Bindash News || मज़दूरों को खेला कर "डोल्हापाती", खा रही सरकार "भाजी-चपाती"
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

Economy

मज़दूरों को खेला कर "डोल्हापाती", खा रही सरकार "भाजी-चपाती"

Bindash News / 17-04-2020 / 466


जब मिल नहीं रही सहायता तो काहे का हेल्प लाइन नंबर:सत्येंद्र नाथ


आशुतोष रंजन
गढ़वा

वैश्विक महामारी कोरोना के मद्देनजर जहां एक तरफ़ उनके द्वारा अभावग्रस्त लोगों को खाद्य सामग्री दे कर मदद पहुंचायी जा रही है वहीं दूसरी ओर लॉक डाउन का अनुपालन के लिए जागरूक भी किया जा रहा है,लेकिन उनकी कसक यह है कि जो मजदूर बाहर के प्रदेशों में फंसे हुए हैं उनके बावत सरकार द्वारा कोई सुध नहीं लिया जा रहा है,हम बात यहां भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष सह पूर्व विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी की कर रहे हैं,उनका कहना है कि इस संकट की घड़ी में झारखंड के हमारे लाखों मजदूर भाई दूसरे प्रदेशों में फंसे हुए हैं,वो झारखंड सरकार से मदद की उम्मीद लगाए बैठे हुए हैं लेकिन राज्य सरकार उनका उपहास उड़ाते हुए उनके उम्मीदों पर पानी फेर रही है।

तब काहे का हेल्प लाइन नंबर:-जब मिल नहीं रही सहायता,तब काहे का हेल्प लाइन नंबर, जी हां पूर्व विधायक ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा गरीब मजदूरों को मदद करने के लिए पूर्व में हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया था जोकि हाथी का दांत साबित हुआ है। इसके माध्यम से गरीबों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया। अब पुनः सरकार प्रवासी मजदूरों के लिए झारखंड कोरोना सहायता ऐप लॉन्च करके मामले को उलझाने का प्रयास कर रही है,पूर्व में जारी हेल्पलाइन नंबर की तरह ही वर्तमान में लांच किए गए ऐप की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए कहा कि सरकार मजदूरों की मदद करने के बजाय गुमराह करने का प्रयास कर रही है। जिससे प्रतीत होता है कि सरकार गरीब मजदूरों को डोल्हा-पाती खेला रही है,झारखंड सरकार से आग्रह करते हुए कहा कि सरकार अविलंब 24 घंटे के भीतर सरल प्रक्रिया अपनाते हुए रोजगार की तलाश में बाहर गए मजदूरों को 5000 रुपए की राशि उनके खाता में ट्रांसफर करवाए एवं उनके आश्रित परिवारों को भी आर्थिक सहयोग करे ताकि ऐसे लोग लॉक डाउन की स्थिति में भरण पोषण करने में सक्षम हो सकें,पूर्व विधायक ने कहा कि यह संकट का समय है। ऐसे समय में राजनीति ना करते हुए राज्य सरकार को सेवा भाव का परिचय देना चाहिए ताकि दूसरे प्रदेशों/जिलों में फंसे मजदूरों के मन में व्याप्त भय को समाप्त किया जा सके तथा उन्हें समय रहते सहायता पहुंचाया जा सके।

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