Bindash News || "विपक्ष" के रगों में दौड़ेगा अब "सत्तापक्ष" का "खून"
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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"विपक्ष" के रगों में दौड़ेगा अब "सत्तापक्ष" का "खून"

Bindash News / 06-11-2018 / 784


नहीं बुझने देंगें तेरे जीवन-ए-चराग को,ताकि अलापता रहे तू मेरे सफ़लता-ए-राग को:विधायक

 
आशुतोष रंजन
 
गढ़वा
 
विपक्ष के रगों में दौड़ेगा सत्तापक्ष का खून",आप सोच रहे होंगें की भला ऐसा कैसे हो सकता है एक दूसरे के खून के प्यासे जैसे आरोप-प्रत्यारोप और जबानी हमला करने वाले ये विपक्ष और सत्तापक्ष का रिश्ता एकाएक खून वाला कैसे हो जाएगा,तो आइए इसे जानने के लिए पढ़िए यह रिपोर्ट-
बस इसीलिए तो हमने यह राह चुना:- हो ना जाये तेरा जीवन सुना,बस इसीलिए तो हमने इस राह को चुना",जी हां सत्तापक्ष यानी भाजपा द्वारा सभी जगह रक्तदान कार्यक्रम चलाया जा रहा है,जिसका उद्देश्य जहां एक तरफ लोगों को खून की कमी नहीं होने देना है,वहीं दूसरा मुख्य वजह है विपक्ष को खून देना,क्योंकि सत्तासीन हुई भाजपा सरकार द्वारा लगातार किये जा रहे विकास कार्यों को देख खुद के शरीर का खून जलाने वाला विपक्ष आज शारीरिक रूप से पूरी तरह कमज़ोर होता जा रहा है,कोलाहल से भरा रहने वाला उनके जीवन में आज सूनापन सा आ गया है,अब ऐसे हालात में उनके शरीर में फिर से नयी ताजगी लाने के लिए भाजपा ओबीसी मोर्चा के नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में बड़े पैमाने पर अपना खून दिया गया,अब जब ब्लड बैंक में खून रहेगा तो और मरीजों के अलावे किसी दिन विपक्ष का भी कोई नुमाइंदा खून के वास्ते वहां पहुंचेगा,और उसे खून चढ़ाया जाएगा,बस इसी तरह विपक्ष के रगों में दौड़ने लगेगा सत्तापक्ष का खून।
इसी ख़ातिर सत्तापक्ष ने किया रक्तदान:- विपक्ष का जीवन ना हो वीरान,इसी ख़ातिर सत्तापक्ष ने किया रक्तदान",इस पंक्ति के साथ रक्तदान करने की जरूरत बताते हुए भाजपा विधायक सह पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष सतेंद्र नाथ तिवारी ने कहा कि देश से ले कर प्रदेश में काबिज़ और पुनः आगामी चुनाव में दमदार वापसी के साथ फिर से सत्तासीन होने की राह में अग्रसर हो रही भाजपानीत सरकार को देख विपक्ष आज खुद को अस्तित्वहीन समझने लगा है,एक तरफ जहां उसके पास विरोध का कोई माकूल मुद्दा नहीं बचा साथ ही वह खुद को वजूद हीन भी मानने लगा है,लेकिन हम नहीं चाहते कि विपक्ष का वजूद समाप्त हो क्योंकि हम चाहते हैं कि दुश्मन वजूद में रहे क्योंकि उससे लड़ने का मजा तब है जब वह शारीरिक रूप से मजबूत रहे,हम चाहते हैं कि वो बेक़ाम ना हों,दुर्बल ना हो,इस ख़ातिर हमने विपक्षियों को काम दिया है,वो भले सामियाना लगा कर हम को आरोपित करें लेकिन उस सामियाना का भुगतान भी हमारे रुपये से हो क्योंकि हमारे कार्यकाल में वो योजना के लाभुक जो हैं,और अब कितना किया जाए रोजगार के साथ साथ अब तो खून भी देना शुरू कर दिया,इसीलिए तो हम कहते हैं की "नहीं बुझने देंगें तेरे जीवन-ए-चराग को,ताकि तू अलापता रहे मेरे सफ़लता-ए-राग को।"
 
 

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