Bindash News || "बंशीधर" में आज जनमेंगें "लीलाधर"
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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"बंशीधर" में आज जनमेंगें "लीलाधर"

Bindash News / 23-08-2019 / 1587


सब पर होते हैं सहइया,नगर वाले कन्हैया
बड़ा पावन दिन है आज,कह रहे युवराज


आशुतोष रंजन
गढ़वा

आज जहां मथुरा और वृंदावन में जन्माष्टमी पूरे जोशो खरोश के साथ मनाने की तैयारी हो चुकी है,वहीं अन्य राज्यों में भी पूजा का आयोजन किया गया है,लेकिन इन सबसे जुदा पूजा और सबसे अलहदा भगवान कृष्ण की प्रतिमा देखनी हो तो ज़रा झारखंड में गढ़वा का रुख़ कीजिये साहेब जहां सालों पूर्व मंदिर में स्थापित है विश्व का इकलौता अद्वितीय बत्तीस मन ठोस सोने की कृष्ण की प्रतिमा,तो आइए आप भी आज घर बैठे कीजिये अपने आराध्य के दर्शन और जानिए यहां कैसा होता है जन्माष्टमी महोत्सव।

नगर वाले कन्हैया:- सब पर होते हैं सहइया,नगर वाले कन्हैया",जी हां नगर उंटारी अनुमंडल मुख्यालय में अवस्थित यह है बंशीधर मंदिर,जहां स्थापित है भगवान् कृष्ण की अद्वितीय,अलौकिक और नयनाभिराम प्रतिमा,कहा जाता है कि देश ही नहीं वरन पुरे विश्व में अकेली ऐसी प्रतिमा है जो 32 मन ठोश सोने की है,कहानी के अनुसार आज से तक़रीबन दो सौ साल पहले नगर उंटारी की राजमाता शिवमानी कुअंर को आये सपना के आधार पर पहाड़ पर खुदाई करायी गयी,जहां उक्त प्रतिमा मिली,किवदंती है कि राजमाता उक्त प्रतिमा को अपने महल में स्थापित करना चाहती थीं,पर वर्तमान में जहां मंदिर है वहीं पर वह हांथी बैठ गया जो पहाड़ से ले कर प्रतिमा आ रहा था,इसलिए प्रतिमा वहीं स्थापित करनी पड़ी,21 जनवरी 1828 को वसंत पंचमी के दिन उक्त प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की गयी,भगवान् बंशीधर से लोगों की अगाध श्रद्धा जुड़ी हुई है।

कह रहे युवराज:- बड़ा ही पावन दिन है आज,कह रहे युवराज",नगर गढ़ के युवराज सह जन्माष्टमी महोत्सव के मुख्य आयोजक राजेश प्रताप देव बताते हैं कि बंसीधर मंदिर में स्थापित उक्त प्रतिमा की अलौकिकता की व्याख्या सांकृत्यायन ने भी की है,अपनी यात्रा के दौरान कालांतर में नगर पहुंचे राहुल सांकृत्यायन ने मंदिर में कुछ समय गुज़ारा था,उन्होंने भी उक्त प्रतिमा को विश्व का अपने आप में अकेला अद्वितीय और अनूठा बताया था,मंदिर की महत्ता के बारे में अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोगों की दिनचर्या की शुरुआत भगवान कृष्ण के दर्शन के साथ होती है,उधर हर साल आयोजित हो रहे जन्माष्टमी महोत्सव में मंदिर की भव्यता देखते बनती है,आस पास के साथ साथ सुदूर प्रदेशों के लोग भी यहां के जन्माष्टमी महोत्सव में भाग लेने और उक्त पावन दिन में अपने बांके बिहारी के बालरूप का दर्शन करने पहुंचते हैं,साथ ही युवराज कहते हैं कि इस बार के महोत्सव को और खास बनाने की तैयारी पूर्ण हो चुकी है।

आप अपने आराध्य का दर्शन करने वृंदावन,मथुरा और इसकॉन तक जाते हैं लेकिन अगर सच में लल्ला से दिली श्रद्धा रखते हैं तो एक बार वंशीधर पहुंचिए जहां खुद विराजमान हो कर कन्हैया कर रहे आपके यानी भक्तों का इंतज़ार।

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