Bindash News || हे राम...ये कैसी "राजनीति"
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

Economy

हे राम...ये कैसी "राजनीति"

Bindash News / 12-02-2020 / 926


बदल रही है धारा,नहीं रही कोई विचारधारा


आशुतोष रंजन
गढ़वा

हमने तो देखा नहीं लेकिन जितना पढ़ा और सुना है उसके अनुसार कालांतरी राजनीति साफ़ और स्वच्छ होती थी साथ ही तब के राजनेता एक विचारधारा वाली राजनीति किया करते थे,पर अब की राजनीति जिसे हम आप सदृश्य देखने के साथ साथ उससे हर पल दो चार हो रहे हैं,कितना बदला है विचार और किस वेग से बह रही विपरीत धारा इस ख़बर के जरिये बताते हैं।

नहीं रही कोई विचारधारा:- बदल रही है धारा,नहीं रही कोई विचारधारा",जिस तरह धारा के विपरीत बहने से नदी का पानी प्रलय ले आता है ठीक उसी तरह वर्तमान राजनीति की बदली विचारधारा की तुलना भी हम विनाशकारी बाढ़ से कर सकते हैं,यहां हम कहें कि दोनो में नुक़सान ही हो रहा है तो ऐसा कहना बेमानी नहीं होगा,क्योंकि एक वह वक्त था जब राजनीति के बड़े पदों पर आसीन राजनेता एक पार्टी और एक ही झंडा को हाथ में लिए सारी उम्र गुज़ार दिया करते थे,पार्टी की स्थिति अनुकूल रहे या प्रतिकूल उनके विचार पार्टी हित में ही समाहित रहते थे,पर वर्तमान दौर की राजनीति तो विचार बदलने की पराकाष्ठा को भी पार कर गया,जहां राजनीति में ना तो कोई राज रहा और ना ही कोई नीति रही,ज़्यादा शब्दों से परिभाषित ना करते हुए सीधे शब्दों में कहें तो अब के राजनेता घर से सुबह निकलते वक्त किसी और पार्टी के नेता होते हैं लेकिन जब उनकी देर रात घर वापसी होती है तो उनकी गाड़ी में किसी और ही पार्टी का झंडा लगा होता है,मतलब की पहले के राजनेता एक दिन,एक माह और एक साल कौन कहे पूरी जिंदगी एक पार्टी के लिए होम कर देते थे पर अब तो सुबह जिस पार्टी को जिंदाबाद रखने की बात दुहराते हैं,शाम में उसी को बर्बाद करने की वक़ालत करते नज़र आते हैं,तभी हमने कहा की नहीं रही कोई धारा,तेज़ी से हर पल बदल रही है विचारधारा।

 

हे राम ये कैसी राजनीति:-राजनीतिक विश्लेषक और नज़दीक के साथ दूर से भी थोड़ी बहुत राजनीति में रुचि रखने वाले लोग भी वर्तमान राजनीति को नज़र करते हुए बस यही कहते सुने जा रहे हैं कि न राज है न नीति,हे राम ये कैसी राजनीति,क्योंकि वो प्रतिरोज़ नहीं बल्कि प्रतिक्षण देख रहे हैं कि कैसे किसी पार्टी के अंचलीय नेता से ले कर राज्य की राजधानी में पार्टी के शिरमौर कहे जाने वाले पदधारी नामवर राजनेता भी खुद के साथ साथ पूरी पार्टी की आहुति देते हुए दूसरे पार्टी का दामन थाम रहे हैं,ऐसे में क्या यह कहना गलत होगा कि नैतिकता की दुहाई देने वाले वैसे राजनेता सीधे रूप में जनता को ही बेवकूफ़ बना रहे हैं।

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