Bindash News || "विकास" पहुंच रहा किसके करीब ?,यहां तो पल पल मर रहे "ग़रीब"
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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"विकास" पहुंच रहा किसके करीब ?,यहां तो पल पल मर रहे "ग़रीब"

Bindash News / 12-06-2019 / 1073


ज़िंदगी की जंग हार गया बिहारी


आशुतोष रंजन
गढ़वा

ग़रीबी क्या होती है इसका इल्म उसी को हो सकता है जिसकी क्षुधा भूख से अकुलाती हो,हलक पानी बिना सूखते हों,बमुश्किल शरीर को पैबंद ढंकते हों,घर के नाम पर सर पर खुला आसमान हो,पर यहां तो हमारे हुक्मरान हालात बदलने को बस ज़बानी कहते हैं,काश कभी नज़र की होती हालात को तो आज गरीबों की गरीबी दूर हुई होती और वो मौत के मुंह मे नहीं समाते,आइये हमारे इस खबर के जरिये जानिए की कैसे आज एक ग़रीब ज़िंदगी की जंग हार गया।

यहां तो पल पल मर रहे हैं ग़रीब:- न जाने विकास पहुंच रहा किसके करीब,यहां तो पल पल मर रहे हैं ग़रीब",जी हां राज्य के अंतिम गांव और गांव के अंतिम व्यक्ति तक विकस पहुंचाने के अपने वादे के साथ कार्य कर रही सरकार के विकास आखिर किसके करीब पहुंच रहा है यह एक बड़ा और ज्वलंत सवाल है क्योंकि जहां एक तरफ युवा बेरोजगारी के आलम में सुदूर प्रदेशों में भटकते हुए दम तोड़ रहे हैं तो कुछ ग़रीब गांव और शहर में एड़िया रगड़ते हुए मौत के मुंह मे समा रहे हैं,अब आज के इस मौत को ही लें जहां एक ठेला पर आम बेच कर परिवार को दो रोटी देने वाले गरीब को आज मौत ने अपने आग़ोश में ले लिया,वह गरीब किसी तरह परिवार पालता था लेकिन उसे कहां इल्म था कि आम की बिक्री करते हुए एक दिन उसकी जिंदगी तमाम हो जाएगी,जी हां हम बात कर रहे हैं गढ़वा जिले के धुरकी निवासी बिहारी की जिसकी मौत आज जिला मुख्यालय में हो गयी,आपको बताएं कि बिहारी मुख्यालय के सहिजना मोहल्ले में रह कर शहर में ठेला लगा आम की बिक्री किया करता था,जिस दिन बिक्री होती उस दिन उसके और

परिवार के मुंह में निवाला जाता था नहीं तो भूखे पेट सोना नियति बनी रहती थी,आज भी वह घर से शहर में अपने ठेला पर आम ले कर पहुंचा था अभी तो ठीक से वह कुछ आम बिक्री भी नहीं किया था कि अचानक उसकी तबियत बिगड़ने लगी,वह शहर थाना के सामने बने यात्री शेड में पहुंच बैठने की कोशिश करता है पर असफल रहता है और वह वहीं जमीन पर लेट जाता है अभी वह खुद या पास के लोग कुछ समझ पाते तब तक तो उसकी मौत हो गयी,उसे जानने वाले लोगों ने उसके घर पर सूचना दी,आप खुद तस्वीरों में देख सकते हैं कि किस तरह एक तरफ उसकी पत्नी दहाड़ें मार कर विलाप कर रही है तो दूसरी ओर उसके दो अबोध बच्चे पूरी तरह स्तब्ध हैं,ऐसे हालात में मौत होने पर हम यही कहना चाहेंगे कि हमारे यहां बिहारी की मौत हुई तो हम कह रहे हैं कि एक गरीब को उसकी ग़रीबी ने निगल लिया,लेकिन आये दिन नहीं बल्कि प्रतिक्षण ऐसे कई बिहारी ग़रीबी के कारण मौत के मुंह मे समाते जा रहे हैं और अपने देश के हुक्मरान कहते नहीं थक रहे कि "सबका साथ,सबका विकास और अब तो जोड़ दिया गया कि आपका विश्वास"..?

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