Bindash News || Bindash news ख़ास,"सउरी" में "ओझाई"...
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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Bindash news ख़ास,"सउरी" में "ओझाई"...

Bindash News / 13-02-2019 / 805


यह नहीं होगा हमें गंवारा,की डूब जाए शहीद का गांव सारा

 
आशुतोष रंजन
 
गढ़वा
 
गांव-देहात में अभी भी एक कहावत प्रचलित है कि जिस बच्चे के जन्म के बाद सउरी यानी गर्भ गृह में ओझाई मतलब उसका इलाज़ शुरू हो जाता है तो उसे लोग अपसकुन मानते हैं और उसका भविष्य अंधकारमय लगने लगता है,इस कहावत के जरिये हम यह बताना चाह रहे हैं कि झारखंड के गढ़वा में ऐसी ही एक बड़ी परियोजना के शुरू होने से पूर्व उसे ले कर विरोध शुरू हो गया है,कौन है वह परियोजना और किस तरह हो रहा विरोध जानने के लिए पढ़िए bindash news की यह खास रिपोर्ट-
 
पर क्या पूरी होगी आस:- होने को तो हो गया शिलान्यास,पर क्या पूरा होगा उद्देश्य और पूरी होगी आस",जी हां यह सवाल सबको साल रहा है क्योंकि इसका जवाब अनुत्तरित रह रहा है,हम बात कर रहे हैं बहुप्रतीक्षित मंडल डैम परियोजना की जिसे एक लंबे इंतजार और कई दशक गुजर जाने के बाद शुरू करने और उसे पूरा कर लोगों के बजंर पड़े उपजाऊ खेतों को पानी देने के उद्देश्य से गुजरे पांच जनवरी को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पलामू मुख्यालय से ऑनलाइन शिलान्यास किया गया,लोगों के बुझी आंखों में उम्मीद की एक किरण जग उठी,लेकिन यहां तो फिर से उम्मीद धाराशायी होती दिख रही है क्योंकि उक्त मंडल डैम के बन जाने से विस्थापित होने वाले लोगों द्वारा निर्माण को ले कर विरोध शुरू कर दिया गया है।
 
जब बढ़ रही है विरोध की आग:- खेतों में लहलहाते फसलों को देख कैसे होगा दिल बाग बाग,जब बढ़ रही है विरोध की आग",मंडल डैम ना बने इसे ले कर विरोध कर रहे ग्रामीणों के विरोध की आग गांव से बढ़कर प्रखंड से गुजरते हुए अब जिला मुख्यालय तक पहुंच चुकी है,क्योंकि आज सैकड़ो महिला पुरुष और बच्चों द्वारा जिला समाहरणालय पर नारेबाजी करते हुए घंटों प्रदर्शन किया गया,आदिवासी नेता अशोक कुमार और नरेश भुइयां ने कहा कि सरकार हमें लाभ पहुंचा कर हमारा अस्तित्व बचाने का प्रयास नहीं बल्कि वजूद मिटाने को आमादा है तभी तो डैम बना कर हमें डूबने पर विवश किया जा रहा है,कहा कि डैम के बन जाने से गांव के साथ साथ हमारा पूरा अस्तित्व ही मिट जाएगा।
 
की डूब जाए शहीद का गांव सारा:- हमें यह तनिक भी नहीं है गंवारा,की डूब जाए शहीद का गांव सारा",शहीद के गांव के बावत आपको बताएं कि मंडल डैम के बन जाने के बाद शहीद शहोदर भाई नीलांबर पितांबर का ऐतिहासिक गांव चेमो सान्या भी डूब जाएगा,उसके साथ ही डूब जाएगा स्वतंत्रता आंदोलन का अध्यनिय इतिहास,बस इसी बात से व्यथित होते हुए उमाशंकर बैगा सहित ग्रामीणों ने कहा कि डैम में गेट तो हम कतई नही लगने देंगे इसके लिए हमे अपनी शहादत ही क्यों न देनी पड़े,यह कैसे हो सकता है कि शहीद सहोदर भाई नीलाम्बर पीताम्बर का ऐतिहासिक चेमो सान्या गांव डैम के पानी से डूब जाए,और उसे कहीं और बसाया जाए,विरोध कर रहे ग्रामीणों ने इतना तक कह दिया कि क्या राम मंदिर अयोध्या के अलावे दूसरे जगह बनाया जा सकता है ?,यदि हाँ तो हम भी राजी हैं,नही तो हम भी नही। 
 
एक तरफ पलामू गढ़वा को सूखाड़ से निज़ात दिलाने के उद्देश्य से मृत होने के कगार पर आ पहुंचे मंडल डैम को पुनर्जीवित करने की दिशा में प्रयासरत सरकार,उधर अपना अस्तित्व मिट जाने की डर से निर्माण शुरू होने से पूर्व विरोध की आवाज बुलंद करते ग्रामीण,ऐसे में अब क्या कोई हल निकल पाता है या देश की अन्य बड़ी योजनाओं की तरह इस मंडल डैम परियोजना पर भी ग्रहण लग जाता है यह देखने वाली बात होगी।
 
 

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