Bindash News || गढ़वा JMM में सबकुछ सही नहीं है क्या.?
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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गढ़वा JMM में सबकुछ सही नहीं है क्या.?

Bindash News / 01-04-2022 / 1366


क्या कंचन का सवाल था यक्ष,की विपक्ष में बोले अध्यक्ष.?


आशुतोष रंजन
गढ़वा

राजनीति में वो चाहे सत्तापक्ष हो या विपक्ष नेताओं में आपसी प्रतिद्वंदिता के साथ साथ मनमुटाव भी होता है,लेकिन वो आपसी बैठक में ही ज़ाहिर होता है,शायद ही कभी ऐसा हो जब आपस का मनभेद सार्वजनिक रूप से ज़ाहिर हो जाये,पर आपको बताएं कि वो झारखंड का गढ़वा जिला ही है जहां मनभेद और मतभेद आम के बीच भी ज़ाहिर हो जाता है,अब तलक तो विपक्ष यानी भाजपा नेताओं के बीच का आपसी मनमुटाव परिलक्षित होता आया था पर आज जो हुआ उसे देख कर तो निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि सत्तापक्ष यानी गढ़वा जेएमएम में भी सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है,आख़िर कैसे,आइये आपको इस ख़ास ख़बर के जरिये बताता हूं।

क्या गढ़वा JMM में सबकुछ सही नहीं है क्या ? :- यह सवाल उस वक्त से जेहन में कौंध रहा है जबसे आपस का मनभेद सार्वजनिक रूप से नुमाया हुआ है,अपनी बुद्धिमता और व्यवहार कुशलता के साथ नेताओं को एकसूत्र में पिरो कर पार्टी की माला को तरोताज़ा रखने वाले विधायक सह मंत्री मिथिलेश ठाकुर द्वारा आख़िर कहां चूक हो रही है कि नेताओं का आपसी मतभेद सार्वजनिक हो रहा है,सबकुछ खुल कर कहा हज नहीं जाता,बल्कि आपका हावभाव और किसी मंच पर आपके द्वारा कही गयी बातें सबकुछ परिलक्षित कर जाती हैं,जैसा कि आज हुआ,आपको बताऊं की गढ़वा शहर थाना परिसर में आज रामनवमी पर्व को अमन के माहौल के साथ संपन्न कराने को ले कर शांति समिति की बैठक आयोजित की गयी थी,जहां प्रशासन के कनीय और वरीय अधिकारियों के साथ साथ शहर और आस पास के प्रबुद्ध लोग एवं सत्तापक्ष और विपक्ष के नेता भी मौजूद थे,यही वो आयोजन का मौक़ा था जहां आपसी मतभेद ज़ाहिर हुआ।

की विपक्ष में बोले अध्यक्ष:
- क्या कंचन का सवाल था यक्ष,की विपक्ष में बोले अध्यक्ष.?", राजनीति में आने और विधायक के प्रतिनिधि बनने से पूर्व कई सालों से उनके द्वारा एक समाजसेवी के रूप में समाजहित में कार्य किया जा रहा है,एक समाजसेवी होने के लिहाज़ से उन्हें समाज की परेशानी से अहसास है तभी तो निजी रूप से या सार्वजनिक तौर पर भी समस्या निदान के जिम्मेवार अधिकारियों को आवाम की परेशानियों से अवगत कराया जाता है,कुछ ऐसी ही गढ़वा शहर की सबसे बड़ी परेशानी गंदगी के बावत समाज के प्रबुद्ध व्यक्ति के साथ साथ अपनी पार्टी के नेताओं द्वारा जब आज की बैठक में कहा गया और उक्त विषय जब वहां मौजूद अधिकारी को नागवार गुज़रा और उनके द्वारा प्रतिकार किया गया तो कंचन साहू को सहन नहीं हुआ और उनके द्वारा सीधे तौर पर कहा गया कि बैठक किसी विषयक हो जब समाज के सामने प्रशासनिक अमला मौजूद रहेगा तो सामने आने वाली समस्या के निदान के बावत लोग सवाल करेंगें ही,लेकिन अग़र कुछ कहना ग़लत है तो बैठक बुलाने का क्या औचित्य रह जाता है,अब अग़र हम पार्टी यानी जेएमएम के जिलाध्यक्ष द्वारा कंचन के बातों का समर्थन नहीं किये जाने के विषय पर आवें तो जब जिलाध्यक्ष के बोलने की बारी आयी तो शांति समिति की बैठक का उद्देश्य और अमन के साथ त्योहार मनाए जाने के अपने पूर्व के संकल्प को दुहराए जाने के साथ साथ उनके द्वारा अपनी पार्टी के विधायक प्रतिनिधि कंचन साहू की बातों को सिरे से ग़लत ठहराया गया,कहा गया कि समस्या कहा जाना सही है,पर यह ना तो यह मंच सही था और ना ही उनका इस तरह का व्यवहार करना,जिलाध्यक्ष द्वारा प्रतिनिधि की बातों से सरोकार नहीं रखना और खुले रूप में सार्वजनिक मंच से ही विरोध जताना यह ज़ाहिर कर रहा है कि गढ़वा जिला JMM में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है,क्योंकि किसी ना किसी रूप में मनभेद सार्वजनिक पटल पर सामने आ रहा है,जो कहीं ना कहीं पार्टी की सेहत के लिए ठीक नहीं है,क्योंकि कहीं ऐसा ना हो कि मौक़े की ताक में बैठा विपक्ष गर्म लोहा देख कर हथौड़ा मार दे.?


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