Bindash News || रखेंगें वो आजीवन "याद",जिनकी पूरी हुई आज "मुराद"
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

Economy

रखेंगें वो आजीवन "याद",जिनकी पूरी हुई आज "मुराद"

Bindash News / 22-10-2019 / 1136


नहीं रहेगा कुछ भी अधूरा,लिया हूं संकल्प करने का पूरा:विधायक


आशुतोष रंजन
गढ़वा
 
रखेंगें वो आजीवन याद,जिनकी पूरी हुई आज मुराद",जी हां कई ऐसी व्यक्तिगत मन्नतें थीं जिसे पूरा करने के लिए लोग काफी अरसे से कार्यालय का दौड़ लगा रहे थे पर वह अधूरी ही रह रही थी,लेकिन विधायक द्वारा उनकी विवशता को दिली शिद्दत से महसूस करते हुए उनके द्वारा लोगों को कार्यालय दर कार्यालय दौड़ने से रोका गया और एक ही दिन सबके समस्या का निदान एक नए तरीक़े से करने का निर्णय लिया गया,आइये इस खबर के जरिये आपको बताते हैं कि कहां किस तरह और कौन कौन सी समस्या का निदान हुआ।
 
काम हुआ हजार,जब लगा जन दरबार:- बात यहां विधायक की हो रही है तो आपको बता दूं कि वह झारखंड के गढ़वा विधानसभा क्षेत्र के विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी हैं जिनके द्वारा आज कहीं किसी गांव में नहीं बल्कि जिला मुख्यालय स्थित सदर प्रखंड कार्यालय में जन दरबार लगाया गया जहां किसी योजना का चयन नहीं,जहां केवल भाषणबाजी नहीं बल्कि लोगों के उस समस्या का समाधान हुआ जिसके लिए सुदूर गांव के लोग कार्यालय दर कार्यालय का चक्कर लगाया करते थे लेकिन विधायक जी के पहल से एक ऐसे जन दरबार का आयोजन किया गया जहां लोगों के समस्याओं का निदान किया गया,आपको बताऊं की वृद्धावस्था पेंसन,दिव्यांग पेंसन और आवास की तत्क्षण स्वीकृति दिलायी गयी वहीं कई दर्जन की संख्या में मौजूद उन युवाओं के कई प्रमाण पत्र बनवाये गए जो काफी दिनों से कार्यालय की दौड़ लगा रहे थे,प्रखंड कार्यालय में जन दरबार का आयोजन होने से जहां एक तरफ सरकारी कर्मी लोगों की भारी उपस्थिति को व्यवस्थित करते दिखे तो वहीं दूसरी ओर स्वयं विधायक और उनके कार्यकर्ता भी भींड़ को संभालते नजर आए।
 
लिया हूं संकल्प करने का पूरा:- नहीं रहेगा कुछ भी अधूरा,लिया हूं संकल्प उसे करने का पूरा",जी हां इसी पंक्ति के साथ उक्त मौक़े पर लोगों से मुख़ातिब होते हुए अपनी बात शुरू करने वाले विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने कहा कि शुरुआत से ही मैं अपने गढ़वा पर लगे पिछड़ेपन के कलंक को धोने में लगा हूं,क्योंकि मुझे आज भी वह दिन याद है जब गांव से ले कर सुदूर इलाके में जाने के बाद लोग हालात को बताते हुए जार बेजार रो पड़ते थे और विषम बस एक ही बात दुहराया करते थे कि आख़िर कितनी पीढ़ी इस दुर्दिन हालात से गुज़रेगी,क्या हमारे दिन कभी नहीं बदलेंगें ?,उनकी पीड़ा देख खुद का मन भी द्रवित हो जाता था,साथ ही तब और ग्लानि होती थी जब बाहर प्रदेशों में जाने पर लोग पिछड़ा गढ़वा कहते हुए तरह तरह की चर्चाएं किया करते थे,बस यहां के लोगों की पीड़ा को देख और बाहर के उस चर्चा को सुन सुन कर अपने आहत मन ने विचारा की क्यों ना किसी से चिरौरी करने के बजाए खुद के हाथ को सबल बनाऊं ताकि पिछड़ेपन के कलंक को मिटा सकूं,और आज आपलोगों के दिये  आशीर्वाद ने मेरे हाथ को उस लायक बनाया जिससे मैं गढ़वा विधानसभा क्षेत्र के विकास को ले कर संकल्पित हो कर कार्य कर रहा हूं किस हद तक विकास हुआ है यह मुझे बताने और उसकी संख्या गिनाने की जरूरत नहीं है वह आपके आंखों के सामने सदृश्य नुमाया हो रहा है,लेकिन मैं अभी भी संतुष्ट नहीं हूं अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है,जब तलक लोगों के कल के मुरझाए चेहरे पर खुशियां पूर्ण रूप से स्थिर नहीं हो जाती तब तक क्षेत्र को विकसित करता रहूंगा।
 
 

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