Bindash News || 1 घंटा 20 मिनट में मिल गए गुरुजी
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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1 घंटा 20 मिनट में मिल गए गुरुजी

Bindash News / 12-10-2021 / 954


इसे कहते हैं बदलाव का नज़रिया


आशुतोष रंजन
गढ़वा

आज एक बार फ़िर से लिखने को जी कर रहा है कि नाम के अनुरूप उनमें दिव्यदृष्टि भले ना हो पर दूरदृष्टि तो ज़रूर समाहित है,तभी तो हर रोज़ उनके द्वारा एक नया आयाम गढ़ा जा रहा है,हम बात यहां जिला शिक्षा पदाधिकारी सह जिला शिक्षा अधीक्षक संजय पांडेय की कर रहा हूं,अब आज उनके द्वारा कौन सा अभिनव कार्य किया गया आइये आपको अपने इस ख़ास ख़बर के जरिये बताता हूं।

मिल गए गुरुजी:- कभी कभी क्या हर बार कुछ लोगों को मेरे ख़बर के शीर्षक से ऐतराज रहता है,पर मैं क्या करूं वैसा विषय ही सामने आ जाता है कि कुछ अलग लिखने पर विवश हो जाता हूं,अब ऊपर में इस ख़बर का शीर्षक पढ़ कर आप जरूर मन में यही कह रहे होंगें की कोई गुरुजी खो गए थे,या किसी शिक्षक का अपहरण हो गया था कि उनके मिलने के बाद यह शीर्षक लिखा गया है कि 1 घंटा 20 मिनट में मिल गए गुरुजी,दरअसल यह शीर्षक ख़बर के मुताबिक़ ही है,लेकिन पहले यह स्पष्ट कर दूं कि कोई गुरुजी खोए नहीं और किसी शिक्षक का अपहरण नहीं हुआ था,बल्कि जिले के एक स्कूल को एक लंबी अवधि बाद एक शिक्षक मिले,आपको बताएं कि उक्त स्कूल में सभी शिक्षक थे पर गणित विषय के शिक्षक नहीं होने के कारण नवीं और दसवीं के बच्चे गणित की पढ़ायी से महरूम थे,बच्चों के साथ साथ स्कूल के प्राचार्य द्वारा अनवरत गुहार लगाया जा रहा था पर अब तक उक्त स्कूल को शिक्षक उपलब्ध नहीं कराया गया था,पर आज शिक्षक तब मिले जब यह जानकारी शिक्षा पदाधिकारी संजय पांडेय को हुई,उनके द्वारा अल्प समय में ही एक शिक्षक की ख़ोज की गयी,और साथ ही उनके द्वारा शिक्षक खोजने का पुरातनी कोरम पूरा नहीं किया गया बल्कि वो ख़ुद शिक्षक को ले कर स्कूल पहुंचे,जानकारी के साथ साथ शिक्षक को स्कूल ले जाने तक कि क्षणिक वक्त में उनके द्वारा क्या क्या किया गया आइये अब उनके लिखे अनुसार जानते हैं।

इसे कहते हैं बदलाव का नज़रिया:- अधिकारी लिखते हैं कि आज सुबह 9:45 पर जिले के एक सरकारी हाई स्कूल के प्रधानाध्यापक से बात होती है कि उनके विद्यालय में तत्काल एक गणित शिक्षक की जरूरत है,उनके यहां गणित शिक्षक नहीं होने से नवमी-दशमी के बच्चों को बहुत दिक्कत हो रही है,मैंने 15 मिनट के भीतर शिक्षक का नाम सोचकर अपने कार्यालय कर्मियों को निर्देश दिया कि वो मेरे स्तर से प्रतिनियुक्ति आदेश बनाकर रखें,निर्देश के साथ ही त्वरित कार्य शुरू हुआ और 10:30 बजे कार्यालय आदेश बन गया,10: 45 बजे आदेश पर मेरे हस्ताक्षर भी हो गये,11: 00 बजे मैं शिक्षक महोदय को अपनी गाड़ी में बैठा कर उक्त विद्यालय पहुंच गया,11.05 बजे मैं सीधे दसवीं क्लास रूम में उन्हें ले गया और बच्चों से परिचय करा दिया कि आज से ये आप के गणित के शिक्षक हैं,इनसे आप पढ़ना शुरू कर दीजिए,मैंने बच्चों से कहा कि जो अवधि आपने गणित शिक्षक बिना गुजारे हैं मैं उसे वापस तो नहीं कर सकता पर इतना ज़रूर कहूंगा कि अब आगे आपको शिक्षक के नहीं होने की विवशता नहीं होगी,आप बस पूर्ण मनोयोग से पढ़ें और अपने स्कूल के साथ साथ घर परिवार,गांव,जिला और राज्य का नाम रौशन करें,शिक्षक के नहीं होने की जानकारी होना और शिक्षक को तलाश उनकी प्रतिनियुक्ति और उन्हें स्कूल ले कर जाने तक इस पूरे घटनाक्रम में एक घंटा बीस मिनट का समय लगा,जिसके लिए कब से बच्चों की पढ़ायी बाधित हो रही थी,मात्र इस अल्प समय में उनका भविष्य सुरक्षित हो गया,वो कहते हैं कि कक्षा में उस वक्त लगभग 80 प्रतिशत छात्राएं बैठी हुयीं थी,अपने बीच नए गणित शिक्षक को पाकर बच्चियां कुछ इस क़दर ख़ुश हुईं की मानों उनका वो ख़्वाब पूरा हुआ जो उनके लिए शायद दिन के उजाले में देखा जाने वाला सपना दिवास्वप्न बन गया था,उन सभी ने खड़े होकर मुझे धन्यवाद कहा तो मैंने कहा कि आज अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस है आप सभी को इस दिवस पर उपहार स्वरूप ही ये विद्वान गणित शिक्षक दे रहा हूं,अब एक जज़्बे के साथ पढ़ने की ज़िम्मेवारी आपकी है।

काश सभी गढ़ते ऐसे आयाम:- जिला से हो कर राज्य और फ़िर राज्य से देश तक जाता एक पयाम,काश सभी गढ़ते ऐसे आयाम,चंद शब्दों का यह अल्फ़ाज़ हम यूं ही नहीं कह रहे बल्कि उनके द्वारा अनवरत किये जा रहे अभिनव कार्य को नज़र करते हुए हर शख़्श के ज़बान बरबस बोल पड़ रहे हैं कि "वो काम कर रहे हैं आप की लोग याद आपको आजीवन किया करेंगें,ग़र लेंगें नाम आपका तो बड़े बा अदब लिया करेंगें।"

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