Bindash News || है सदमा पर पूरा भी करना है बेटे का सपना
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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है सदमा पर पूरा भी करना है बेटे का सपना

Bindash News / 05-05-2022 / 2419


नवादा पंचायत से मुखिया प्रत्याशी हैं मनीष की माँ


आशुतोष रंजन
गढ़वा

यह तो सर्वविदित है,हम आप सभी इस जानकारी से बख़ूबी वाक़िफ़ हैं कि हमने जिस रोज़ जन्म लिया है उसी दिन वो वक़्त भी मुक़र्रर हो गया है कि हम सबों का प्राणांत कब होगा यानी मौत भी तय है,लेकिन हर किसी के मरने के बाद एक असहनीय तकलीफ़ होता है,वो असहनीय कष्ट कुछ कम तब होता है जब कोई अपना पूरा उम्र जी कर साथ छोड़ता है,लेकिन दुनिया में सबसे बड़ा दुख उसे कहा जाता है जब किसी माँ के जीवित रहते उसके बेटे की मौत हो और साथ ही पिता को पुत्र की अर्थी को कांधा देना पड़े,कुछ ऐसे ही करुण और असहनीय पीड़ा को हर पल झेलने को विवश हैं एक पिता और माँ,जिसके बुढापे का इकलौता सहारा बेटे की मौत हो गयी,लेकिन इस विषम हालात में भी उस माँ को आख़िर बेटे के किस सपने को पूरा करने के लिए घर से बाहर आना पड़ा,आइये आपको इस ख़ास ख़बर के जरिये बताते हैं।

पर ऊपरवाले को ले जाना था:
- हम सबों की चाहत रखने की थी,पर ऊपरवाले को तो ले जाना था",माँ के जिस बेटे के निधन की बात मैं यहां कर रहा हूं,उसके मौत से परिवार को तो गहरा आघात लगा है ही,लेकिन उसे जानने वाले सभी लोग मर्माहत हैं,मैं बात यहां नायाब हुनरमंद युवा पत्रकार सह बिंदाश न्यूज़ के नायाब एडिटर मनीष लोहार की कर रहा हूं,जिसकी मौत गुज़रे दो मई को रांची में इलाज़रत अवस्था में हो गयी,आपको बताएं कि मनीष 18 मार्च को अपने पूरे परिवार के साथ बहन के यहां से गढ़वा लौट रहा था की रास्ते में भिखही मोड़ पास दुर्घटना हुआ जिसमें सबके साथ साथ वो भी गंभीर रूप से घायल हुआ,सभी को इलाज़ वास्ते गढ़वा सदर अस्पताल लाया गया जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज़ वास्ते रांची रेफ़र कर दिया गया,जहां उसका इलाज़ रामप्यारी अस्पताल में चलता रहा,कम ही दिनों की पत्रकारिता में अपने व्यवहारकुशलता से सबके दिलों में पेवस्त हो जाने वाले मनीष के जल्द ठीक हो जाने को ले कर जहां एक ओर सबने भगवान से प्रार्थना की वहीं माँ गढ़देवी मंदिर में अखंड दिप भी जलता रहा,इस बीच दो बड़े ऑपरेशन भी हुए,सबको लगा अब मनीष पूरी तरह स्वस्थ हो कर पहले की तरह हम सबों के बीच होगा,यहां पर यह बताना भी बेहद ज़रूरी है कि एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले मनीष के इलाज़ में जब ज़्यादा ख़र्च आने लगा तो सहयोग की अपील करने के साथ ही जिससे जितना बना सबने आर्थिक मदद भी किया,साथ ही साथ यह भी बता ही दूं कि जिस रोज़ मनीष का दूसरा बड़ा ऑप्रेसन हुआ,उस रोज़ लोगों द्वारा किये गए आर्थिक मदद दो लाख 50 हज़ार रुपये से ही हुआ,कहने का मतलब यह है कि मनीष को अपने पास रखने की चाहत सभी ने की पर ऊपरवाले को कुछ और ही मंजूर था,सो असमय ही उसे हमसे छीन ले गए।

पर पूरा भी करना है बेटे का सपना:- है गहरा सदमा,पर पूरा भी करना है बेटे का सपना", यहां पर एक बात जो जेहन में कौंध रहा है वो यह है कि मनीष की दिली चाहत थी कि माँ मुखिया बने,इस निमित जहां एक तरफ़ वो हर बार कहता भी था कि भइया चुनाव में कोई कसर नहीं छोड़ना है,माँ को मुखिया बना देना है,न्यूज़ के सिलसिले में अधिकारी,राजनेता या अन्य किसी के पास जाना होता था तो वहां मनीष याद ज़रूर कराता की भइया बोल न दीजिये की माँ को भी चुनाव लड़ाना है,और मैं वहां कहता,कहने का मायने है कि मनीष का दिली ख़्वाब था कि माँ मुखिया बने,और हां एक बात जो बताया गया कि मौत से एक रोज़ पहले मनीष द्वारा माँ से कहा गया माँ घरे जाव न,नॉमिनेशन भी करना होगा न,इधर माँ रिम्स से घर आती हैं और उधर दूसरे रोज़ मनीष दुनिया छोड़ जाता है,अंतिम वक्त में भी चुनाव के लिए माँ को घर भेज देने की बात को याद करते हुए माँ इस विषम हालात में भी अपने जिगर के टुकड़े के सपने को पूरा करना चाहती हैं,तभी तो उनके द्वारा आज नवादा पंचायत से मुखिया प्रत्याशी के रूप में नामांकन किया गया,जहां एक ओर उनके द्वारा करुण गुहार के साथ मतदाताओं से वोट के रूप में वो साथ देने की मांग की जा रही है जिससे उनके बेटे का सपना पूरा हो सके,तो उधर दूसरी ओर मनीष के चाहने वाले वो सभी लोग जिनके दिलों में मनीष बसता था,जिनके द्वारा उसे सलामत रखने की हर कोशिश की गयी,मैं उन सभी लोगों से करबद्ध गुज़ारिश करूंगा कि वो भी अपने अपने तरह से वोट की अपील करें ताकि मनीष का दिली ख़्वाब पूरा हो सके।

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