Bindash News || अब नहीं है "सहाता", मत दिखाना ऐसा दिन ये "विधाता"
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

State

अब नहीं है "सहाता", मत दिखाना ऐसा दिन ये "विधाता"

Bindash News / 13-09-2019 / 1567


गढ़वा आख़िर कब तक झेलेगा प्रकृति का प्रकोप

जल रही थी चिता,साल रही थी चिंता


आशुतोष रंजन
गढ़वा


झारखंड का गढ़वा आख़िर कब तलक प्रकृति का कोपभाजन बनता रहेगा यह सवाल अब तलक अनुत्तरित है,क्योंकि कभी बारिश नहीं होने की स्थिति में सुखा के कारण अन्न के निवाले बिना मौत के मुहाने पर पहुंचना तो कभी बारिश के साथ वज्रपात होने से इक्का दुक्का तो कभी एक साथ कई लोगों का मौत के मुंह में समा जाना दशकों से नियति बनी हुई है।

पर साल रही थी चिंता:- जल रही थी चिता,पर साल रही थी चिंता",एक साथ कई चिताओं को जलता देख लोगों को यही चिंता साल रही थी कि काश यह अंतिम होता,फिर किसी की चिता जलाने की नौबत नहीं आती,ऐसी कसक भरी सोच उस गांव के लोगों की है जिस गांव में एक साथ आठ युवाओं की मौत हो गयी,हम बात गढ़वा जिले के मझिआंव थाना अंतर्गत पासी टोला की कर रहे हैं जहां कल दोपहर में हुए वज्रपात में एक साथ आठ युवकों की मौत हो गयी और कई झुलस गए जो अभी भी जिला अस्पताल में इलाज़रत हैं,एक साथ इतने मौत से मर्माहत लोगों की आंखें तब बरस पड़ीं जब उनके द्वारा अपने जिगर के टुकड़े का जनाज़ा खुद के कंधे पर उठाना पड़ा,कदम लड़खड़ा रहे थे फिर भी सबने जनाजे को कांधा दिया और उसे ले कर नदी घाट पहुंचे,लेकिन परिजनों के साथ साथ मौके पर मौजूद सैकड़ो आंखें तब बरस पड़ीं जब चिता को आग लगाने की प्रक्रिया शुरू हुई,एक तरफ जहां परिजन चीत्कार कर रहे थे वहीं मौजूद लोग भी सिसक रहे थे।

मत दिखाना ऐसा दिन ये विधाता:- घटना की जानकारी ने सबको ग़मज़दा कर दिया है जो भी सुना वह घटना स्थल के साथ साथ जिला अस्पताल तक पहुंचा,क्या आम क्या खास और क्या जनप्रतिनिधि सभी ने घटना पर दुख व्यक्त किया,हम बात मझिआंव जिला परिषद कविता दुबे की करें तो वो जानकारी मिलने के साथ ही घटना स्थल पर पहुंची और खुद से तत्परता दिखाते हुए शव के साथ साथ घायलों को प्राथमिक उपचार कराना और उन्हें फिर जिला अस्पताल तक ले जा इलाज कराने और इन सभी प्रक्रियाओं के बीच चित्कार करते परिजनों को ढाढस भी बंधाती रहीं,उन्होंने कहा कि इससे बड़ा दुख और कुछ नहीं हो सकता कि पिता के कंधे पर पुत्र का जनाजा हो,देख कर जहां एक तरफ मन व्यथित हो गया वहीं दूसरी ओर यह भी सोच खाये जा रही है कि आख़िर कब तलक हम प्रकृति का प्रकोप झेलते रहेंगें,एक कसक के साथ उन्होंने कहा कि अब नहीं है सहाता,मत दिखाना ऐसा दिन ये विधाता।

आज मिलेगा मुआवज़ा:-घटना तो घट गयी लेकिन घटना में हताहत हुए लोगों के परिजनों को जल्द सहायता मिले इस निमित जिला प्रशासन जुटा हुआ है,घटना पर दुख व्यक्त करते हुए जिले के उपायुक्त का कहना है कि प्रति मृतक चार चार लाख रुपये मुआवज़ा दिया जा रहा है।

वज्रपात में हताहत हुए आठ युवाओं की चिता की राख अब ठंढी भी हो जाएगी लेकिन यह सवाल आग की तरह सुलगना जरूरी है कि आख़िर प्रकृति के कोप से कैसे बचा जाए ?

Total view 1567

RELATED NEWS