Bindash News || टूट रही है हर "आशा",नहीं रहा मजदूरों का "सरकार" पर भरोसा
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

Economy

टूट रही है हर "आशा",नहीं रहा मजदूरों का "सरकार" पर भरोसा

Bindash News / 10-05-2020 / 331


हैं बहुत वो मजबूर जो दूर प्रदेशों में हैं मजदूर:सत्येंद्र नाथ


आशुतोष रंजन
गढ़वा

लॉक डाउन के कारण बाहर सुदूर प्रदेशों में फंसे मजदूरों को लाने के लिए सरकार के पहल के बाद मजदूरों में घर लौट जाने की आस जगी थी,कुछ लोग लाये भी गए लेकिन अभी भी हजारों की संख्या में लोग फंसे हुए हैं जिनकी आस प्रतिक्षण टूट रही है,उक्त बातें गढ़वा-रंका विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने कही,उनका कहना है कि वैश्विक महामारी कोरोना के कारण देशव्यापी लॉक डाउन की स्थिति में झारखंड के लाखों मजदूर देश के कोने कोने में फंसे हुए हैं,उनके सामने कई विकट समस्या है,जिसका निदान कर पाने में राज्य सरकार विफल है, राज्य सरकार प्रवासी मजदूरों को सिर्फ आश्वासन देने का काम कर रही है,जिसके कारण सरकार प्रवासी मजदूरों का विश्वास खो रही है,अपना जिला गढ़वा का उदाहरण देते हुए कहा कि इतने दिन गुजर जाने के बाद भी करीब 100000 प्रवासी मजदूरों में से मात्र 3000 मजदूर को ही सरकार वापस ला पाई है,ऐसे में मजदूरों की वापसी की गति काफी धीमी होने की वजह से प्रवासी मजदूरों का राज्य सरकार पर से भरोसा उठना स्वभाविक है,अधिकांश मजदूर हजार किलोमीटर से अधिक की दूरी पैदल तय कर घर वापसी के लिए व्याकुल हैं,इससे उन्हें रास्ते में भी कई यातना सहने के अलावा संक्रमित होने का भी खतरा बना हुआ है,उन्होंने मजदूरों के साथ हो रही असुविधा/यातना के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार मानते हुए ढकोसला बाज सरकार की संज्ञा दी है और कहा है कि सरकार सिर्फ हेल्पलाइन नंबर, कोरोना सहायता एप,प्रवासियों की घर वापसी संबंधित वेबसाइट जारी कर प्रवासियों को गुमराह कर रही है,सरकार द्वारा जारी वेबसाइट के बारे में भी लगातार शिकायतें आ रही हैं कि यह खुलता ही नहीं है,जो लोग निबंधन करा भी लिए हैं,काफी इंतजार के बाद भी सरकार द्वारा कोई पहल न होता देख उनका भी धैर्य जवाब दे रहा है,पूर्व विधायक ने कहा कि राज्य सरकार के पास प्रवासी मजदूरों के बारे में कोई ठोस कार्य योजना नहीं है,सरकार की विफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रवासियों को लाना तो दूर की बात,अभी तक प्रवासियों की संख्या का सही आकलन करने में भी राज्य सरकार फेल है,उन्होंने राज्य सरकार से मांग करते हुए कहा है कि सरकार सभी वापस आ रहे प्रवासियों के लिए बेहतर चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराए एवं क्वॉरेंटाइन सेंटर में रखे हुए सभी प्रवासी मजदूरों को मानक के अनुरूप खाना एवं रहने की व्यवस्था मुहैया कराये,साथ ही साथ हर हाल में बाहर से लौट रहे प्रवासियों को प्रशासन अपनी निगरानी में एक निश्चित अवधि तक क्वॉरेंटाइन सेंटर में रखे,निश्चित अवधि समाप्त होने के बाद ही उन्हें घर जाने की इजाजत दे,ऐसा करके ही झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रमण के फैलाव को रोका जा सकता है,उन्होंने पैदल,साइकल या अन्य किसी अपनी व्यवस्था से गढ़वा आ रहे सभी प्रवासियों से अपील करते हुए कहा कि गढ़वा आने पर सबसे पहले खुद की सूचना जिला प्रशासन को दें ताकि सभी लोगों के लिए क्वॉरेंटाइन की बेहतर व्यवस्था की जा सके,उन्होंने प्रवासियों से कहा है कि कोई भी बिना क्वॉरेंटाइन अवधि पूरा किए बगैर अपने घर ना जाएं क्योंकि ऐसा करके ही आप खुद को,अपने परिवार और समाज को बचा सकते हैं।

Total view 331

RELATED NEWS