटे से फोड़े से नासूर का रूप ले चुके नक्सलियों के ख़ात्मा के निमित लड़ायी लड़ रही पुलिस और सीआरपीएफ का संयुक्त अभियान परवान चढ़ा और परिणाम यह हुआ कि पहाड़ से नीचे उतरने पर मौत के जद्द में आने के डर से नक्सली उक्त पहाड़ के एक पॉकेट में ख़ुद को सिमटा लिए,आज आलम है कि पहाड़ के चारो ओर से पुलिस जवान उनपर बाज वाली नज़र लगाए हुए हैं,नतीज़ा है कि कल बहुत कुछ बड़ा सोच कर उक्त पहाड़ पर पहुंचे नक्सली आज कुछ सोचने की स्थिति में नहीं हैं,यहां यह भी बता देना ज़रूरी है कि यही बूढ़ा पहाड़ नक्सलियों का थिंक टैंक कहे जाने वाले एक करोड़ का इनामी नक्सली अरविंद कुमार की मौत का भी गवाह बन चुका है।

गढ़वा में बनी रणनीति:- कुंद करने नक्सलियों की नीति,गढ़वा में बनी रणनीति", कल खुले रूप से परवाज़ करने वाले जो नक्सली कटे पर के मानिंद पहाड़ पर ख़ुद के वजूद को बचाने में लगे हैं,यह सब दो कारणों से संभव हो पाया है,एक ओर जहां पुलिस और सीआरपीएफ द्वारा उनके विरुद्ध चलाया जाने वाला अनवरत छोटा बड़ा अभियान है तो वहीं सिविल प्रशासन द्वारा किया जा रहा विकास कार्य,आप इससे तो अनभिज्ञ नहीं हैं कि अबोध ग्रामीणों को उनके पिछड़ेपन का बोध कराते हुए बहला और बरगला कर साथ लेने और ख़ुद को उनका हमदर्द बताने वाले नक्सली आज उन्हीं के लिए असहनीय दर्द बन गए,कल जो गांव नक्सलियों को अपना हिमायती मानता था,उनके गांव आने पर उन्हें हर तरह से साथ दिया करता था,और उनकी बातों को स्वीकारते हुए प्रशासन को अपना विरोधी मानता था,आज आलम है कि वही गांव नक्सलियों को विकास का बाधक समझने लगा,यहां तक कि कई गांव में उनके आने पर भी रोक लगा दी गयी,यानी एक ओर बंदूक तो दूसरी ओर विकास नक्सलियों के पांव उखाड़ने में सहायक सिद्ध हुआ,पुलिस और सीआरपीएफ की पूर्व की रणनीति तो वर्तमान तक कारगर साबित हो ही रहा है,लेकिन एक बार फ़िर से एक कंक्रीट रणनीति बने ताक़ि नक्सल प्रभावित नहीं बल्कि नक्सल मुक्त जिला सबके ज़ेहन में पेवस्त हो सके इस निमित आज गढ़वा में पलामू डीआईजी राजकुमार लकड़ा की अध्यक्षता में पुलिस केंद्र में पुलिस और सीआरपीएफ के साथ साथ सिविल प्रशासन के वरीय अधिकारियों की मौजूदगी में इंटरस्टेट बैठक हुई,जहां स्टेट बॉर्डर पर होने वाली नक्सली गतिविधियों की जानकारी एक दूसरे से साझा की गयी,साथ ही साथ अग़र पॉकेट में सिमट कर ही सही अग़र नक्सली कोई नीति बना रहे हैं तो उस पर काम शुरू करें इससे पहले ही उनकी नीति को कुंद करने को ले कर एक साझा रणनीति बनायी गयी।

बैठक में ये रहे मौजूद:- ख़त्म करने को नक्सलियों की अंतिम वजूद,रणनीति वाली बैठक में ये रहे मौजूद",नक्सलियों के विरुद्ध इंटरस्टेट बैठक कर बनायी गयी एक कंक्रीट रणनीति वाली आज की बैठक में गढ़वा उपायुक्त राजेश पाठक,पुलिस अधीक्षक अंजनी कुमार झा,उपायुक्त बलरामपुर,एसपी बलरामपुर,उपनिदेशक पलामू टाइगर रिजर्व,द्वितीय कमान अधिकारी सीआरपीएफ 172 बटालियन,द्वितीय कमान अधिकारी सीआरपीएफ 62 बटालियन,एएसपी गढ़वा,एसडीपीओ महुआडांड़,एसडीपीओ बरवाडीह मुख्य रूप से मौजूद रहे ।

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