Bindash News || कहीं लग न जाये "मंडल" पर "ग्रहण"
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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कहीं लग न जाये "मंडल" पर "ग्रहण"

Bindash News / 02-01-2019 / 1061


दे देंगें जान,नहीं होने देंगें निर्माण


आशुतोष रंजन
गढ़वा

एक तरफ राज्य से ले कर देश स्तर पर आज भले यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आगामी पांच जनवरी को प्रधानमंत्री के पलामू आगमन के साथ ही मंडल डैम पर छाया छयालिस साला धुंध छंट जाएगा लेकिन शायद उन्हें इस आशय का इल्म नहीं है कि उसी मंडल के करीब से विरोध की चिंगारी भी भड़क चुकी है जो कभी भी आग का रूप अख़्तियार करेगी और उसका धुआं एक बार फिर से मंडल को आगोश में ले लेगा,जी हां हम बात कर रहे हैं मंडल डैम के डूब क्षेत्र में आने वाले गांव के ग्रामीणों की जिनके द्वारा निर्माण शुरू होने के पूर्व ही उसका विरोध शुरू कर दिया गया है,क्या कहते हैं ग्रामीण आइये जानिए पढ़ कर यह रिपोर्ट-

नहीं होने देंगें निर्माण:- हम दे देंगें जान,पर नहीं होने देंगें निर्माण",जी हां यह कहना है मंडल डैम के डूब क्षेत्र में आने वाले चेमो-सान्या सहित कई गांव के लोगों का,उनका सीधे रूप में कहना है कि पहले मुआवज़ा फिर काम,ग्रामीण कहते हैं की डैम का निर्माण शुरू हो इससे हमें कोई ऐतराज नहीं,लेकिन हमें पहले मुआवज़ा मिल जाये तब शुरू हो।

कहीं ख़ुशी तो कहीं शोक:-एक तरफ पांच जनवरी को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पलामू आ रहे हैं जहां वो मंडल डैम के पुनर्निर्माण योजना की आधारशिला रखेंगें,पलामू प्रमंडल के साथ साथ राज्य स्तर पर उक्त कार्यक्रम को सफल बनाने की तैयारी चल रही है,तो दूसरी ओर आप देखिये गांव में लोग खुश होने की जगह नाराज़ हैं,वो फिर से डैम का काम शुरू होने से बिल्कुल हर्षित नहीं हैं क्योंकि डैम बन जाने के कारण उसके पानी से इनका पूरा वजूद जो मिटने वाला है,इस लिहाज से उनका कहना है कि हमें तो ऐसे भी डूब जाना है इसलिए हम आर पार की लड़ायी लड़ेंगें,जब तलक हमें मुआवज़ा और कहीं और बसाने के लिए जमीन नहीं मिलेगा तब तक हम डैम का काम शुरू नहीं होने देंगें।

कोई है खुश तो है कोई नाराज़,जी हां मंडल के रूप में सालों का ख्वाब जो पूरा होने जा रहा है इसे ले कर जहां खुशी है तो एक तरफ नाराजगी है क्योंकि मुआवज़ा को ले कर लोगों ने विरोध करना शुरू कर दिया है,अब देखना यह होगा कि छयालिस साल बाद शुरू होने को अग्रसर उक्त परियोजना सच में मूर्त रूप ले पाता है या एक बार फिर से ग्रहण लग जाता है ?

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