Bindash News || "हीर-रांझा" ने खाया "जहर",मर गयी "हीर",हुआ "रांझा" रेफर
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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"हीर-रांझा" ने खाया "जहर",मर गयी "हीर",हुआ "रांझा" रेफर

Bindash News / 05-11-2018 / 1676


वादा साथ जीने का था,साथ मर भी ना सके

 
आशुतोष रंजन
 
गढ़वा
 
किया था वादा साथ जीने की जिंदगानी,हुआ कुछ ऐसा की सोचा ख़त्म करने की खुद की कहानी,पर अफ़सोस,अधूरी रह गयी प्रेम कहानी,जी हां हम बात कर रहे हैं आज गढ़वा में घटी एक अंतहीन मोहब्ब्त की कहानी की जो मौत के कारण अधूरी रह गयी।
मर गयी हीर,हुआ रांझा रेफर:- हीर-रांझा ने खाया जहर,मर गयी हीर,हुआ रांझा रेफर",जी हां आइये आपको बताते हैं उस मोहब्ब्त की कहानी जो अधूरी रह गयी,घटना गढ़वा जिले की है जहां प्रेमी प्रेमिका ने साथ जीने मरने की कसमें खायीं,लेकिन उनकी मोहब्ब्त दोनो के परिवार वालों को स्वीकार नहीं हुआ नतीज़ा हुआ कि दोनों ने साथ मरने का इरादा कर के एक साथ जहर खाया,लेकिन प्रेमी की मौत हो गयी,और प्रेमी इलाज़ के लिए बड़े अस्पताल में रेफर हुआ।
 
मोहब्ब्त रह गयी अधूरी:- नहीं हो सकी पूरी,मोहब्ब्त रह गयी अधूरी",दोनो ने किया प्यार मगर जमाने को नहीं हुआ एतबार,साथ ही किया अस्वीकार,तभी तो दोनो ने साथ मरना किया स्वीकार,आशिकी का यह मामला गढ़वा जिले के कांडी प्रखंड क्षेत्र का है जहां एक घर में किराएदार के रूप में रह रहे लड़के को मकान मालिक की लड़की से ही मोहब्ब्त हो जाता है,शुरू में तो एकतरफा होता है लेकिन कुछ दिनों बाद लड़की को भी सबकुछ अच्छा लगने लगता है,और दोनो का प्यार दिन-प्रतिदिन परवान चढ़ने लगता है,छुप-छुप कर मिलने से आगे बढ़ कर दोनो घंटों साथ बैठ बातें करना शुरू कर देते हैं,उनके अनुसार जमाना उनके प्यार से अनजान है लेकिन शायद उन्हें इल्म नहीं था कि आज तलक जब किसी की मोहब्ब्त नहीं छुप सकी तो भला इनकी कैसे छुप जाती सो सबके सामने जाहिर हो गया,और उनके मोहब्ब्त पर पहरा बिठा दिया गया,और उनको प्यार पर पाबंदी बर्दास्त नहीं हुआ और दोनो ने साथ नही जी पाने की सूरत में साथ मरना स्वीकार कर एक साथ जहर खा लिया,लेकिन शायद ऊपरवाले को भी इनका इश्क मंजूर नहीं था सो दोनो यहां भी बिछड़ गए,क्योंकि प्रेमिका की मौत हो गयी जबकि प्रेमी अपनी प्रेमिका के पास जाने के लिए मौत से लड़ कर ज़िंदगी हारने की जुगत में लगा है।
इश्क के इस कहानी में जहां हीर की मौत हो गयी वहीं रांझा जीते जी अपनी हीर को मरने के बाद पाने के लिए मौत से जिंदगी हारने के लिए प्रतिक्षण लड़ रहा है,ऐसे हालात में दिल से बरबस यही निकल रहा है कि "इंसान के कंधे पर वह एक इंसान जाएगी,क़फ़न में लिपटी हुई दिली अरमान जाएगी,जी कर जिसे वह पा ना सकी,अब मर कर पाने के लिए वह श्मसान जाएगी।"
 
 

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