Bindash News || थे जो कल तक "विस्थापित",प्रशासन कर रहा उन्हें "स्थापित"
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

Economy

थे जो कल तक "विस्थापित",प्रशासन कर रहा उन्हें "स्थापित"

Bindash News / 08-02-2020 / 1140


पूरी हो रही उनकी आस,जो कर रहे थे आशियाने की तलाश


आशुतोष रंजन
गढ़वा
 
ना जाने कब पूरी होगी हमारी आस,हम कर रहे कब से आशियाने की तलाश,जी हां यह करुण कसक उन दर्जनों परिवारों की थी जिन्हें बूढ़ा पहाड़ से नीचे लाया गया था,वो उक्त पहाड़ पर किस तरह की ज़िंदगी बसर कर रहे थे और आज ज़मीन पर उन्हें क्या नसीब हुआ आइये आपको इस ख़ास ख़बर के जरिये बताते हैं।
 
वो आज जी रहे जीवन स्वतंत्र:- थे जो कल तलक परतंत्र,वो आज जी रहे जीवन स्वतंत्र",जी हां बूढ़ा पहाड़ पर स्थायी रूप से डेरा जमाए नक्सलियों के चंगुल में रह कर कुछ परिवार परतंत्रता भरी ज़िंदगी जी रहे थे,रोज़ अपार कष्ट से दो चार होने के हालात में उनके द्वारा तो यह आस भी छोड़ दिया गया था कि कभी उन्हें इस परतंत्रता से आज़ादी भी मिलेगी,लेकिन भला हो झारखंड के गढ़वा जिला के सिविल और पुलिस प्रशासन का जिनके द्वारा नक्सल उन्मूलन अभियान को युद्ध स्तर पर जारी रखते हुए नक्सलियों के चंगुल में फंसे हुए परिवारों को छुड़ाया और उन्हें एक स्वतंत्र और बेहतर ज़िंदगी देने की कोशिश की गयी, ज़िलालत भरी जिंदगी से दूर हो कर वो एक सुव्यवस्थित ज़िंदगी बसर करें इस निमित प्रशासन द्वारा क्या क्या प्रयास किये गए आइये अब आपको उससे भी वाक़िफ़ कराते हैं।
 
देर तो हुई पर व्यवस्था दुरुस्त हुई:- थे जब हम पहाड़ पर तो थे बे-ठौर,आया जब जमीं पर तो आज मिला हमें ठौर",जी बिल्कुल जिन्हें कभी अंदाज़ा भी नहीं था कि उन्हें नक्सलियों की परतंत्रता से आज़ादी मिलेगी और उनके पांव जो पत्थरों से ठोकर खा रहे हैं वो पांव ज़मीन पर भी आयेंगें,पर उनका यह दिवास्वप्न सच साबित हुआ और आज जब उन्हें जिला प्रशासन द्वारा निर्मित कराया हुआ पक्के का घर सुपुर्द कराया गया तो वो ख़ुश ही नहीं बल्कि उम्मीद से ज़्यादा ख़ुशी मिलने के कारण भावुक हो उठे,भावुकता के उस क्षण में जब उनसे पूछा तो उनके द्वारा सीधे रूप में यही कहा गया कि ना जाने किस अंधेरे में थे हम सभी,बाहर की दुनिया में इतना उजाला भी है यह अब ज्ञात हुआ,साथ ही कहा कि हम अपने उन साथियों से भी कहना चाहेंगे कि वो भी हमारी तरह उस जिलालत भरी ज़िंदगी को छोड़ कर लौट आएं,वह रास्ता कितना कंटीला और कष्टभरा है इसका अहसास हमें भी है और उन्हें भी,इसलिए अब वक्त आ गया है कि वो उस रास्ते को छोड़ कर इस राह का वरण करें,इसके साथ ही साथ उनके द्वारा कहा गया कि कुछ लोगों द्वारा यह कह कर बरगलाया जाता है कि सरकार और प्रशासन मुख्य राह से जुड़ने पर सहयोग करने का केवल वादा करती है,जबकि ऐसा नहीं है,आज देखिये हम सभी परिवार अब विस्थापित नहीं कहलायेंगे क्योंकि प्रशासन ने हमें हर सुविधा दे कर स्थापित करा दिया,यहां हम बता दें कि बूढ़ा पहाड़ से लाये गए परिवारों में से 15 लोगों का आज जिला प्रशासन द्वारा समारोह आयोजित कर मदगड़ी गांव में निर्मित पक्के मकानों में गृह प्रवेश कराया गया,साथ ही उन्हें घर में ज़रूरत वास्ते बर्तन,कपड़े सहित सारे सामान भी दिए गए,और जो लोग बाकी रह गए उन्हें ज़मीन का पट्टा देते हुए जिलाधिकारी द्वारा जल्द घर बनवाने की बात कही गयी।
 
