Bindash News || अब "हक़ीक़त" होगा "ख़्वाब" अपना, देखिये "शाही" ने पूरा किया "सपना"
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

State

अब "हक़ीक़त" होगा "ख़्वाब" अपना, देखिये "शाही" ने पूरा किया "सपना"

Bindash News / 03-01-2019 / 1305


सारा समंदर अपने पास था,फ़िर भी एक बूंद पानी अपनी प्यास थी:भानु


आशुतोष रंजन
गढ़वा

अब गढ़वा में नहीं होगा सुखाड़,हरे होंगें सालों से बंजर पड़े खेत,अनाजों की होगी पैदावार,नहीं होगा पलायन,उधर प्यास से सूखते हलक होंगें तर,दशकों से चिरप्रतीक्षित मांग जो होने जा रही है पूरी,क्योंकि विधायक के अनवरत प्रयास के बाद सरकार ने अरबों रुपये की लागत से बनने वाले सिचाई और पेयजल योजना की स्वीकृति जो दी है,क्या था ख्वाब,कौन है वह विधायक जिसका है प्रयास और सरकार की स्वीकृति के बाद कैसे वह बदलने जा रहा है हक़ीक़त में जानने के लिए पढ़िए यह रिपोर्ट

पूरी होने जा रही सिचाई की आस:- अधूरी थी खेतों की प्यास,पूरी होने जा रही सिचाई की आस",जी हां गढ़वा जिसे सूखा के लिए अभिशप्त जिला कहा जाता है,जहां हर साल लोग सूखा के चपेट में आते हैं,वर्षा का नहीं होना,पैदावार का मारा जाना,दो जून की रोटी के लिए पलायन करना लोगों की नियति बन चुकी है,और यह तब है जब वर्षा जल को संरक्षित कर उससे खेतों को सिंचित कर पैदावार करने की सुविधा हमारे पास मौजूद नहीं है,पर कालांतर से अब तलक सरकारी उदासीनता ने उक्त सुविधा से लाभ मिलने से हमें वंचित रखा था,पर अब शायद हालात बदलने को है,क्योंकि सरकार ने गढ़वा जिले के भवनाथपुर विधानसभा क्षेत्र के एक एक इंच जमीन के साथ साथ अन्य कई प्रखंडों के बजंर पड़े खेतों को सिंचित करने का निर्णय लिया गया है।

अब होने जा रही है पूरी वो कहानी:- जो सुनाते थे कल छलकते नीर के किस्से,अब होने जा रही है पूरी वो कहानी",पानी बिना प्यासे हो कर बजंर पड़े खेतों तक पानी पहुंचा कर उसे उपजाऊ बनाने की योजना स्वीकृत करने के साथ साथ सरकार ने कैबिनेट से लोगों के सूखते हलक को तर करने यानी पेयजल की बड़ी योजना की स्वीकृति दी है,पानी बिना त्राहि त्राहि करने वाले जिला को पानी से पुरनूर करने की योजना की स्वीकृति दे कर सरकार ने गढ़वा को नए साल का सौग़ात दिया है।

ख़ुश हुए वो चेहरे,जो थे कल मुरझाये हुए:- उधर इस आशय की जानकारी मिलने के बाद लोगों के मुरझाये चेहरों पर सपना पूरा होने की ख़ुशी एक नयी उम्मीद की चमक के रूप में देखी जा सकती है,कहते हैं कि अब गाँव के खेतों को पानी मिलेगा और हमें खेत रहते हुए अनाज के लिए बाहर पलायन नहीं करना पड़ेगा,साथ ही पीने की पानी के लिए पुराने कुएं और गंदे नाले की ओर नहीं जाना पड़ेगा,क्योंकि अब तो हमारे घर के पास नहीं बल्कि आंगन में हमें पानी मिलेगा।

फिर भी एक बूंद पानी अपनी प्यास थी:- अथक प्रयास कर और राज्य से ले कर केंद्र तक दौड़ लगा कर सिचाई और पेयजल की इन बड़ी परियोजनाओं की स्वीकृति दिलाने के बाद खासे उत्साहित विधायक भानु प्रताप शाही शायराना अंदाज़ में कहते हैं कि "सारा समंदर अपने पास था,फ़िर भी एक बूंद पानी अपनी प्यास थी",विधायक कहते हैं कि अपने बचपन से वह जब खेतों को सुखा और लोगों को पीने की पानी के लिए भटकते देखते थे तो यही सोचा करते थे कि जब अपने यहां पास में सोन और कनहर जैसी नदी है तो उसका पानी अपने खेतों तक क्यों नहीं आता,यह कसक उनके मन में घर कर गया,और युवापन आते ही इसके लिए आवाज मुखर करना शुरू किया,सोचा कभी जीवन में वक्त हांथ में आया तो इन दोनों नदियों का पानी खेतों के साथ साथ लोगों के घरों तक पहुंचाऊंगा,संयोग से वैसा वक्त भी आया और भानु विधायक बन गए,विधायक बनने के बाद से ही अनवरत प्रयास जारी रखा,जिसका प्रतिफ़ल आज परियोजना मंजूरी के रूप में सबके सामने है,विधायक ने कहा कि खेतों को सिंचित करने के साथ साथ लोगों को पीने की पानी उनके घरों तक पहुंचाने के लिए सोन और कनहर सहित कई और नदियों से पाईप लाइन के जरिये पानी लाने की कुल 1169 करोड़ रुपये की बड़ी योजना की स्वीकृति दी है,उक्त योजना की स्वीकृति देने के लिए विधायक ने झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास को बधाई दी है।

खेत सूखा था,पेट भूखा था,अधर अभी तक प्यासी थी,खिलने वाले चेहरों को देखो,कैसे उस पर छायी उदासी थी",जी हां गढ़वा के इस हालात को बदलने का देर से ही सही सरकार का किया गया प्रयास सराहनीय है,बस जरुरत होगी योजना को ईमानदारीपूर्वक धरातल पर जल्द उतारने की ताकि एक बार फिर बुझी आँखों से देखा गया ख़्वाब बुझ ना सके?

Total view 1305

RELATED NEWS