Bindash News || गढ़वा को देने "सुरक्षा" की गारंटी, "रेड" बंडलों में ढूंढे जा रहे "लाल वारंटी"
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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गढ़वा को देने "सुरक्षा" की गारंटी, "रेड" बंडलों में ढूंढे जा रहे "लाल वारंटी"

Bindash News / 29-10-2018 / 930


कल रखूंगा आपकी बातों से सरोकार,आज कर लूं फ़रारी गिरफ़्तार:संदीप रंजन
 
आशुतोष रंजन
गढ़वा
 
पुलिस ऐसे ही नहीं दे रही है सुरक्षा और भयमुक्त माहौल की गारंटी,देखिये कैसे शिद्दत से ढूंढ रही फ़रार वारंटी,जी हां सालों से फ़रार नामज़द वारंटियों को गिरफ़्तार करने के मिले टास्क को गढ़वा पुलिस पूरी तन्मयता से पूरा कर रही है आइये आपको तस्वीर के जरिये दिखाते हैं उसकी बानगी।
 
रेड बंडलों में खोजे जा रहे लाल वारंटी:- जहां तक ज़ेहन में था वो हो गए गिरफ़्तार,अब रेड बंडलों में लाल वारंटी को खोजने की बढ़ी है रफ़्तार",जी हां फ़रार लाल वारंटी को गिरफ़्तार करने के एसपी से मिले निर्देश के आलोक में जहां तक जेहन को याद के साथ साथ नज़रों के सामने जो फ़ाइल था उसके अनुसार वो फ़रारी की हो गयी गिरफ़्तारी,अब उन दस्तावेज़ों को खंगाला जा रहा है जिसे लाल कपड़ों में बांध कर भूल जाने वाले अंदाज़ में छोड़ दिया गया था,लेकिन आज वक़्त आने पर उस बंद कमरे से एक बार फिर से रेड कपड़ों में बंधी कागज़ी बंडलों को निकाल उसमें लाल वारंटियों को खोजा जा रहा है,अहले सुबह से देर शाम तक पुलिसकर्मियों द्वारा ढूंढने वाले काम को बड़ी संजीदगी से किया जा रहा है,की कहीं ऐसा ना हो की हमारे नज़र के एक भटकाव से किसी फ़रार वारंटी का कागज़ मिलते मिलतेना रह जाये।
 
इसीलिए आज समय दो कार्यालय में:- कल सुनना ना पड़े दो बात न्यायालय में,इसीलिए आज समय दो कार्यालय में",बस इसी बात को दिल से महसूस करते हुए जिले के पुलिस अधिकारी तीव्र गति से फ़रारी खोजो अभियान में जुटे हुए हैं,इसकी बानगी हमें शहर थाना परिसर में अवस्थित इंस्पेक्टर कार्यालय में देखने को मिली,जहां एक तरफ़ बाहर बरामदे पर कुछ पुलिसकर्मी लाल कपड़ों से बंधे पुराने धूल धूसरित फाइलों में फ़रार लाल वारंटियों को ढूंढने में रमे हुए थे,वहीं अंदर कार्यालय कक्ष में शहर इंस्पेक्टर सहित कई अधिकारी उन नामों को दर्ज करने के साथ उसी संबंधित कार्यों में व्यस्त थे,उनकी व्यस्तता ऐसी की कोई किसी से कुछ बात करने की स्थिति में नहीं था,बहुत पूछने पर बस इतना जवाब मिला कि "कब हो रही है सुबह,हो रही है कब शाम,बिना ढूंढे फ़रारी को बस नहीं करना है आराम।" 

आज कर लूं फ़रारी गिरफ़्तार:- कल रखूंगा आपकी बातों से सरोकार,आज कर लूं फ़रारी गिरफ़्तार,"अपने व्यस्त दिनचर्या से देर शाम मात्र जलपान के लिए चंद लम्हों का वक़्त निकाले शहर इंस्पेक्टर संदीप रंजन से हमारी मुलाक़ात हुई तो कुछ दिनों पहले के मानिंद कुछ बात करने की इक्षा हुई तो उन्होंने सीधे रूप में कहा कि कल रखूंगा आपकी हर बातों से सरोकार,आज ज़रा करने दीजिए हमें फ़रारी गिरफ़्तार,उनके कहने का मतलब था कि वह पुराना वाला वक़्त आएगा जब हम कुछ देर वर्तमान सामयिक विषयों पर चर्चा करेंगें,पर अभी का समय हमारे लिए मात्र एक विषय पर ही केंद्रित है और जब तलक हम उसकी पढ़ायी पूरी कर उसमें उतीर्णता हासिल नहीं कर लेते हैं तब तक हमें चैन नहीं,और करना आराम कहां।
 

 

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