Bindash News || कैद से “आज़ाद” हुआ पंख,अब करेगा “परवाज़”
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

State

कैद से “आज़ाद” हुआ पंख,अब करेगा “परवाज़”

Bindash News / 09-08-2018 / 525


“नक्सली चंगुल से भागे भाई-बहन,पुलिस दे रही उन्हें संरक्षण”

जिन्हें कल वो पढ़ाते थे विरोध की भाषा,अब हम उन्हें पढाएंगें अवरोध मिटाने की पढ़ाई:एसपी

आशुतोष रंजन

गढ़वा. वह भी उड़ना चाहते थे,उन्मुक्त विचरण करना चाहते थे,पर उनका पंख कैद में था,वह आज़ाद होना चाहते थे,पर रास्ते से अनजान थे,लेकिन उन्होंने प्रयास नहीं छोड़ा था,सो एक दिन वह भी आया जब वह पिंजड़ा तोड़ कर भाग निकले,अब वह खुले आकाश में परवाज़ करेंगें,अब वह भी अपने उन खुली आँखों से दुनिया देखेंगें,जो कल तलक बंद था,तो आइए इस ख़बर के जरिये जानिए उन भाई बहन की कहानी जो कल तक नक्सलियों के चंगुल में कैसे फड़फड़ाते थे,पर अब आजाद होने के बाद गढ़वा पुलिस के प्रयास से कैसे उनकी झंझावत भरी ज़िंदगी सुकून पा रही है।

अब भरेगा जिंदगी में रंग : जो जीवन नक्सलियों के ताप से हो चुका है बदरंग,अब उसी ज़िंदगी में भरेगा रंग”,जी हां हम बात कर रहे हैं उन भाई बहन की जो सालों तक नक्सलियों के चंगुल में थे,क्योंकि नक्सलियों द्वारा उन्हें उनके घर से बाजबर्दस्ती उठा लिया गया था,उसके साथ साथ कई और बच्चों को ले जाया गया था,सभी को बुढ़ा पहाड़ पर रखा गया था,कुछ माह पहले तो और बच्चे भाग निकले लेकिन यही भाई-बहन उनके कैद में थे,जो बराबर उनके चंगुल से निकलने की ताक में रहते थे लेकिन निकल पाना संभव नहीं होता था,नतीजा होता था कि उन्हें ज़िल्लत भरी जिंदगी गुजारनी पड़ती थी,आज आलम है कि उनका बचपन वाला जीवन पूरा बदरंग हो चुका है,लेकिन अब उनके बाकी ज़िंदगी में भरा जाएगा रंग।

वह दर्द दूसरों का मिटाते थे- करते करते काम वह थकते थे ख़ुद,पर बेबसी में वह दर्द दूसरों का मिटाते थे”,नक्सलियों के कब्ज़े से भाग निकला वह बच्चा बताता है कि अपार कष्ट भरा जीवन उसे गुजारना पड़ता था,पहाड़ से नीचे उतर गांव से कई बार खाना लाने के साथ साथ पहाड़ पर इधर उधर बैठे नक्सलियों को उन तक खाना पहुंचाना उसका मुख्य काम था,फिर उसे नेताओं के आवभगत में लगना पड़ता था,यानी कि बारी बारी से बड़े नेताओं का शरीर भी दबाना पड़ता था,कहते कहते फफक कर रोते हुए वह कहता है कि अब मत पूछिए भइया की क्या क्या कष्ट नहीं था,आज शरीर का रोम रोम से दर्द का टीस उठ रहा है,और दिल में कई ज़ख्म पेवस्त हैं,लेकिन खुशी इस बात का है कि कल हम जिसके चंगुल में थे उनके द्वारा टीस को उभारा जाता था,ज़ख्म को हरा किया जाता था,पर आज हम जिनके पास हैं उन्हें मेरे दर्द का अहसास है,और साथ ही मेरे ज़ख्म पर मरहम लगाया जा रहा है,साथ ही साथ एक लंबी सांस लेते हुए कहता है कि कल जीने की चाह ख़त्म हो गयी थी पर अब ज़िंदगी को जीना चाहता हूं और जी कर कुछ करते हुए गांव,समाज और देश के लिए कुछ करना चाहता हूं,साथ ही हमारे लोग जो आज रास्ते से भटक गए हैं उन्हें मुख्य राह पर लाने में प्रशासन का सहभागी बनना चाहता हूं।

उसकी आंखें बोलती हैं : ख़ामोश हैं लब उसके,पर आंखें बोलती हैं”,जी हां हम बात कर रहे हैं उस लड़की की जो अपने भाई के साथ आततायी नक्सलियों के क़ब्जे से भाग निकली है,और आज गढ़वा पुलिस के संरक्षण में फिर से एक नयी ज़िंदगी शुरू करने का ख़्वाब संजो रही है,पूछे जाने पर वह कुछ बोलती नहीं बस पूछने वाले को कुछ इस तरह देखती है कि लब ख़ामोश होते हुए भी आंखों से सारी कहानी बयां कर जाती है,पूछने के दरम्यान कभी बूढ़ा पहाड़ का नाम आते ही वह खुद के शरीर को समेटने लगती है जो यह बताने के लिए काफी है कि नक्सलियों के चंगुल में पहाड़ पर गुजरा उसका वक्त हर मायने में बहुत ही पीड़ादायक रहा है।

अब हम पढाएंगें पढ़ायी : जिन्हें कल साये में संगीनों के सिखाते थे वो विरोध की भाषा,पर अब उन्हें हम पढाएंगें अवरोध मिटाने की पढ़ायी”,कुछ इसी अंदाज़ में उन दोनों भाई बहन की ज़िंदगी संवारने की चाहत लिए अपने टीम के साथ जुटीं गढ़वा एसपी शिवानी तिवारी कहती हैं कि अपना जीवन बचाने के लिहाज़ से नक्सलियों के चंगुल से भाग निकलने वाले भाई बहन को संरक्षण देते हुए उनकी ज़िंदगी को पूरी तरह संवारने के लिए हमने काम शुरू कर दिया है,सबसे पहले भाई का स्कूल में नाम लिखा दिया गया है,जबकि उसकी बहन के मन में घर कर चुके उसके डर को निकालने का प्रयास जारी है,उसे सबसे पहले खुश रखने का प्रयास किया जा रहा है क्योंकि वह तो हंसना ही भूल गयी है,साथ ही एसपी ने कहा कि दोनों भाई बहन की ज़िंदगी संवर कर एक नयी सफल कहानी गढ़े इसकी कोशिश हम प्राणपण से कर रहे हैं,साथ ही साथ इनके जरिए हम उन्हें भी संदेश देना चाहेंगें जो आज मुख्य रास्ते से जुदा हो गए हैं,उन्हें अब सोचने नहीं फैसला लेने की जरूरत है कि आख़िर किस रास्ते पर ज़िंदगी महफ़ूज है।

Total view 525

RELATED NEWS