Bindash News || बड़े जोरों के हैं चर्चे की,"नक्सली" मांग रहे हैं "बच्चे"
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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बड़े जोरों के हैं चर्चे की,"नक्सली" मांग रहे हैं "बच्चे"

Bindash News / 03-02-2019 / 818


ना हों उनकी बातों से ग़ुमराह,बने रहें हमारे राह के हमराह:पुलिस

 
आशुतोष रंजन
 
गढ़वा
 
वैसे गांव जिसे पूरी तरह नक्सल प्रभावित कहा जाता है जहां के इलाकों में कई पुलिसिया कैंप होने के बावजूद नक्सलियों का गाहे ब गाहे आवक बना रहता है,इसी दरम्यान एक चर्चा बड़े जोरों से हो रही है कि नक्सली बच्चे मांग रहे हैं,अब किन इलाकों में पहुंच कर नक्सली गांव वालों से उनके बच्चे मांग रहे हैं पढ़िए इस खास रिपोर्ट में।
 
वो लगे हैं बचाने पर:- पुलिस जुटी मिटाने पर,तो वो लगे हैं बचाने पर",जी हां एक तरफ जहां पुलिस प्रशासन नक्सलियों के समूल ख़ात्मे को आमादा है,सारी कवायदें मात्र एक मक़सद की ख़ातिर किये जा रहे हैं,लेकिन दूसरी ओर नक्सली भी किसी सूरत में ख़ुद का वजूद समाप्त नहीं होने देना चाहते इस लिहाज़ से उनके द्वारा भी सारे हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।
 
हमें दे अपने बच्चे:- हम चलाएंगे आपके सारे ख़र्चे,दें हमें आप अपने बच्चे",नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत लगातार जारी पुलिसिया कार्रवाई से बिल्कुल समाप्ति के कगार पर आ पहुंचा नक्सली संगठन अब अपना वजूद बचाने और एक बार फिर से खुद को स्थापित करने का संघर्ष शुरू कर दी है,इसके लिए नक्सली गांव में पहुंच गांव वालों से उनका बच्चा मांग रहे हैं,यानी उनके बच्चे के रूप में वो संगठन के लिए लड़ाकू मांग रहे हैं,सूत्र बताते हैं कि नक्सली अपने प्रभाव वाले इलाकों में स्थित गांव में पहुंच कर गांव वालों को बहलाने और बरगलाने में लगे हैं,उनके द्वारा ग्रामीणों से कहा जाता है कि हम यानी नक्सली संगठन चलाएगा आपके सारे खर्चे,दें आप हमें अपने बच्चे।
 
दहशत में हैं गांव वाले:- फ़िर से आ रहे जंगल वाले,दहशत में हैं गांव वाले",जी हां कल पति,बेटा और बेटी को ले कर जाने और आज तलक नहीं लौटाने वाले नक्सलियों का एक बार फिर से जंगल से चल कर गांव आना उसी मक़सद से शुरू हो गया है जिसमें वो ग्रामीणों से उनके बच्चे मांगने लगे हैं,नतीज़ा है कि पुलिसिया प्रयास से राहत महसूस करने वाले ग्रामीण एक बार फ़िर से ख़ौफ़ज़दा हो गए हैं,जहां एक तरफ़ दिन तो किसी तरह गुज़र जा रहा है पर उनकी रात नहीं कट रही क्योंकि ना जाने कब नक्सलियों के रूप में आदमखोर घर को आ धमके और उनके बच्चों को निगल जाए।
 
बने रहें हमारे राह के हमराह:- ना हों उनकी बातों से ग़ुमराह,बने रहें हमारे राह के हमराह",हौसला देने और सही रास्ता दिखाने वाले इस पंक्ति के साथ पुलिस के वरीय अधिकारी उन्हीं ग्रामीणों से कह रहे हैं कि आप उस दिन को और आज गुजर रहे दिन को याद कीजिये,कल आपके हमदर्द बनने का वादा कर आपके सहयोग से आगे बढ़े ये नक्सली आज आपके लिए सरदर्द बन गए हैं,क्या क्या नहीं ख़्वाब दिखाया गया था उस दौर में भी आपको लेकिन आज क्या उसमें से कोई एक ख़्वाब भी पूरे हुए ?,आप दिल से महसूस कीजिये कि इनके कारण आपको लाभ हुआ या नुकसान ?,अपने हृदय पर हांथ रख अगर आप सोचेंगें तो पाएंगे कि आपने पाया कुछ नहीं बल्कि सबकुछ खो दिया,किसी ने सुहाग खोया तो किसी के गोद सुने हुए,सबसे ज्यादा कसक तो उस बेटे को है जिसने अभी तक अपने पिता को देखा तक नहीं,उधर वह अभागी मां अपने उस बेटे का राह ताक रही है जिसे कुछ ही दिनों में घर भेज देने का कह कर ले जाया गया था लेकिन आज मां की आंखें राह निहारते पथरा गयीं लेकिन उसके घर का चराग फ़िर से घर में रौशन नहीं हो सका,ऐसे विषम हालात से गुजरने के बाद भी क्या आप फिर से अपने ज़िगर के टुकड़े को ख़ुद से जुदा करेंगें,बस इसीलिए हमारा कहना है कि आपको जो रास्ता हम दिखा रहे हैं आप उसी राह के बने रहें हमराह और किसी सूरत में उनकी बातों से मत हों ग़ुमराह।
 
 

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