Bindash News || जीता लोकतंत्र...हारा नक्सलतंत्र
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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जीता लोकतंत्र...हारा नक्सलतंत्र

Bindash News / 14-05-2022 / 646


आज बुलेट पर भारी दिखा बैलेट


आशुतोष रंजन
गढ़वा 
 
सच कहा गया है नेक नियत के साथ ईमानदार प्रयास किया जाए तो वक्त बदलते देर नहीं लगती तभी तो आज वह दृश्य नज़रों के सामने नुमाया हुआ जो शायद कभी नहीं दिखा था,हम आपको बताएं कि आज हमने उस इलाकों में मतदान होते देखा जहां कालांतर में मतदान ख़्वाब नहीं बल्कि दिवास्वप्न बन गया था,लेकिन सरकार की सोच को सरजमीन पर साकार कर प्रशासन ने यह साबित कर दिया कि नज़रों में हो कुछ कर गुजरने की तमन्ना तो पूरी क़ायनात आपके साथ हमक़दम होती है,कौन है वह इलाका जहां चुनावी मतदान कठिन था और वह कैसे सुलभ हुआ जानने के लिए पढ़िए यह ख़ास रिपोर्ट-
 
जीता लोकतंत्र:- थे जो कल परतंत्र,हुए आज स्वतंत्र,हारा नक्सल तंत्र,और देखिये जीत गया लोकतंत्र",जी हां यह चुनाव जिसे हम लोकतंत्र का महापर्व कहा करते हैं,लेकिन सबके शामिल होने और सशरीर मसरूफ़ होने वाला त्योहार एक इलाक़े के लोगों से महरूम था,उनके लिए यह त्योहार मोहर्रम का मातम ले कर आता था,ऐसा क्यों तो आपको बताएं कि झारखंड का गढ़वा जिसे सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित जिला कहा जाता है,जहां इस लोकतांत्रिक त्योहार को शांत माहौल में संपन्न कराना एक बड़ी चुनौती होती थी,क्योंकि इस चुनावी व्यवस्था के सबसे बड़े बाधक नक्सली जहां एक तरफ हर चुनाव से पूर्व या चुनाव के दौरान छोटी बड़ी घटना को अंजाम दे कर ख़ौफ़ पैदा करने के साथ साथ मतदान नहीं करने तक का फ़रमान जारी किया करते थे,नतीज़ा होता था कि भयाक्रांत मतदाता बूथों तक पहुंच वोट करना तो दूर घरों से निकला नहीं करते थे,पर एक वह वक्त था,यह आज का समय है,जो बूथ कल मतदाताओं से वीरान रहा करता था आज उनकी उपस्थिति से गुलज़ार रहा,हम बात कर रहे हैं गढ़वा जिले के रंका अनुमंडल अंतर्गत सभी पांच प्रखंड के मतदान केंद्रों की जहां आज हमने एक दो दस पचास नहीं बल्कि सैकड़ो-सैकड़ो की संख्या में मतदाताओं को मतदान करते देखा,जब हम उस इलाके के कई मतदान केंद्र पहुंचे तो लोगों की मौजूदगी देख सहसा अहसास नहीं हुआ कि क्या यह वही केंद्र है जहां कालांतर में वोट नहीं होता था पर आज तो लोग अपना मत देने को उमड़ पड़े हैं,खबर बनाने के उपरांत हमने वहीं कहा कि सच में हार गया नक्सल तंत्र,और जीत गया लोकतंत्र।"
 
भारी दिखा बैलेट:- जहां कभी बैलेट पर भारी पड़ता था बुलेट,आज वहां बुलेट को मात दे गया बैलेट",जी बिल्कुल,हम बात गढ़वा जिले के उसी नक्सली इलाके की कर रहे हैं जहां कुछ ही साल पहले वोटिंग बैलेट नक्सलियों के बुलेट के आगे हार जाया करता था लेकिन आज इन गुजरे सालों में प्रशासन ने नक्सल उन्मूलन अभियान को कुछ यूं मुक़ाम दिलाया और लोगों को वोटिंग के प्रति इस तरीक़े से जागरूक किया जिसका परिणाम आज बूथों पर मतदाताओं की उपस्थिति के रूप में सामने आयी,और साथ ही सैकड़ो की संख्या में अपनी दमदार मौजूदगी के साथ मतदान कर ग्रामीण मतदाताओं ने यह साबित कर दिया कि अब बुलेट पर भारी है हमारा वोटिंग बैलेट।
 
