Bindash News || धीरज के "कलम" की धार से हुई है "सरकार" पर "वार"
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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धीरज के "कलम" की धार से हुई है "सरकार" पर "वार"

Bindash News / 19-08-2019 / 1836


बात कर के "सदाचार" की,जो करे है "भ्रष्टाचार",वो है "झारखंड सरकार"


आशुतोष रंजन
गढ़वा

बात कर के सदाचार की,जो करे है भ्रष्टाचार,वो है झारखंड सरकार,उक्त बातें जेएमएम के जिला प्रवक्ता धीरज दुबे ने कही,साथ ही साथ एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि पंचायत को पंगु बना कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है रघुवर सरकार क्योंकि EESL कंपनी द्वारा पंचायतों में लगाई जाने वाली स्ट्रीट लाइट में हुए 2,64,60000 (2 करोड़ 64 लाख और 60 हजार रूपये) की लूट की गयी है,इसे सरकार भले सदाचार कहे पर हम आप तो सीधे शब्दों में भ्रष्टाचार ही कहेंगें,दुबे ने आगे बताया है कि 14वें वित्त आयोग मद की राशि से प्रत्येक पंचायत में 200 एलईडी युक्त स्ट्रीट लाइट लगाया जाना है,इस प्रकार गढ़वा जिले के 189 पंचायतों में करीब 37800 स्ट्रीट लाइट EESL कंपनी द्वारा लगाए जाएंगे,24 वाट के एक स्ट्रीट लाइट को लगाने के लिए सरकार के द्वारा कंपनी को 1941.55 रूपये भुगतान करेगी जबकि बाजार में सबसे अच्छी कंपनी की 24 वाट का स्ट्रीट लाइट 950 रुपए में मिल जाती है और उसका लगाने तक का खर्चा मिलाकर एक स्ट्रीट लाइट की कीमत 1250 रूपए  पड़ेगी, इस प्रकार एक स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए उस कंपनी को ₹700 रूपये अधिक भुगतान होगा और  गढ़वा जिला के 189 पंचायतों में 37800 स्ट्रीट लाइट लगाने में उस कंपनी को 2 करोड़ 64 लाख 60 हजार रुपए का अधिक भुगतान किया जाएगा। ज्ञात हो कि राज्य सरकार ने बिना टेंडर किए EESL कंपनी को स्ट्रीट लाइट लगाने का काम सौंप दिया जबकि वह कंपनी खुद किसी प्रकार का बल्ब का निर्माण नहीं करती है,सरकार ने भ्रष्टाचार के अलावे पंचायती राज व्यवस्था को पंगु बनाकर उनकी स्वायत्तता को छीनने का काम किया है, पंचायत का प्रधान या मुखिया को यह सरकार रबड़ स्टांप की भांति इस्तेमाल कर रही है और वह सरकार के इस करतूत से खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं, ज्यादातर पंचायतों में लगी हुई स्ट्रीट  लाइट  3-4 महीने में ही खराब हो गईं और मुखिया इसे मरम्मत कराने में असमर्थ है, मुखिया का कहना है कि जब राज्य सरकार को ही पंचायती व्यवस्था को चलाना था तो पंचायती राज बनाने का मतलब क्या रह गया है।

श्री दुबे ने राज सरकार के द्वारा किराना दुकानों में शराब बेचने की प्रस्ताव बनाने के निर्णय का आलोचना किया और कहा कि सरकार समाज में नशा को बढ़ावा देना चाहती है, स्कूलों को बंद कर शराब की दुकानें खोली जा रही है इसमें सरकार की विकृत मानसिकता स्पष्ट दिख रहा है।

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