Bindash News || जो करता है छठ "मां सतबहिनी" के पास,उसे होता है अजीब "अनुभूति" का अहसास
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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जो करता है छठ "मां सतबहिनी" के पास,उसे होता है अजीब "अनुभूति" का अहसास

Bindash News / 11-11-2018 / 1369


देखनी हो व्यवस्था की ठाठ,तो आइए न "सतबहिनी छठ घाट"

 
आशुतोष रंजन
 
गढ़वा
 
गर देखनी हो व्यवस्था की ठाठ तो चले आइये सतबहिनी छठ घाट",जी हां हम बात कर रहे हैं गढ़वा जिले के कांडी प्रखंड क्षेत्र में अवस्थित राज्य का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सतबहिनी झरना तीर्थ की,जहां का छठ आयोजन खुद का जिला ही नहीं बल्कि अपने प्रदेश के साथ साथ पड़ोसी राज्यों में भी अहम स्थान रखता है,क्यों है ख़ास जानने के लिए पढ़िए यह रिपोर्ट
हर कोई आना चाहता है पास:- स्थल है कुछ ऐसा ख़ास,की हर कोई आना चाहता है पास,बात सतबहिनी झरना स्थल की हो रही है तो यहां बता दूं की प्रकृति ने बड़े ही करीने से संवारा है उक्त स्थल को,मानो खूबसूरती की सारी नेमत से नवाज दिया है,जो एक बार इस अलौकिक नजारों को नज़र करता है उसका मन बार बार देखने को करता है और वह यहां खींचा चला आता है,पहाड़ी से झर-झर झरता झरना अपने आप में आपको मोहपाश में जकड़ने के लिए काफ़ी है,लोग घंटों बैठ कर उस झरना को निहारा करते हैं,या यों कहें कि जो एक बार यहां आया वह यहीं का हो कर रह जाता है यानी कि उसे कोई और झरना स्थल नहीं भाता है,बरबस उसके कदम सतबहिनी की ओर चले आते हैं।
 
वह नहीं होता है ग़रीब:- जो आता है माँ के करीब,वह नहीं होता है ग़रीब",सतबहिनी झरना स्थल में कालांतर से स्थापित देवी मां पूरी तरह से जाग्रत हैं,जानकार बताते हैं कि यहां आ कर देवी से मांगी गयी मनौती कभी निष्फ़ल नहीं जाती,जिसके कई उदाहरण मौजूद हैं,तभी तो लोगों को कहते सुना जाता है कि जो आता है माँ के करीब वह नहीं होता है ग़रीब,तो अब देर किस बात की आप भी मां से मांग आइये क्योंकि मां अपने बेटों को कभी निराश नहीं होने देती।
उसे होता है मां के होने का अहसास:- जो करता है छठ मां के पास,उसे होता है मां के होने का अहसास",जी हां सतबहिनी झरना स्थल में छठ करने वाले बताते हैं कि जहां एक तरफ़ उपवास के बाद झरना में नहाने से सारा भूख प्यास दूर हो जाता है वहीं एक ओर मां का मंदिर तो दूसरी ओर अवस्थित सूर्य मंदिर,दोनो के मध्य में अर्ध्य देने से अजीब सी अनुभूति होती है,मानों देवी मां बाजू में खड़ी हो कर अर्ध्य दिला रही हों और सामने भगवान भाष्कर खुद मौजूद रह कर मेरा अर्ध्य स्वीकार रहे हों,तो भला जहां हो ऐसी अनुभूति वहां कौन नहीं चाहेगा कराना अपनी उपस्थिति।
 
समिति करती है सारी व्यवस्था:- नहीं होती है कोई अव्यवस्था,समिति करती है सारी व्यवस्था",वह चाहे गांव हो शहर हो या महानगर ऐसे भींड़ भरे आयोजन में अव्यवस्था का आलम देखने को मिल ही जाता है लेकिन सतबहिनी ही एक ऐसा स्थल है जहां इतनी भारी भींड़ के बावजूद किसी तरह की अव्यवस्था सामने नहीं आती,ऐसा क्यों है इसे जानने के लिए जब हमने सतबहिनी के विकास में सालों से सतत कार्यरत मां सतबहिनी झरना तीर्थ एवं पर्यटन स्थल विकास समिति के सचिव सह कर्मकांडी विद्वान मुरलीधर मिश्रा से पूछा तो उन्होंने कहा कि हम सभी निमित मात्र हैं क्योंकि सारी व्यवस्था सारा कुछ तो माँ स्वयं मौजूद रह कर कराती हैं,कहा कि हम इस खुली आँखों से उन्हें देख नहीं पाते पर सतबहिनी के विकास में कई ऐसे मौक़े आये जब हम सबों ने मां की मौजूदगी का अहसास किया जिसकी अनुभूति का बयान करना मुश्किल है।
 

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