चप्पे चप्पे पर सुरक्षाकर्मी संभाले थे कमान:- सुरक्षित हो कर मतदाता कर रहे थे मतदान,क्योंकि चप्पे चप्पे पर सुरक्षाकर्मी संभाल रखे थे सुरक्षा की कमान", उक्त ग्रामीण क्षेत्रों में सभी जगहों पर वोटिंग कराने को ले कर सुरक्षाकर्मी की तैनाती थी लेकिन जिले के सुदूर नक्सल प्रभावित अतिसंवेदनशील पहचानित जैसे उन सभी बूथों पर मतदाताओं की भारी उपस्थिति और हुए मतदान का सारा श्रेय हम तो सीधे रूप में सुरक्षाकर्मी को ही देंगें,वह चाहे झारखंड पुलिस हो,सीआरपीएफ,आईआरबी हो या कोबरा और जगुआर सहित सुरक्षा की अन्य टुकड़ियां सभी उन इलाके सहित मतदान केंद्रों पर पूरी तरह मुस्तैद थे,इलाके में पहुंचने के साथ ही वहां हमें नज़र आया कि जिला उपायुक्त एवं आरक्षी अधीक्षक के साथ साथ सभी अधीनस्थ अधिकारी मौजूद हैं,और केवल मौजूद कहना ग़लत होगा क्योंकि उनके द्वारा सभी पांचों प्रखंडों के बूथों का जायज़ा भी लिया जा रहा है,जिसका परिणाम हमें मतदाताओं के चेहरे पर देखने को मिली क्योंकि वह पूरी तरह निर्भीक हो कर खुशनुमा माहौल में मतदान करते नजऱ आये,बात करने पर वरीय अधिकारियों ने कहा कि सघन नक्सल उन्मूलन अभियान और गांव में पहुंचे विकास का ही असर है कि आज नक्सली बूढ़ा पहाड़ नामक छोटे से पॉकेट में बंद हो कर रह गए हैं और साथ ही सुरक्षा व्यवस्था के साथ साथ इन क्षेत्रों के मतदाता भी काफी सजग हो गए हैं,वो खुद समझ चुके हैं कि अब गतिरोध और अवरोध वाले के साथ नहीं बल्कि सहयोग और सकारात्मक सोच के साथ ही खड़े रहने में तरक़्क़ी और विकास है।
 
जानिए क्या कहते हैं साहेबान:- उधर इस चुनाव को ले कर पिछले कई माह से तैयारी में जुटे जिला प्रशासन के अधिकारी के पेशानी पर बल उस वक्त आ गया था जब एक दिन पहले से मतदानकर्मी और पुलिसकर्मी मतदान केंद्र जाने लगे थे ताकि आज के रोज होने वाले वोटिंग को संपन्न कराया जा सके,वो बाहर से भले सबकुछ ठीक होने की बात दुहरा रहे थे लेकिन अंदर से उन्हें भी सभी कर्मियों की चिंता खाये जा रही थी लेकिन मुस्तैद सुरक्षा व्यवस्था से वो खुद को तसल्ली दिए जा रहे थे,लेकिन यहां तो हम यह जरूर कहना चाहेंगे कि उनका यह सोचना की सबकुछ ठीक होगा बिल्कुल सच साबित हुआ और गढ़वा जिले के नक्सल प्रभावित पांच प्रखंड में मतदान बिना विघ्न बाधा के शांतिपूर्ण संपन्न हो गया,ऐसा कैसे संभव हुआ पूछे जाने पर जिला उपायुक्त रमेश घोलप और एसपी अंजनी कुमार झा कहते हैं कि हमारी सारी तैयारी तो थी ही लेकिन इसके लिए हम ज़्यादा आभार सभी मतदाताओं का जताएंगे जिन्होंने हर डर और भय को धत्ता बताते हुए प्रशासनिक जागरूकता को दिल से आत्मसात किया और आगे बढ़कर मतदान किया।
 

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