Bindash News || आम हों या ख़ास,"बजट" ने नहीं दिलाया किसी को फ़ायदे का "अहसास"
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

Economy

आम हों या ख़ास,"बजट" ने नहीं दिलाया किसी को फ़ायदे का "अहसास"

Bindash News / 04-03-2020 / 338


सरकार है किसके साथ,पूछ रहे "सत्येन्द्रनाथ"


आशुतोष रंजन
गढ़वा
 
झारखंड की वर्तमान हेमंत सरकार का आज बजट पेश हुआ,जहां सत्तापक्ष द्वारा बजट की सराहना की जा रही है,वहीं विपक्ष द्वारा बजट को पूरी तरह से झूठा दिलाशा बताया जा रहा है,आख़िर ऐसा क्यों और किसने ऐसा कहा आइये आपको बताता हूं।
 
पूछ रहे सत्येन्द्रनाथ:- सरकार है किसके साथ,पूछ रहे सत्येन्द्रनाथ",जी हां भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष सह गढ़वा के पूर्व विधायक सत्येन्द्रनाथ तिवारी ने कहा कि बजट में वैसी कोई भी घोषणा नहीं दिख रही है जिसमें मुख्यमंत्री द्वारा चुनाव के समय की गई घोषणा के पूरे होने के संकेत मिले,बेरोजगारों को नौकरी की तो बात दूर बजट में तो पकौड़े तलने तक कि भी कोई व्यवस्था नही दी गई है,चुनाव से पहले झामुमो ने युवाओं को पांच हजार महीना देने का वायदा किया था,वह भी पूरी तरह से छलावा साबित हुआ है,किसान जिस आशीर्वाद  योजना के तहत साहूकारों के पास से ऋण लेने से बच रहे थे,पर अब उन्हें खेती वक्त हाथ पसारने की नौबत आएगी,ज़िले में कोल्ड स्टोरेज स्थापित करना एक अच्छी बात है,लेकिन प्रत्येक जिले में दो कोल्ड स्टोरेज में सक्रिय रहना कृषि उत्पादन पर निर्भर करेगा,जिस निमित इस बजट में कोई प्रावधान नहीं किया गया है,कोल्ड स्टोरेज को संचालित करने में बिजली की जरूरत होगी,पर यहां बिजली की समुचित व्यवस्था नहीं होने से किसान उक्त कोल्ड स्टोरेज से लाभान्वित नहीं हो पाएंगे,हां यह बात जरूर है कि नेताओं के अपने मंसूबे जरूर सफल होंगें,बात अगर शिक्षा की करें तो प्रत्येक जिले में सिर्फ एक शिक्षण संस्थान को गुणवत्तापूर्ण बनाने की बात करना यह साबित करता है कि शेष शिक्षण संस्थान सिर्फ मध्यान्ह भोजन तक ही सीमित रहेंगे,इस बजट से सबसे ज्यादा जिन्हें निराशा हुई है,वो पारा शिक्षक,सेविका सहायिका सहित वो सभी हैं जो कम मानदेय पर बहाल हुए हैं,जिन्हें चुनाव में भी महागठबंधन के नेताओं द्वारा सब्ज़बाग दिखाया गया था,वहीं सरकार बनते ही इनलोगों ने भी खुद के स्थायी हो जाने का हसीन ख़्वाब देखा,पर उनका ख़्वाब तो पूरी तरह से दिवास्वप्न यानी दिन में देखा जाने वाला वह सपना साबित हुआ जो कभी पूरा नहीं होता,साथ ही साथ कहा कि आम हों या ख़ास,इस बजट ने नहीं दिलाया किसी को फ़ायदे का अहसास।
 

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