Bindash News || "निराश" हुए "भाई जी", नहीं आयीं "बहन जी"
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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"निराश" हुए "भाई जी", नहीं आयीं "बहन जी"

Bindash News / 21-04-2019 / 1766


अब दयाल को कैसे टक्कर देंगें दुलाल

आशुतोष रंजन
गढ़वा

जब आप किसी के भरोसे एक बड़ी आस लगाए बैठे हों यह सोच कर की उनका आना हमारी ज़िंदगी को संवार जाएगा,लेकिन जब वो नहीं आये तो निश्चित रूप से आपको निराशा होगी और सारी आस धरी रह जायेगी,कुछ ऐसा ही हुआ आज झारखंड के गढ़वा में जहां उनका नहीं आना लोगों को निराश ही नहीं बल्कि अंदर तक तोड़ दिया,किसके आने का था इतंज़ार और नहीं आने से कौन हुआ नाराज़ जानने के लिए पढ़िए यह ख़ास रिपोर्ट-

नहीं आयी बहना:- निराश हुए भाई जो नहीं आयी बहना",जी हां आज गढ़वा में वो सभी भाई पूरी तरह निराश हो गए जब उनकी बहना नहीं आयी,हम यहां बात कर रहे हैं बसपा सुप्रीमो बहन कुमारी मायावती की जिन्हें उनके चहेते बहन जी ही कह कर बुलाया करते हैं,लेकिन गढ़वा के भाइयों का बुलाना ना जाने उन्हें क्यों रास नहीं आया,तभी तो पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के बाद भी वो आज पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में आयोजित चुनावी सभा मे गढ़वा नहीं आयीं,यहां आपको बताएं कि पिछले पंद्रह दिनों से सभी भाई बहन के आने वास्ते पूरी तैयारी में जुटे हुए थे,दिन रात एक कर आयोजन स्थल को भाइयों ने दुरुस्त किया था,लेकिन बहन के नहीं आने से सारी तैयारी धरी की धरी रह गयी,जो चेहरे ख़ुशी से दमक रहे थे वो नहीं आने की खबर मात्र से मायूश हो गए,आलम यह हुआ कि लोगों ने आयोजन में किसी और का कुछ सुनना पसंद नहीं किया और आयोजन स्थल से वापस घर को लौट गए।

रह गया मलाल:- अब दयाल को कैसे टक्कर देंगें दुलाल,उन्हें रह गया मलाल",मैं आपको यहां बताऊं की पलामू लोकसभा क्षेत्र से इस चुनाव में बसपा उम्मीदवार अंजना भुइयां हैं जिन्हें जिताने के लिए उनके नेता पति दुलाल भुइयां पूरी तरह कसरत में जुटे हुए हैं,लोग कहते हैं कि बसपा सुप्रीमो बहन मायावती जहां भी चुनावी सभा में शिरक़त करती हैं वहां उनके प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित हो जाती है,यही सोच कर दुलाल भुइयां द्वारा भी बहन जी का कार्यक्रम लिया गया था,सारे कार्यक्रम तय हो गए थे,उनके द्वारा पूरे क्षेत्र में जोरों से प्रचार प्रसार भी किया गया था,वो इसलिए भी ज़्यादा आशावान भी थे कि उन्हें दयाल यानी भाजपा उम्मीदवार विष्णु दयाल राम को जो टक्कर देना है,सूत्र बताते हैं कि बहन जी के इस एक कार्यक्रम के बदौलत ही दुलाल भुइयां दयाल को मात दे देने को पूरी तरह आशावान हो गए थे,लेकिन बहन जी का नहीं आने से जहां यह आस तो अधूरी रही ही वहीं उन्हें मलाल भी रह गया,अब देखना यह होगा की इस कमी की भरपायी कैसे हो पाती है ?

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