Bindash News || "विधायक" ने किया प्रयास,पूरी होने जा रही है "सिचाई" की "आस"
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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"विधायक" ने किया प्रयास,पूरी होने जा रही है "सिचाई" की "आस"

Bindash News / 02-12-2018 / 830


अब लहलहायेगी फसल की फुलवारी,बनने जा रही फुलवरिया

 
आशुतोष रंजन
 
गढ़वा
 
अब गढ़वा में नहीं होगा सुखाड़,हरे होंगें सालों से बंजर पड़े खेत,अनाजों की होगी पैदावार,नहीं होगा पलायन,क्योंकि दशकों से चिरप्रतीक्षित मांग जो होने जा रही है पूरी,जी हां हम बात कर रहे हैं दस करोड़ रुपये की लागत से होने जा रहे नहर के पुनर्निर्माण की,क्या है ख्वाब,कैसे और किसके प्रयास से वह बदलेगा हक़ीक़त में जानने के लिए पढ़िए यह ख़ास रिपोर्ट-
अब वह होगा हरा:- कल तलक थे जो खेत बंजर,अब वह होगा हरा",जी हां गढ़वा जिसे सूखा के लिए अभिशप्त जिला कहा जाता है,जहां हर साल लोग सूखा के चपेट में आते हैं,वर्षा का नहीं होना,पैदावार का मारा जाना,दो जून की रोटी के लिए पलायन करना लोगों की नियति बन चुकी है,और यह तब है जब वर्षा जल को संरक्षित कर उससे खेतों को सिंचित कर पैदावार करने की सुविधा मौजूद है,पर कालांतर से अब तलक सरकारी उदासीनता ने उक्त सुविधा से लाभ मिलने से वंचित रखा है,पर अब शायद हालात बदलने को है,क्योंकि सालों से बदहाल फुलवरिया कैनाल को फिर से पुनर्जीवित कर उसे नए सिरे से बनाने का निर्णय लिया गया है,इस आशय की जानकारी मिलने के बाद लोगों के मुरझाये चेहरों पर सपना पूरा होने की ख़ुशी एक नयी उम्मीद की चमक के रूप में देखी जा सकती है,कहते हैं कि अगर कैनाल बन जाएगा तो बहुत गाँव के खेतों को पानी मिलेगा और हमें खेत रहते हुए अनाज के लिए बाहर पलायन नहीं करना पड़ेगा।
देखिये हमने पूरा किया वादा:- क्षेत्र के विकास के लिए अपना नेक है इरादा,देखिये हमने पूरा किया वादा",जी हां आज कैनाल पुनर्जीवित योजना के शिलान्यास के उपरांत इस पंक्ति के साथ अपने संबोधन की शुरुआत करने वाले विधायक सतेंद्र नाथ तिवारी ने कहा कि सालों बाद आज योजना की शुरुआत होने से आप आह्लादित हैं,लेकिन अथक प्रयास कर इसके मंजूरी के साथ साथ आज इसके शुरुआत से मैं उतना खुश नहीं हूं क्योंकि मैं तो खुश उस दिन होऊंगा जिस दिन इस नहर के पानी से सिंचित हो कर उन खेतों में फसल लहलहायेंगें जो खेत अब तलक पानी बिना प्यासे रह कर बजंर पड़े हुए हैं,कहा कि मैं जब भी इधर से गुजरा करता था तो मुझे एक हुक सी होती थी,आज योजना की शुरुआत करा कर दिल का बोझ भले हल्का हुआ लेकिन मैं उस दिन पूरी तरह से संतुष्ट हो जाऊंगा जिस दिन यह फुलवरिया कैनाल पानी से भरा होगा और खेत सारा पैदावार से हरा होगा।
खेत सूखा है,पेट भूखा है,अधर अभी तक प्यासी है,खिलने वाले चेहरों को देखो,उस पर छायी उदासी है,जी हां गढ़वा के इस हालात को बदलने का विधायक का प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय है,बस अब जरुरत होगी खुद से पहल कर के योजना को ईमानदारीपूर्वक धरातल पर उतरवाने की ताकि एक बार फिर बुझी आँखों से देखा गया ख़्वाब बुझ ना सके ?
 
 

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