Bindash News || एक हुए सत्येंद्र नाथ और मिथिलेश
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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एक हुए सत्येंद्र नाथ और मिथिलेश

Bindash News / 18-03-2022 / 1530


बुरा मत मानिए होली है...


आशुतोष रंजन
गढ़वा

सच कहा गया है कि होली ही एक ऐसा त्योहार है जहां एक दूसरे को रंग लगाते हुए दो दुश्मन भी एक दूसरे के गले लगते हुए एक हो जाते हैं,साथ ही किसी की बातों और हरक़तों का बुरा नहीं मानते हैं,मेरे इन बातों का भी मत ही मानियेगा,तभी तो आज होली से एक रोज़ पहले जो सूचना मिल रही है उसके अनुसार कल तक पक्ष और विपक्ष की भूमिका का बखूबी निर्वहन करने वाले गढ़वा विधानसभा क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले दो राजनेता आज एक हो गए,दोनो के बीच बहुत देर की बातचीत हुई,फ़िर जो चेहरे एक दूसरे को देख गुस्से से लाल हो जाते थे,आज वही मुखड़े रंगों से सच में लाल हुए,हम बात यहां वर्तमान विधायक सह सूबे के मंत्री मिथिलेश ठाकुर और पूर्व भाजपा विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी की कर रहे हैं,जो आज एक हो गए,अरे भाई दोनो के बीच बहुत देर की बात हुई,देखने वाले बताते हैं कि हमने पूर्व विधायक की गाड़ी को मंत्री के आवास तरफ़ मुड़ते देखा,लेकिन आवास के मुख्य दरवाज़े पर ना रुकते हुए गाड़ी आगे बढ़ा,फ़िर इधर मंत्री का गाड़ी भी निकला,यह तो दोनों की गाड़ी देखने वालों की बात हो गयी,अब बताते हैं कि दोनों कि इतनी लंबी बातें आख़िर हुई कहां तो आपको बताऊं की दोनो कल्याणपुर डैम पहुंचे और घांस पर बैठ,दोनों ने घंटों बातें की,दूर से ही सही देखने वालों ने देखा कि बात के दौरान ही बार बार पूर्व विधायक द्वारा हांथ में बालू ले कर मंत्री को दिखाया जा रहा था,उधर मंत्री द्वारा उनके हाथ से उस बालू को बार बार गिराया जा रहा था,इसका मतलब आपके अनुसार तो यही होना चाहिए कि अरे हमको भी राजनीति करना है ऐसे अकेले अकेले सब काम नहीं होगा,हमार हाथ पैर कैसे चलेगा,उधर हाथ से बालू गिराते हुए मंत्री द्वारा कहा जा रहा होगा कि अरे आप क्यों फ़िक्र करते हैं,सब होगा,चिंता मत कीजिये,बस ज़रा तल्ख़ ज़बान को थोड़ा नरम कीजिये,बाक़ी तो हम हैं ही,आपको ई काहे नहीं दिख रहा है कि सबसे ज़्यादा आपके उस वक्त के ख़ास लोग ही आज हमारे सबसे क़रीब हैं,मतलब नगर परिषद से गोवावल तक,आप तो समझ ही गए होंगें,इसीलिए चिंतित मत होइए,सब काम होगा,उधर देखने वालों ने देखा कि बात ख़त्म होने के बाद दोनों ने एक दूसरे को गले लगाया,अब तो यहां सोचने वाली बात है कि जब दोनों एक हो गए तो क्या अब मंत्री जी मानहानि का मामला वापस ले लेंगे,और उधर पूर्व विधायक अब भइया जी नहीं कहेंगें,इन दोनों विषयों पर हम पत्रकारों की नज़र तो बनी रहेगी,लेकिन एक पत्रकार होने के नाते इतना तो ज़रूर कहूंगा कि इन बातों पर यक़ीन करना पूरी तरह ग़लत होगा क्योंकि बुरा ना मानो होली है।

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