Bindash News || वह "नजारा" है नयनाभिराम, फ़िर भी है "गुमनाम"
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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वह "नजारा" है नयनाभिराम, फ़िर भी है "गुमनाम"

Bindash News / 04-10-2018 / 965


नजरों से दूर गढ़वा का नैना झरना
रुक रुक परदेशी तू गढ़वा जिला देख ले
 
आशुतोष रंजन
गढ़वा
 
झारखण्ड को प्रकृति ने खूबसूरती से संवारने के साथ साथ कई नेमतों से नवाजा है,कहीं ऊँचे ऊँचे पहाड़ हैं,तो कहीं लंबे दरख्तों से आक्षादित जंगल हैं,तो कहीं कलोल कलरव करते पहाड़ों से झर झर झरते झरने हैं,सभी नज़ारे बरबस लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं,और लोग उस नज़ारे को नजर करने उसकी ओर खींचे चले आते हैं,पर अफशोस वो सारे नज़ारे आज हुक्मरान के नजरों से ओझल है,तभी तो झारखंड के गढ़वा में एक मनोरम स्थल सालों से थपेड़ों को झेलते हुए खुद को वजूद में बचाये रखे हुए है,इस उम्मीद में की कभी तो उनकी नजर इनायत होगी,और हमारे दिन बहुरेंगें,तो आइए आपको लिए चलते हैं गढ़वा जहां आप ख़ुद हमारे ख़बर के जरिये देखिये झरना स्थल कितना है नयनाभिराम,फिर भी है गुमनाम।
 
रुक रुक परदेशी तू गढ़वा जिला देख ले:- जंगलों पहाड़ों का सिलसिला देख ले,रुक रुक परदेशी तू गढ़वा जिला देख ले,जी हां आज गढ़वा में अवस्थित वो सारे नज़ारे अपने यहां के साथ साथ बाहर से यानी परदेश से आने वाले सभी को थोड़ा रुक कर नज़ारे को नजर करने को कहते हैं,जो रुक जाता है,उसकी नजरें सच में नजारों पर ठहर जाया करती हैं,पर इसे विडम्बना ही कहेंगें की जिसके देखने से नजारों में और खुमारी आये हमारे हुक्मरानों की आँखों ने कभी इसे देखना गंवारा नहीं किया,तभी तो आज नैना नाम का यह झरना नज़रों से दूर हो कर गुमनाम है,आप खुद देखिये न छोटे बड़े संगमरर के मानिंद पत्थर ऐसे प्रतीत होते हैं जैसे किसी ने उसे करीने से रख कर सजावट की हो,देवदार और चिनार ना सही देशी पेंड़-पौधे ही काश्मीर की वादियों का हसीन अहसास कराती हैं,सारे अलौकिक नजारों के बाद भी उक्त जगह सरकारी नजरों से कोसो दूर है।
 
फिर भी नज़रों से है क्यों दूर:-प्रकृति ने जिसे नजारों से किया है पुरनूर,फिर भी वह आज नजरों से है क्यों दूर,जी हां गढ़वा जिले के नगर उंटारी अनुमंडल मुख्यालय से सात किलोमीटर की दूरी पर भवनाथपुर रोड में अवस्थित यह झरना जिसे जानने वाले कुछ लोग नैना झरना कहते हैं वह सरकार और सरकारी बाबुओं की नजरों से कोसो दूर है,लोगों को कसक है नैना झरना के विकसित नहीं होने का,लोग कहते हैं कि ऐसे प्राकृतिक नजारों को अगर सरकारी स्तर से विकसित कर दिया जाए तो जहां एक तरफ़ गढ़वा देश ही नहीं विश्व पर्यटन के मानचित्र पर स्थापित होगा,वहीं सरकार को अच्छी ख़ासी राजस्व की भी प्राप्ति होगी।
 
काश हक़ीक़त होता हमारा ख़्वाब:- ग़ुरबत में जीवन गुजारने वाले गढ़वा और पास के लोगों के लिए शिमला,नैनीताल जाना और मंदाकनी अलकनंदा को निहारना दिवास्वप्न है,ऐसे में उनके लिए नैना झरना ही सभी जगहों में तफरीह कर लेने का सुखद अहसास करा जाती है,लोगों की चाह है कि सरकार इसे पूर्ण विकसित करे,ताकि गढ़वा को एक पर्यटन स्थल नसीब हो।
 
एक तरफ़ गढ़वा को एक अलग पहचान स्थापित करने के लिए प्रकृति का अनुपम उपहार,दूसरी ओर उसे सहेजने की मांग करते लोग,अब देखने वाली बात होगी कि राज्य में पर्यटन कॉरिडोर बनाने की बात दुहराने वाली सरकार की नजरों में यह नैना झरना आ पाता है ?

 

 

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