Bindash News || एक "अधिकारी" ऐसा भी
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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एक "अधिकारी" ऐसा भी

Bindash News / 28-09-2018 / 1825


पांव है क्रैक,फ़िर भी काम पर नहीं है ब्रेक
पैर टूटा है,हौसला नहीं:नीरज
 
आशुतोष रंजन
गढ़वा
 
हो दर्द चाहे जैसा भी,रोक नहीं रहे काम वो,है एक अधिकारी ऐसा भी,जी हां आज हम गढ़वा जिला में पदस्थापित एक ऐसे अधिकारी के बारे में बताने जा रहे हैं जो हैं दर्द से बेज़ार फ़िर भी निपटा रहे काम हज़ार,तो आइए उन से रूबरू होने कर लिए पढ़िए यह रिपोर्ट-
 
नहीं है काम पर ब्रेक:- है उनका पांव क्रैक,फ़िर भी नहीं है काम पर ब्रेक,जी हां कुछ ऐसे विषम हालात में रह कर भी अपनी जिम्मेवारी का निर्वहन करने वाले अधिकारी का नाम है नीरज कुमार जो फ़िल्वक्त जिले के नगर उंटारी अनुमंडल मुख्यालय में पुलिस उपाधीक्षक यानी डीएसपी के पद पर काबिज़ हैं,कैसे हुई दुर्घटना के बाबत बताएं तो कुछ दिन पहले पुलिस कप्तान शिवानी तिवारी द्वारा पुलिस लाइन में आयोजित बॉलीबॉल प्रतियोगिता में खेलने के दौरान डीएसपी नीरज कुमार का पैर क्रैक कर गया,असहनीय दर्द से कराह रहे अधिकारी को जहां एक तरफ़ दर्द से राहत पाने की आतुरता थी वहीं कर्तव्यपरायण होने के कारण अब सभी कामों पर असर पड़ेगा इसकी चिंता साल रही थी,लेकिन ऑप्रेसन हो जाने के तुरंत बाद आराम करने बजाए अधिकारी दिन रात काम में जुटे हुए हैं।

कार्य है चलायमान:- है स्थिर शरीर भले,पर कार्य है चलायमान",जी हां ऑप्रेसन होने के बाद चलने की स्थिति में नहीं रहने के कारण नीरज कुमार का शरीर चलने से असमर्थ हो कर भले स्थिर है लेकिन कार्य चलायमान है क्योंकि उनके द्वारा अहले सुबह से देर शाम तक किसी प्रकार बैठ कर तकलीफ़ से दोहरा होते हुए भी कार्यों को निपटाया जा रहा है,आप खुद तस्वीर के जरिये देख कर अंदाज़ा लगा सकते हैं कि किस कठिन हालात में अपने दायित्व को निभा रहे हैं डीएसपी नीरज कुमार।
 
हौसला तो नहीं:- राह में पड़े पर्वत को हौसले से तोड़ने वाले हैं हम,गर रोके कभी जो राह दरिया,धार उसकी मोड़ने वाले हैं हम",कुछ इसी दिली जज़्बे से लबरेज़ नीरज कुमार कहते हैं कि हमारा पैर टूटा है,हौसला नहीं,समाज और देश की सुरक्षा का संकल्प ले मैदान में आने वाले हम पुलिस सेवा वाले कभी हिम्मत नहीं हारते,जिसकी बानगी आपको कई मौकों पर देखने को मिली होगी,साथ ही कहा कि हमारी कोशिश यही है कि यह ज़ख्म तो कुछ दिनों का है भर जाएगा,आज जो दर्द है उससे कल राहत पा लूंगा,लेकिन इस हालात में भी काम इसलिए कर रहा हूं कि मेरे इस काम के बिना किसी का जीवन हलकान ना हो जाये,इसलिए अपना दिल यही कहता है कि "दिवस का उजास हो या कालिमा हो रात की,चल रहा हूं,और यूं ही चलता रहूं,ना चिंता किये किसी बात की।"
 
 

 

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