Bindash News || क्यों "आंखों" की किरकिरी बन गए "घूरन"
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

State

क्यों "आंखों" की किरकिरी बन गए "घूरन"

Bindash News / 26-03-2019 / 3633


थी कभी दिल्लगी,कैसे छूटी दिल की लगी


आशुतोष रंजन
गढ़वा
 
कहने वाले ने सच ही कहा है कि मोहब्ब्त और जंग में सब जायज़ माना जाता है तभी तो कभी दुश्मन से भी दिल्लगी हो जाती है तो कभी जंग में दोस्त भी दुश्मन बन जाता है,कुछ ऐसा ही राजनीति में भी देखने को मिलता है जहां कभी एक दूसरे के कट्टर राजनीतिक दुश्मन एक हो गले मिल जाते हैं तो कभी एक हो कर गलबहियां करने वाले राजनेता एक दूसरे के दुश्मन हो जाते हैं,कुछ ऐसा ही दृश्य झारखंड के गढ़वा में नुमाया हो रहा है जहां कभी कालांतर में एक कहे जाने वाले आज वर्तमान में दो हो गए कौन कौन हैं वो राजनेता जानने के लिए पढ़िए यह रिपोर्ट-
 
इस रिश्ते को क्या नाम दुं:- कभी मोहब्ब्त तो कभी नफ़रत,अब इस रिश्ते को क्या नाम दुं,जी हां यह हम नहीं कह रहे बल्कि चाहे वह आम हो या ख़ास,या हो राजनीतिक समीक्षक सभी इसी सोच में हैं कि आख़िर इस रिश्ते को क्या नाम दुं,हम बात कर रहे हैं राज्य के गढ़वा में सामने आए एक राजनीतिक घटनाक्रम की जिसमें आज राजद द्वारा सीधे रूप में यह कह दिया गया कि उन्हें किसी सूरत में पार्टी के पलामू लोकसभा उम्मीदवार घूरन राम स्वीकार नहीं हैं,पूर्व विधायक गिरिनाथ सिंह के आवास पर आयोजित एक आपात बैठक में पार्टी नेताओं ने एक स्वर से कहा कि वह घूरन राम को सांसद प्रत्याशी के रूप में स्वीकार नहीं करेंगें,इस बावत केवल ज़बानी नहीं बल्कि नेताओं ने पार्टी सुप्रीमो को बजाप्ते चिट्ठी भी लिख डाली और मांग किया कि उम्मीदवार को तत्काल बदला जाए,बस अचानक घटित हुई इस राजनीतिक घटनाक्रम को देख कर सभी लोग यही कह रहे कि कभी आंखों को सुहाने वाले घूरन आज उन्हीं आंखों के किरकिरी कैसे हो गए ?
 
अब यह भी सुनिए:- एक तरफ प्रदेश अध्यक्ष अन्नपूर्णा देवी और पूर्व मंत्री सह राजद के वरिष्ठ नेता गिरिनाथ सिंह का पार्टी से इस्तीफ़ा दिए जाने के बाद पूरी तरह बुझने की स्थिति में आ चुके लालटेन में फिर से तेल डाल मद्धिम हो चुकी रौशनी को तेज करने की क़वायद शुरू हो गयी है तभी तो इस्तीफ़ा दे चुके अपने राजनेता यानी गिरिनाथ सिंह को उनके कार्यकर्ता एक बार फिर से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में देखना चाहते हैं या यूं कहें की उनकी वापसी चाहते हैं,तभी आज की बैठक में दो निर्णय और लिया गया कि एक तरफ गिरिनाथ सिंह को राजद का प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए तो दूसरी ओर चतरा लोकसभा क्षेत्र से महागठबंधन का उम्मीदवार बनाया जाए,इस बावत कार्यकर्ताओं ने पार्टी सुप्रीमो को चिट्ठी भी भेजी है,उधर दूसरी ओर गिरिनाथ सिंह की ओर से अभी किसी तरह का बयान सामने नहीं आया है,यानी उनकी नाराज़गी अब तक कायम है,उनकी चुप्पी को देखते हुए राजनीतिक गलियारे में यह चर्चा बलवती हो रही है कि कहीं वो भी राजद नेत्री अन्नपूर्णा की तरह लालटेन का साथ छोड़ कमल फूल का दामन न थाम लें यानी गिरिनाथ भी न हो जाएं भाजपा के साथ ?
 
 

 

Total view 3633

RELATED NEWS