Bindash News || अब तो बस "यादें" रह गयीं शेष..
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

Economy

अब तो बस "यादें" रह गयीं शेष..

Bindash News / 06-02-2020 / 2040


हर लम्हा याद आएगा,भला कैसे कोई भूल पायेगा


आशुतोष रंजन
गढ़वा

जो भी जन्म लिया है उसके मरने की तिथि भी तय है लेकिन इसका इल्म होने के बाद भी हमें तब अपार कष्ट होता है जब ससमय नहीं बल्कि हमारे बीच से कोई असमय हमें छोड़ कर चला जाता है,कुछ वैसा ही अपार कष्ट आज हुआ जब हमारे परम मित्र हम सबों को तन्हा कर चले गए।

अब तो बस उनकी यादें रह गयीं शेष:- हम सबों को छोड़ कर चले गए रूपेश,अब तो बस उनकी यादें रह गयीं शेष",हम सभी की चाहत होती है कि हर रोज़ सुबह सुबह कोई सुखद ख़बर मिले,लेकिन शायद ही कभी ऐसा हो पाता है,जैसा कि आज हुआ,सुबह सुबह जगा ही था कि सूचना मिली कि मेरे परम मित्र हमेशा के लिए चिरनिद्रा में सो गए,जी हां आज हमारे मित्र सहृदयी और लाख विपरीत परिस्थिति के बाद भी विचलित नहीं होने वाले रूपेश हम सबों को छोड़ कर चले गए,किसी काम से वो बाहर जा रहे थे कि डालटनगंज से कुछ पहले उनका कार दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है और उस घटना में उनकी मौत हो जाती है,यह ख़बर जैसे ही मिली हमारे साथ साथ उनके हर मित्र और जानने वाले सभी स्तब्ध रह गए,आलम है कि सभी के पांव जहां थे वहीं जड़वत हो गए,किसी के मुंह से कोई बोल नहीं निकल रहा बस सबकी आंखें पूछ रही हैं कि ऐसा कैसे हो सकता है,वो कल ही तो हम सबों के साथ थे,बहुत सारी बातें हुईं थीं,लेकिन आज अचानक उनके ऐसे चले जाने से अब तो बस उनकी यादें ही शेष रह गयीं।

 

भला कोई कैसे भूल पायेगा:- हर लम्हा याद आएगा,भला कोई कैसे भूल पायेगा",जी हां मैं क्या आज रूपेश के हर मित्र का यही कहना है कि साथ गुज़रा हर लम्हा हर क्षण याद आएगा,भला कैसे कोई भूल पायेगा,ऐसे तो उनके व्यवहार के कारण हर कोई उनका मित्र था लेकिन उनके सबसे अभिन्न मित्र युवा तुर्क नेता चंदन जायसवाल कुछ बोल पाने की स्थिति में नहीं हैं,जार बेज़ार रोते हुए वो बस इतना ही कह पा रहे हैं की ऐसा कैसे हो गया भइया,मेरा मित्र मुझे छोड़ कर कैसे जा सकता है,उधर आंखों से अविरल निकलते आंशुओं को रोकने का असफ़ल प्रयास करते उनके एक और निकटतम मित्र पेशे से पत्रकार चंदन कश्यप कहते हैं कि बचपन का साथी ऐसे बीच में साथ कैसे छोड़ सकता है,मित्र का शव सामने होने के बाद भी वो मानने को तैयार नहीं हैं कि मेरा मित्र अब कभी नहीं बोलेगा,चंदन कह रहे कि अरे देर रात तक जगा होने के कारण मेरा मित्र सो रहा है अभी वो उठेगा और हमसे बात करेगा,कहते हुए वो फफक फफक कर रो पड़ रहे हैं,कभी मित्र के चेहरे को तो कभी स्याह नज़रों से सामने देखने वाले युवा व्यवसायी दौलत सोनी कहते हैं कि मित्र तो सैकड़ों में हैं लेकिन रूपेश जैसा मित्र शायद ही कोई हो सकता है,ऐसे तो प्रतिरोज़ मुलाक़ात और बातें होती थीं लेकिन गुज़रे 26 जनवरी को साथ में झंडोत्तोलन करने के बाद बहुत देर तक साथ गुज़रा था हम सबों का,लेकिन क्या पता था अचानक मित्र साथ छोड़ जाएगा,उधर भींड़ में चुपचाप खड़े हो कर रुमाल से आँशु पोछते युवा नेता मनीष कुमार कहते हैं कि भइया ऐसे कैसे हो सकता है,हमसबों का मित्र भला एकाएक साथ कैसे छोड़ सकता है ?

 

मित्रता किसे कहते हैं आज समझ आया,जाने वाले कभी लौट कर नहीं आते यह जानते हुए भी रूपेश के सभी मित्र बस यही कह रहे हैं कि अरे कौन कहता है कि रूपेश की मौत हुई है,ऐसा हो ही नहीं सकता,अरे उसे ऐसे मजाक करने की आदत थी,अभी वो सोया है,बस कुछ ही देर में वो जगेगा और हमसबों से अपने उसी चिरपरिचित अंदाज़ में बोलेगा की कब से तुमलोग यहां खड़े हो यार,क्या हुआ मैं सोया हुआ था,मुझे जगाते,आओ बैठो,चाय यहीं पियोगे या मोड़ की तरफ़ चलें,लेकिन मित्र को कौन बताये की बैठने और चाय पीने वाली वो आवाज़ अब कभी नहीं सुनायी देगी क्योंकि उस आवाज़ को ऊपरवाले ने हमेशा के लिए कर दिया ख़ामोश,अब तो बस मित्र रूपेश की यादें रह जायेंगीं शेष।

Total view 2040

RELATED NEWS