Bindash News || देखिये नियत "बेईमानी",साहब को साफ जल,शहर को गंदा "पानी"
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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देखिये नियत "बेईमानी",साहब को साफ जल,शहर को गंदा "पानी"

Bindash News / 01-10-2018 / 957


बचेगी कैसे जीवन की निशानी,पी रहे लोग दूषित पानी

 
आशुतोष रंजन
 
गढ़वा
 
जो कहते हैं ना करें सेवन जल प्रदूषित,आज वही पिला रहे हैं पानी दूषित,जी हां सबको प्रदूषित होने से बचने और बचाने की क़वायद में जुटा पीएचईडी विभाग आज दशकों से गढ़वा में हजारों लोगों को पिला रहा दूषित पानी,बार बार गुहार-ए-आवाज़ लगा कर थक चुके लोग लोग मज़बूरी में प्रदूषित पानी पी कर तिल तिल कर मौत के मुंह में समा रहे हैं,मर चुकी प्रशासनिक संवेदना को परिलक्षित करती गढ़वा से एक ख़ास रिपोर्ट-
घोरान ही खा रहे घांस:- कैसे रखूं किसी से आस,जब घोरान हीं खाने लगे घांस,हमें हमारे हक़ से वाक़िफ़ कराने और सभी तरह से महफ़ूज रखने की ज़िम्मेवारी ख़ुद के कंधे पर लेने वाला सरकारी विभाग आज हमसे हांथ छुड़ा चुका है,मौत के मुंह से बचाने की क़वायद में अपने को जुटा कहने वाला आज हमें मौत के मुहाने पर ला रहा है,नाम कुछ और काम कुछ,हम बात कर रहे हैं गढ़वा के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की,विभागीय नाम के अर्थ की स्थिति दिखाने आइये आपको लिए चलते हैं कार्यालय से महज़ कुछ ही दूरी पर अवस्थित पेयजलापूर्ति केंद्र जहां से पूरे शहर को पानी की आपूर्ति होती है,लोगों को पानी पिला उसके जीवन को वजूद में क़ायम रखने वाला पानी टँकी आज लंबे चौड़े झाड़ियों और झुरमुटों के बीच ख़ुद के वजूद को बचाये रखने की जद्दोजहद में जुटा हुआ है,विभागीय नज़र का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि कई दशक पहले निर्मित पानी टंकी मरम्मती के अभाव में आज पूरी तरह जर्जर हो कर टूटने के कगार पर आ चुका है,उधर टंकी के अंदरूनी हालात भी काफ़ी भयावह है,सफाई से महरूम टंकी में आज जमाने से काई जमा है,जो पानी सीधे शहरों में आपूर्ति की जा रही है,पानी पीने वाले लोग कहते हैं कि टंकी से पानी को बिना फ़िल्टर किये आपूर्ति किया जा रहा है।
 
कब होती है सफाई:- कहां कभी नजर आयी,कब होती है सफाई",शहर के मध्य में रहने वाले इस भयावहता से भले नावाक़िफ़ हों लेकिन टंकी के क़रीब रहने वाले लोग कहते हैं कि उन्हें यहां रहते कई दशक गुज़र गए,लेकिन इन गुजरे सालों में शायद ही नजर आया हो कभी सफाई होते हुए,उधर पंचायत प्रतिनिधि द्वारा भी मौखिक से लिखित रूप में भी टंकी के सफाई के बाबत विभाग को लिखा गया,लेकिन सब कुछ जानते हुए भी विभाग इस ओर से अनजान बना हुआ है।
 
काश साहब भी पीते यही जल:- रहता हमारे प्रति भावना उनका निश्छल,काश पीते साहब भी यही जल,जी हां आज शहर के लोगों का मुख्य रूप से यही कहना है कि अगर जिले के आला साहेब को भी इसी टंकी से पानी आपूर्ति होती,वो भी इसी का पानी पीते तो आज यह टंकी इस दुर्दिन हालात से नहीं गुजरता लेकिन अफशोस साहब को मिलता है कहीं और से साफ जल,और हम पी रहे दूषित पानी।
 
एक तरफ़ दूषित पानी पी कर पल पल जीवन से दूर जाते लोग,उधर शहर को स्वच्छ करने और लोगों को साफ पानी दिए जाने की वकालत करती सरकार और प्रशासन,ऐसे विषम हालात में बरबस लोगों के दिलों से यही कसक बन निकलता है कि "हो रहे हैं हम दूर ज़िंदगी से,आ रही मौत अपने हिस्से,और हुजूर आप सुना रहे छलकते नीर के किस्से।"
 
 

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