वहीं हुए कई अन्य संस्कार:- जहां ले रहा था योजना आकार,वहीं हुए कई अन्य संस्कार",विस्थापित परिवार को उनके लिए बनाए गए घरों में स्थापित करने के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम में जहां कई योजनाएं आकार ले रही थीं वहीं दूसरी ओर कई संस्कार भी कराये गए,आपको बताएं कि गोदभराई रश्म के साथ साथ बच्चों का अनपरासन्न संस्कार भी संपन्न कराया गया,आज तलक केवल वादों,जुमलों को सुन और हर बार दिए जाने वाले आश्वासनों के जरिये आस देखने वाले इस सुदूर नक्सल प्रभावित गांव के लोगों के पनाह में जब एक साथ इतने सारे कार्यक्रम हुए तो वो अभिभूत हुए बिना नहीं रह सके,तभी तो उन्होंने भी खुद के पास आये अतिथियों का सहृदय सत्कार भी किया,जहां एक तरफ़ कार्यक्रम स्थल से कुछ पहले ही अपनी भेषभूषा में युक्त आदिवासी महिलाओं द्वारा पारंपरिक रिवाज़ों के जरिये स्वागत किया गया,स्वागत से ले कर कार्यक्रम की समाप्ति तक ग्रामीणों की भावुक नज़रें यह जता रही थीं कि आशा के अनुरूप नहीं बल्कि उन्हें जो आज मिला वो उम्मीद से कहीं ज़्यादा है।
 
करनी है हमें पूर्ण विकास:- नहीं धरानी है कोरी आस,करनी है हमें पूर्ण विकास",आयोजित कार्यक्रम में इसी पंक्ति के साथ अपने संबोधन की शुरुआत करने वाले जिला उपायुक्त हर्ष मंगला ने कहा कि आपको महसूस हो रहा होगा कि बहुत देर हो गया,जबकि प्रशासन कभी हाथ पर हाथ धरे बैठा नहीं था,ज़मीनी कार्य शुरू करने से पूर्व कई कागज़ी प्रक्रिया होती हैं जिन्हें पूरी करनी होती हैं,और जैसे ही सारे कागज़ात पूरे हुए आप खुद अंदाज़ा लगाइये ज़मीन पर कार्य पूरे करने में कितने दिन लगे,हां इस बात का हमें भी दिल से इल्म है कि आप क्यों हड़बड़ा रहे थे,अब आपको तनिक भी विचलित नहीं होना है,बहुत हद तक कार्य पूरे हो गए हैं और कुछ करने अभी बाकी हैं,आपके इस गांव को पूर्ण रूप से विकसित करना और आपको स्वरोजगार से जोड़ते हुए आय के स्रोत का साधन उपलब्ध कराना हमारा अंतिम लक्ष्य है जिसे हम ससमय हासिल कर लेंगें।
 
लगाना है पूर्ण विराम:- केवल विराम नहीं,बल्कि लगाना है पूर्ण विराम",जिले को अपराध के साथ साथ नक्सलवाद के कोढ़ से पूरी तरह निज़ात दिलाने के लिए एक टीम वर्क के रूप में प्रयासरत एसपी अश्विनी सिन्हा ने लोगों से मुख़ातिब होते हुए कहा कि जिस तरह कागज़ पर कुछ लिख कर हम पूर्ण विराम लगाते हैं ठीक उसी तरह गढ़वा के सरजमीन से नक्सलियों का समूल ख़ात्मा कर गढ़वा पुलिस पूर्ण विराम लगाएगी,साथ ही कहा कि इस महत्वपूर्ण अभियान की सफ़लता में आप सबों का सहयोग भी अपेक्षित है।
 
इनकी भी रही मौजूदगी:- कार्यक्रम में उपायुक्त और आरक्षी अधीक्षक के साथ साथ सीआरपीएफ 172 बटालियन के कमांडेंट आशीष कुमार झा,अपर समाहर्ता प्रवीण गागराई,एएसपी सदन कुमार,अनुमंडल पदाधिकारी रंका संजय कुमार पांडेय,सिविल सर्जन डॉक्टर एन के रजक,जिला कल्याण पदाधिकारी सुभाष कुमार,जिला जनसंपर्क पदाधिकारी अरुण उरांव,सामाजिक सुरक्षा गढ़वा निदेशक पीयूष,प्रखंड विकास पदाधिकारी बड़गढ़ विपिन भारती,अंचलाधिकारी भंडरिया सुलेमान मुंडारी सहित कई अधिकारी एवं अन्य लोग मौजूद रहे।
 

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