Bindash News || "गढ़वा" में "माफ़िया राज"
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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"गढ़वा" में "माफ़िया राज"

Bindash News / 22-09-2019 / 2082


वो हैं बेख़ौफ़ पर हम हैं ख़ौफ़ज़दा:ग्रामीण


आशुतोष रंजन
गढ़वा

जंगल और पहाड़ को बचाने के लिए सरकार खुद को प्रतिबद्ध बताते हुए प्रशासन को भी सख़्ती से ताक़ीद की करती है लेकिन उस आदेश का अनुपालन कितनी ईमानदारी से हो रहा है इसकी बानगी देखनी हो तो गढ़वा चले आइये जहां दिन के उजाले में माफियाओं द्वारा पहाड़ को तो उजाड़ा जा ही रहा है,रोकने वाले ग्रामीणों को जान से मारने की धमकी भी दी जा रही है।

हो रहा संपदा का दोहन:-संरक्षण और संवर्धन से दूर,हो रहा प्राकृतिक संपदा का दोहन",जी हां झारखंड को प्राकृतिक संपदा से परिपूर्ण राज्य कहा जाता है लेकिन इसके पोषण से ज़्यादा आज इसका दोहन हो रहा है,हम अब तलक प्रदेश के अन्य जिलों से जंगल-पहाड़ नष्ट किये जाने की खबरें सुनते थे लेकिन हमारे यहां भी ऐसा कृत्य हो रहा है हम इससे सर्वथा अनजान थे,लेकिन आज आपको बताते हैं कि गढ़वा जिले में कहां बड़े पैमाने पर प्राकृतिक संपदा यानी जंगलों और पहाड़ों को उजाड़ा जा रहा है।

गढ़वा में माफ़िया राज:- सरकार और प्रशासन नक्सलियों और अपराधियों से गढ़वा जिले को भले कुछ हद तक मुक्त करा ली हो पर माफियाओं के सामने शायद उनकी एक नहीं चल रही तभी तो आज रात के अंधेरे में कौन कहे बल्कि दिन के उजाले में जंगलों और पहाड़ों को बेख़ौफ़ हो कर बेतरतीब ढंग से उजाड़ा जा रहा है,आप इन कुछ तस्वीरों के जरिये खुद देखिये यह है गढ़वा जिले का कुंभी पहाड़ जिसकी तलहटी में कई जगहों पर तोड़ कर रखा गया यह पत्थर इस बात की तस्दीक़ कर रहा है कि इस पहाड़ से बड़े पैमाने पर पत्थर की तुड़ाई हो रही है,ग्रामीण बताते हैं कि वह वन विभाग के साथ साथ पुलिस प्रशासन से कई बार इस अवैध धंधे पर रोक लगाने का गुहार लगाए पर समुचित कार्रवाई नहीं हुई जिसका नतीज़ा है कि माफियाओं द्वारा पहाड़ से पत्थर तोड़ने का कार्य बिना अवरोध के जारी है।

पर हम हैं ख़ौफ़ज़दा:- वो हैं बेख़ौफ़ पर हम हैं ख़ौफ़ज़दा",कुंभी नामक पहाड़ तलहटी में बसे गांव के लोग कहते हैं कि पत्थर तोड़ने वाले माफ़िया बेख़ौफ़ हैं पर हम ख़ौफ़ज़दा हैं क्योंकि हमारे द्वारा जब भी पहाड़ से पत्थर तोड़े जाने और जंगल से लकड़ी काटे जाने का विरोध किया जाता है तो उनके द्वारा सीधे रूप में जान मारने की धमकी दी जाती है,ऐसे विषम हालात में ख़ौफ़ के आलम में जीवन बसर कर रहे ग्रामीणों का सरकार और प्रशासन से कहना है कि आप जंगल और पहाड़ को माफियाओं से बचाने के साथ साथ हमारी जान भी बचाएं।

जल,जंगल और पहाड़ के करीब रहने वाले लोगों के लिए यह जीवन बसर करने का एक मजबूत साधन माना जाता है,लेकिन आज माफ़ियाओं द्वारा इसे नष्ट किये जाने से उन ग्रामीणों के अस्तित्व पर जहां एक ओर संकट आ खड़ा हुआ है वहीं दूसरी ओर उनके जान पर भी बन आयी है,ऐसे में अब कब तलक इस पर रोक लग पाता है और जंगल पहाड़ का वजूद बच पाने के साथ साथ ग्रामीण माफियाओं के दहशत से आजाद हो पाते हैं यह देखने वाली बात होगी।

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