Bindash News || सबकी "आंखें" भर आयीं जब हुई "माँ" की विदाई
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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सबकी "आंखें" भर आयीं जब हुई "माँ" की विदाई

Bindash News / 08-10-2019 / 957


दशकों पूर्व जागृत हुई थी यह सोच


आशुतोष रंजन
गढ़वा

कालांतर से ले कर गुजर रहे वर्तमान दौर में दुर्गा पूजा के दौरान आपने एक से बढ़कर एक पूजा पंडाल को देखा होगा,साथ ही आपने कई जगहों पर होने वाले विसर्जन को भी नजऱ किया होगा,लेकिन आपने सभी जगहों पर गाड़ियों से प्रतिमा ले जा कर विसर्जन करते देखा होगा,पर आपको कुछ अनोखा प्रतिमा विसर्जन देखना है तो आप झारखंड के गढ़वा रुख कर लीजिए जहां प्रतिमा विसर्जन का अनूठा दृश्य आपको जरूर आकर्षित करेगा,आख़िर क्या ख़ास है आइये आपको हम अपने इस ख़बर में सम्मिलित तस्वीर के जरिए दिखाते हैं।

आज कैसे कर दूं गाड़ी के हवाले:- जब इतनी दिली शिद्दत से हम पूरे नौ दिन माँ की आराधना किया करते हैं,तो आज जब विदा करने की बारी आयी तो उसे किसी गाड़ी के हवाले कर दूं ऐसा हरगिज़ नहीं होगा और हम माँ को अपने कांधे से ले जा विदा करेंगें,यह सोच आज नहीं दशकों पूर्व गढ़वा के लोगों में जगी थी,तभी तो यहां के लोग देवी माँ की प्रतिमा का विसर्जन कांधे के सहारे ले जा कर किया करते हैं,आपको बताएं कि जिला मुख्यालय में अवस्थित प्राचीन गढ़देवी मंदिर में दशकों से माँ दुर्गे की पूजा होती आ रही है,जहां एक तरफ यहां की पूजा अपने आप में ख़ास माना जाता है तो वहीं दूसरी ओर विसर्जन तो बिल्कुल अनूठा होता है,यहां की प्रतिमा का विसर्जन किसी बड़ी गाड़ियों के सहारे नहीं बल्कि श्रद्धालु अपने कांधे के सहारे शहर के मध्य में स्थित रामबांध तालाब ले जा कर किया करते हैं।

जब हुई माँ की विदाई:- सबकी आंखें भर आयीं जब हुई माँ की विदाई",जी हां आपको यहां बताएं कि माँ की विदाई के निमित दशहरे के रोज सुदूर देहात के साथ साथ जिला मुख्यालय के श्रद्धालुओं का मंदिर पहुंचना शुरू हो जाता है,और जब विसर्जन का नियत समय होता है तब तलक भींड़ सैकड़ों में पहुंच जाया करता है,हमें यहां कुछ ज्यादा बताने की शायद जरूरत नहीं क्योंकि आप खुद देख सकते हैं कि किस तरह विसर्जन को भींड़ उमड़ पड़ी है,मंदिर से ले कर रामबांध तालाब तक रास्ता तय करने के बीच लोग माँ गढ़देवी और माँ दुर्गे का जयघोष करते रहते हैं,इसका इल्म होने के बाद भी की अब कुछ ही पलों में माँ हमसे विदा हो जाएगी फिर भी श्रद्धालु मंदिर से तालाब तक पहुंचने तक पूरे जोश-ओ-खरोश में रहा करते हैं लेकिन तालाब पहुंचने के बाद जैसे ही विदा करने का वक्त आता है एकाएक सैकड़ो की भींड़ खामोश हो जाया करती है,पूरे रास्ते जयघोष करने वाले लोगों के लब चुप हो जाया करते हैं और बस केवल उनकी आंखें झर झर झरने लगती हैं,और आखिर में सभी अगले बरस का बुलावा दे माँ को एक असहनीय दर्द के साथ विदाई दे देते हैं।

मुस्तैद रहता है प्रशासन:- उधर विसर्जन में कोई विघ्न ना आये इसे ध्यान में रखते हुए दर्जनों पुलिसकर्मियों के साथ साथ पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहते हैं,हम आज के विसर्जन की बात करें तो एसडीपीओ ओमप्रकाश तिवारी,शहर थाना प्रभारी अशोक कुमार सिंह,ट्रैफिक इंचार्ज लक्ष्मीकांत,एएसआई अभिमन्यु सिंह सहित दर्जनों की संख्या में पुलिस जवान मंदिर से ले कर रामबांध तालाब यानी विसर्जन तक मौजूद रहे।

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