Bindash News || नाम "श्री कृष्ण", पर हालत "सुदामा" वाली
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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नाम "श्री कृष्ण", पर हालत "सुदामा" वाली

Bindash News / 14-09-2018 / 1009


बाहर से ठाठ बाट,अंदर से मोकामा घांट
 
आशुतोष रंजन
गढ़वा
 
नाम श्री कृष्ण पर हालत सुदामा वाली,जी हां कुछ ऐसे ही हालात से गुजर रहा गढ़वा का अनुमंडलीय पुस्तकालय,जहां और सुविधा को परे रखें तो वह उपयुक्त पुस्तक से महरूम है,आइये इस खबर के जरिये जानिए उसके हालात
 
अंदर से मोकामा घांट:- एक बहुत मशहूर कहावत है कि बाहर से ठाठ बाट और अंदर से मोकामा घांट,यानी बाहर से कुछ पर अंदर से कुछ और,कुछ यही स्थिति है श्री कृष्ण अनुमंडलीय पुस्तकालय की जिसका भवन तो लकदक है पर वह व्यवस्था से कोसो दूर है,वह है तो पुस्तकालय पर उस पुस्तक से कोसो दूर है जो पढ़ने वाले युवाओं को फायदा पहुंचा जाए,अपने जिला मुख्यालय में पुस्तकालय होने के लिहाज से शहर के साथ साथ गांव तक से आने वाले छात्रों को यहां निराशा ही हांथ आती है क्योंकि उन्हें चाहने के बाद भी वह पुस्तक हांथ नहीं आता जिससे उन्हें कुछ लाभ होता,इसलिए आज उक्त पुस्तकालय आने वाले छात्र सभी तरह के प्रतियोगी पुस्तक उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।

हो जाते हैं मजबूर:- आते हैं बहुत दूर से,पर हो जाते हैं मजबूर,घर और कहीं बाहर के कोलाहल दूर कोई अकेला तो कोई सामूहिक रूप से पुस्तकालय में बैठ कर अध्ययन कार्य किया करता है पर यहां की अंदरूनी व्यवस्था के कारण उनकी सोच कुंठित हो जा रही है,कारण की जरूरी किताबों से दूर पुस्तकालय अन्य सुविधाओं से भी महरूम है,यहां आने वाले छात्र बताते हैं कि उन्हें तो कभी कभी मोबाइल की रौशनी में पढ़ायी करनी पड़ती है क्योंकि पुस्तकालय में हर वक्त बिजली नहीं रहती,ऐसे में पढ़ पाना यहां बहुत मुश्किल हो रहा है।
 
मेरा तो काम है देखना,बस देख रहा हूं:- उधर पुस्तकालय का देखरेख करने वाला भी स्वीकारता है कि कमी से जूझ रहा है पुस्तकालय,जहां एक तरफ पढ़ने लायक जरूरी किताब नहीं है वहीं बिजली भी एक बड़ी परेशानी है।
 
एक तरफ राज्य के हर जिलों में पूर्व से स्थापित पुस्तकालय को पुनर्स्थापित कर छात्रों को बेहतर सुविधा देने को खुद को संकल्पित बताती सरकार उधर सुविधा के साथ साथ माकूल पुस्तक से दूर पुस्तकालय,ऐसे हालात को देख मन बरबस बोल पड़ता है कि "हमने देखे तुझे शपथ लेते बहुत,काश कभी बदले हालात भी नज़र आ जाते ?
 
 

 

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