Bindash News || वर्षों पहले बना "आलय" आख़िर कब बनेगा "न्यायालय"
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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वर्षों पहले बना "आलय" आख़िर कब बनेगा "न्यायालय"

Bindash News / 09-02-2019 / 830


बैठक बार बार,नतीज़ा शून्य:शाही

 
आशुतोष रंजन
 
गढ़वा
 
एक बात बार बार दुहरायी जाती है कि सबको त्वरित न्याय मिले लेकिन इस पर अमल कितना होता है इसकी बानगी देखनी हो तो ज़रा झारखंड के गढ़वा जिला का रुख़ कर लीजिए जहां लोगों को न्याय पाने के लिए भटकना पड़ रहा है,क्यों ऐसी स्थिति आन पड़ी है जानने के लिए पढ़िए यह रिपोर्ट-
 
लेकिन वह कब बनेगा न्यायालय:- बन तो चुका है कब का आलय,लेकिन वह कब बनेगा न्यायालय",जी हां यह सवाल यक्ष प्रश्न बन कर सबके जेहन में कौंधता है और लोग समय समय पर इस सवाल का जवाब मांगते हैं पर अब तलक सवाल ना-जवाब है,हम बात कर रहे हैं कल का नगर उंटारी और आज नाम परिवर्तित हो जाने के बाद कहा जाने वाला बंशीधर नगर अनुमंडल मुख्यालय की जहां आज कई सालों से लोग एक अदद न्यायालय की बाट जोह रहे हैं,और यह विषम हालात तब है जब कई वर्षों पहले न्यायालय का उपयुक्त भवन बन चुका है,लेकिन उसमें न्यायिक कार्य शुरू नहीं हो सका है,नतीज़ा है कि अनुमंडल मुख्यालय के लोगों को छोटे छोटे मामलों के निष्पादन के लिए भी गढ़वा न्यायालय का दौड़ लगाना पड़ता है,तभी तो हमने लिखा कि बनने के लिए बन तो गया है आलय,लेकिन वह कब बनेगा न्यायालय।
 
नतीज़ा शून्य हर बार:- बैठक हो रहा बार,नतीज़ा शून्य रह रहा हर बार",इसी पंक्ति के साथ व्यंग्यात्मक लहज़े में विधानसभा में अपने सवाल की शुरुआत करने वाले विधायक भानु प्रताप शाही ने पूछा कि आख़िर क्या कारण है कि सालों पहले न्यायालय का भवन बन जाने के बाद भी उसमें न्यायिक कार्य शुरू करने के बजाए केवल ऊपर स्तर पर बैठकें होती हैं और सभी बैठकें अब तलक बे-नतीज़ा हैं,बैठक का ज़िक्र करते हुए विधायक ने कहा कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक बैठक 2014 में तो हुई जिसमें निर्णय हुआ कि महज़ तीस दिनों में उक्त भवन पूर्णरूपेण न्यायालय में परिणत हो जाएगा,इस बैठक के बाद आवाम के साथ साथ मुझे भी प्रसन्नता हुई थी लेकिन बात आयी गयी वाली हो कर रह गयी,इस बीच सदन के साथ साथ हमने व्यक्तिगत रूप से मिलकर बात रखी तो फिर से एक बार चार साल बाद ही गुजरे साल 2018 में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में ही बैठक हुई,जिसमें निर्णय हुआ कि मात्र पंद्रह दिनों में कार्य शुरू हो जाएगा,लेकिन अब तो मैं उस रोज़ का बड़े ही बेसब्री से इंतज़ार कर रहा हूं जिस रोज़ एक बार फिर से चार सालों की अवधि गुजरने के बाद बैठक होगी और साहेबान निर्णय लेंगें की मात्र एक सप्ताह में न्यायालय का काम शुरू हो जाएगा,अफसोस ज़ाहिर करते हुए विधायक कहते हैं कि अजीब हालात है और कार्यों की बात कौन करे यहां तो लोगों को न्याय देने में में भी दिली संज़ीदगी नहीं बरती जा रही है,कहते हैं कि क्षेत्र में लोग जब हमसे सवाल करते हैं तो जवाब देना मुश्किल हो जाता है,लेकिन यहां तो हो रही है केवल चार साला बैठक जो पूरी तरह नतीज़ा शून्य है,अंत में विधायक ने सह्रदय अनुरोध करते हुए कहा कि न्यायिक कार्य जल्द शुरू करिये श्रीमान,हो रहे हैं लोग सालों से हलकान।"
 
 

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