Bindash News || देवी स्थापित "हिंदुस्तान" में पर मंदिर है "पाकिस्तान" का
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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देवी स्थापित "हिंदुस्तान" में पर मंदिर है "पाकिस्तान" का

Bindash News / 06-10-2019 / 1323


नहीं होने देंगें कभी उम्मीदों की शाम कह रहे मुरली श्याम


आशुतोष रंजन
गढ़वा

अपने देश में गंगा जमुनी तहज़ीब क़ायम है इससे हम आप सभी वाक़िफ़ हैं,साथ ही इसका मुजायरा हमें हर कदम पर होता भी दिखता है,लेकिन देश के एक जिले में इस दशहरा में जो दृश्य नुमाया हो रहा है वह तहज़ीब को खुद ब खुद परिलक्षित कर रहा है,आपको बताएं कि मां दुर्गे की प्रतिमा स्थापित तो हुई है अपने हिंदुस्तान में पर वह मंदिर है पाकिस्तान का,क्योंकि इस बार एक पूजा समिति द्वारा हिंदू मुस्लिम एकता का अनूठा परिचय देते हुए पाकिस्तान में अवस्थित देवी मंदिर के रूप में अपने पूजा पंडाल को बनाया गया है जहां मां की प्रतिमा स्थापित की गयी है,तो आप अगर पाकिस्तान स्थित उक्त मंदिर में नहीं जा पाए हैं तो आइए यहां और उस मंदिर को नज़र करने के साथ साथ मां की पूजा अर्चना भी कीजिये,तो कहां और किस पूजा समिति द्वारा पूजा के जरिये आपसी एकता बरकरार रखने का संदेश दिया जा रहा है आइये आपको इस ख़ास खबर के जरिये बताते हैं।

पर वह मंदिर है पाकिस्तान का:- देवी स्थापित हुई हैं हिंदुस्तान में पर वह मंदिर है पाकिस्तान का,आपको यह सुनकर जरूर अचरज़ लग रहा होगा लेकिन यह सच है क्योंकि झारखंड के गढ़वा जिले में पूजा समिति द्वारा जिस पूजा पंडाल का निर्माण किया गया है वह कोई आम मंदिर नहीं बल्कि पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित हिंगलाज मंदिर का प्रारूप है जिसमें माँ की प्रतिमा स्थापित की गयी है,इसलिए हमने शुरुआत में कहा कि देवी स्थापित हुई हिंदुस्तान में लेकिन वह मंदिर है पाकिस्तान का,आपको बताएं की पूजा आयोजन में अपने जिला के साथ साथ कई जिलों में बेहतर आयोजन के लिए पहचानित जय भवानी संघ द्वारा इस बार हिन्दू मुस्लिम आपसी एकता के साथ साथ दोनो देशों के बीच एक बेहतर रिश्ता कायम हो इस निमित संदेश देने के लिए पाकिस्तान में स्थित उक्त मंदिर के रूप में पूजा पंडाल का निर्माण करा माँ की प्रतिमा स्थापित की गयी है,इस तरह के सोच की सराहना भी हो रही है,संघ के संरक्षक की मानें तो "नहीं होने देंगें आपसी एकता वाली उम्मीदों की शाम,आज यह कह रहा है मुरली श्याम।"

लेकिन दिल और सोच बड़ा है:-जगह छोटा है लेकिन दिल और सोच बड़ा है,जी हां आप खुद देखिये की शहर के संकरी गली में थोड़े से जगह में जय भवानी संघ हर साल पूजा आयोजन कर जहां एक तरफ लोगों में धार्मिक भावना जागृत करता है वहीं दूसरी ओर आपसी एकता को भी बल देता है,यहां बताएं की उक्त स्थल पर ऐसे तो पिछले अस्सी नब्बे सालों से पूजा का आयोजन होता आ रहा है पर पिछले 30 सालों से जय भवानी संघ यहां पूजा का ख़ास आयोजन कर रहा है,यहां के पूजा की सबसे बड़ी खाशियत बताते हुए संघ के अध्यक्ष उमेश कुमार कश्यप कहते हैं कि ऐसे तो हर जगह श्रृंगार में नकली गहनों का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन एकमात्र जय भवानी संघ ही है जहां माँ की प्रतिमा का श्रृंगार सोना चांदी के असली आभूषणों से किया जाता है जो सबसे ज़्यादा आकर्षण का केंद्र बना रहता है,जिसे देखने को लालायित शहरवासी पूरे एक साल रहा करते हैं वहीं इस दिन का इंतज़ार सुदूर गांव देहात के साथ साथ पड़ोसी जिले और राज्य के लोग भी किया करते हैं।

अब जुड़े जो संबंध आपसी वह अटूट हो:- ना रिश्तों में और टूट हो,अब जुड़े जो संबंध वह अटूट हो",जी हां इस निमित अपने पूजा पंडाल का प्रारूप पाकिस्तान के मंदिर का देने के लिए जय भवानी संघ की बहुत ही सराहना हो रही है,लोग इस पहल को सराहते हुए कह रहे हैं कि ऐसे तो हर पूजा समिति द्वारा कहीं न कहीं के मंदिर के रूप में पूजा पंडाल बनाया जाता है जो केवल देखने में आकर्षक लगता है पर जय भवानी संघ द्वारा बनाया गया यह पंडाल जहां एक तरफ आकर्षक लग रहा है वहीं दूसरी ओर एक बेहतर संदेश भी दे रहा है,उधर संघ के सदस्य शुभम और प्रकाश सोनी का कहना है कि अपने पूजा पंडाल का यह प्रारूप देने के पीछे अपना मक़सद है कि पाकिस्तान भले गलत व्यवहार रखे पर हम दशकों से आपसी मिल्लत का जो प्रयास करते आ रहे हैं वो करते रहेंगें।

गढ़वा जिले के इस पूजा संघ ने एक कोशिश कर बहुत बड़ा संदेश देने का काम किया है,इस कोशिश की उन्मुक्त कंठ से सराहना करते हुए दिल से बरबस यही निकलता है कि "हम करते आये हैं,और करते रहेंगें अनवरत प्रयास,क्योंकि कभी तो पूरी होगी आपसी मिलन की आस।"

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