Bindash News || होती है "मन्नत" पूरी "एसडीओ" के दरबार में
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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होती है "मन्नत" पूरी "एसडीओ" के दरबार में

Bindash News / 24-10-2018 / 741


वृद्धों के जीवन में जला रहे नवदीप,ऐसे अधिकारी हैं प्रदीप:डीसी

 
आशुतोष रंजन
 
गढ़वा
 
अपने जरूरी काम वास्ते प्रखंड से ले कर जिला कार्यालय तक दौड़ लगा कर थक चुके लोग एक पंक्ति दुहराया करते हैं, “लिखा दुख दर्द किस्मत में, सुकून को याद क्या करना, जहां हो बेदर्द हाक़िम, वहां फ़रियाद क्या करना, लेकिन आज लोगों के जेहन से यह पंक्ति परे हो गया है. क्योंकि अब उनकी फ़रियाद नहीं हो रही अनसुनी, सुनी जा रही है पुकार और यह सब हो रहा है गढ़वा एसडीओ प्रदीप कुमार के दरबार में,जहां पहुंचने वाला हर फरियादी बिना काम का प्रसाद लिए नहीं लौट रहा वापस. तो आइए आपको भी ख़बर के जरिये लिए चलते हैं एसडीओ के दरबार में।
बिन आराम,बस काम:- पहले आराम फिर काम इस परंपरा में जीवित रहते हुए काम को बोझ समझ कर काम कम आराम ज्यादा करने वाले अधिकारी के कामकाज को एक नया स्वरूप देने का काम किया है एसडीओ प्रदीप कुमार ने. पुरानी जड़वत हो चुकी परिपाटी में बदलाव करते हुए बस काम कर यह संदेश देने का काम किया है कि बिन आराम, बस करो काम,गढ़ो नित नए आयाम।
 
लगता है दरबार,पूरी होती है मुराद:- प्रतिरोज देखा जाता है कि क्या जवान क्या वृद्ध अपने काम को ले कर कार्यालय दर कार्यालय सरकारी बाबुओं के पास दौड़ लगाते हैं. एक आस के साथ अहले सुबह से देर शाम तक वो अपनी फ़रियाद सुन लेने और काम अपना हो जाने का बाट ज़ोहते रहते हैं, लेकिन ना तो उनकी फ़रियाद सुनी जाती है और ना ही उनका काम हो पाता है. नतीजा होता है कि वो निराश हो कर वापस घर को लौट जाया करते हैं, लेकिन उन्हीं सरकारी मातहतों में से एक ऐसा अधिकारी है जिसे इल्म है कि मैं किनके लिए यहां बैठाया गया हूं, हम बात कर रहे हैं गढ़वा के सदर एसडीओ प्रदीप कुमार की, जो प्रतिदिन तो खुद के पास आने वाले का काम किया ही करते हैं. सप्ताह में एक दिन ऐसा तय है जिस दिन बजाप्ते जनता दरबार लगा सबकी फ़रियाद सुनते और उसका त्वरित निदान करते हुए उनके मन की मुराद पूरी करते हैं।
 
वह दौर हुआ ख़त्म,जब दौड़ते थे कदम:- “पथरा गयीं थी आंखें,कितना राह निरेखें,अब वह दौर हुआ ख़त्म,जब दौड़ते थे क़दम”जी हां गढ़वा के उन वृद्ध असहायों की आंखें पूरी तरह से पथरा गयीं थीं जो एक अदद वृद्धावस्था पेंसन की आस में सरकारी कार्यालयों में बाबुओं की राह निरेखते थे,कुछ इसी तरह सालों चले सिलसिले ने अब उनके मन से रही सही आस भी जुदा कर दिया था,पर एकाएक उनकी बूढ़ी आंखों में चमक तब जगी जब गढ़वा में पदस्थापित एसडीओ प्रदीप कुमार ने जनता दरबार लगा एक दिन कौन कहे चंद लम्हों में पेंसन स्वीकृत करना शुरू किया,जो कल निराश हो चुके थे आज उन्हीं के जुबान बोलने लगे कि अब वह दौर हुआ ख़त्म जब दौड़ते थे अपने क़दम।
 
एक से शुरू हुआ हजारों तक पहुंचा:- कुछ माह पूर्व शुरू हुए एसडीओ के जनता दरबार में एक से स्वीकृत होने वाला पेंसन आज हजारों की संख्या को पार कर गया।
 
मंगल को होता रहेगा सबका मंगल:- सप्ताह में हर मंगलवार को लगने वाले जनता दरबार के बाबत एसडीओ प्रदीप कुमार कहते हैं कि अब एक पेंसन के लिए लोगों को प्रखंड से जिला तक चक्कर लगा कर निराश नहीं होना पड़ेगा,ना ही उन्हें अब कहीं भी आवेदन देने की जरूरत है,अब वो सीधे हमारे पास मंगल दिन को आएं और मात्र कुछ ही देर में पेंसन स्वीकृति के रूप में मंगल उपहार ले कर जाएं।
 
ऐसे अधिकारी हैं प्रदीप:- वृद्ध असहायों के बुझे जीवन में जो जला रहे नवदीप,ऐसे अधिकारी हैं प्रदीप,कुछ इस अंदाज में एसडीओ प्रदीप कुमार के पेंसन स्वीकृत करने वाले अनूठे पहल की सराहना करते हुए उपायुक्त हर्ष मंगला ने कहा कि निश्चित रूप से ऐसे कार्य की उन्मुक्त कंठ से सराहना होनी चाहिए,कहा कि यह बात सही है कि जिस एक अदद पेंसन के लिए लोग प्रखंड से ले कर जिला कार्यालय तक महीनों दौड़ लगाया करते थे आज उसी पेंसन को एसडीओ द्वारा सप्ताह के एक दिन पेंसन दरबार लगा ऑन स्पॉट स्वीकृत किया जा रहा है,अब जरूरत है प्रदीप कुमार से जिले के सभी अधिकारियों को सिख लेते हुए कार्य करने की ताकि जिला विकास में ऊंचा आयाम हासिल करे।
 
एक तरफ़ सरकारी बाबुओं की कारस्तानी से आजिज लोग,दूसरी ओर उन्हीं में से एक को अपना तारणहार मानते लोग,ऐसे में सबके जेहन में बस एक ही बात कौंध रही है कि “काश सभी प्रदीप होते,तो जिला के साथ साथ राज्य में जल रहे विकास के दीप होते ?
 
 

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