Bindash News || स्वामी के साथ लक्ष्मी जी लाइन हाज़िर
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

Economy

स्वामी के साथ लक्ष्मी जी लाइन हाज़िर

Bindash News / 31-08-2020 / 566


लापरवाही बर्दाश्त नहीं करते हैं बड़ा साहब


आशुतोष रंजन
गढ़वा

अक्सर हम आप देखते आये हैं कि स्टेज पर प्ले होने वाला ड्रामा एक निश्चित अवधि में समाप्त हो जाता है,लेकिन झारखंड के गढ़वा में नेपथ्य से शुरू हुआ ड्रामा कल रंगमंच पर सुबह से देर रात तक प्ले होता रहा,ख़ैर आज उसका पटाक्षेप हो गया यानी अब परदा भले गिर गया पर उक्त ड्रामा उस सवाल को एक बार फिर से अनुत्तरित कर दिया,आख़िर उस ड्रामे में क्या कहानी था,और कौन थे उसके नायक,साथ ही डायरेक्टर ने किस तरह उसका पटाक्षेप किया आइये आपको बताते हैं।

खुद उलझे,दूसरों का मामला सुलझाने वाले:- हम आप सभी लोगों के सामने जब कोई उलझनें आती हैं तो उसे सुलझाने हम पुलिस थाना पहुंचते हैं,कभी मामला उनके हस्तक्षेप से सुलझता है तो कभी और उलझ पड़ता है,लेकिन जब औरों के मामले को सुलझाने वाले ही उलझ पड़ें तो आप क्या कहेंगें,कुछ ऐसा ही हुआ गढ़वा में जहां शहर थाने में थाना प्रभारी और उनके अधीनस्थ सहकर्मी एक अदना जवान से उलझ पड़े,दरअसल हम इसी ड्रामे की बात अपने इस लेख में कर रहे हैं,आपको बताएं कि रमेश उरांव नाम का वह जवान पिछले कई दिनों से घर जाने को ले कर छुट्टी मांग रहा था,वह हनीमून मनाने के लिए नहीं बल्कि अपने सगे बहनोई के श्राद्धकर्म में शामिल होने के वास्ते छुट्टी चाह रहा था,लेकिन उसे अनुमति नहीं मिल रही थी,हर रोज़ चिरौरी करने वाला रमेश कल भी इस आस में थाने पहुंचा की शायद आज उसे छुट्टी मिल जाये पर उसे क्या इल्म था कि आज उसे छुट्टी की जगह अपमान की घुटी मिलेगी,अपमान कहने का मायना यह है कि छुट्टी मांगना रमेश को काफी महंगा पड़ा क्योंकि थाना प्रभारी लक्ष्मीकांत और उनके सहकर्मी स्वामी रंजन ओझा द्वारा उसके साथ मारपीट की गयी,छुट्टी मांगने के सवाल पर दोनो इस कदर बिफरे की उनके द्वारा की गयी पिटायी ने रमेश को जिला अस्पताल में इलाज़रत कर दिया।

 

स्टेज पर प्ले होने लगा:- नेपथ्य से शुरू हुआ ड्रामा स्टेज पर प्ले होने लगा",जी हां मारपीट की शुरुआत वाली घटना तो नेपथ्य में घटी लेकिन उसकी जानकारी जैसे ही पुलिस मेंस एसोसिएसन को हुई,लोग थाने पहुंचे और फिर ड्रामा स्टेज पर सामने प्ले होने लगा,अपने साथी जवान के साथ हुई घटना को ले कर जवान उबलने लगे,वो थाना प्रभारी और सहकर्मी यानी एएसआई के विरुद्ध कार्रवाई और प्राथमिकी को ले कर डट गए,उधर उबाल को शांत करने के लिए मुख्यालय डीएसपी दिलीप खलको एवं मेजर आनंद राज घंटों जुटे रहे,पर जवानों को सह निर्देशक नहीं बल्कि निर्देशक के बातों पर ही एतबार था,इस गुज़रते पल ने दिन के बाद शाम ले लाया,और शाम क्या हुई कम वोल्टेज के ड्रामे ने हाई वोल्टेज का रूप अख़्तियार कर लिया,आख़िरकार रात में खुद पुलिस कप्तान श्रीकांत सुरेश राव थाने पहुंचे,और कुछ देर की वार्ता के बाद तब जा कर उलझा मामला सुलझा,और ड्रामा वाले स्टेज का पर्दा गिरा,उधर एसपी द्वारा अस्पताल पहुंच घायल जवान का हाल जानने के साथ साथ उससे बात भी की गयी।

दारोगा जी हो गए लाइन हाज़िर:- अव्यवस्थित को व्यवस्थित करने को किये गए थे हाज़िर,पर हुआ उनसे कुछ ऐसा की दारोगा जी हो गए लाइन हाज़िर",बिल्कुल इसमें कोई दो राय नहीं कि थाना प्रभारी रमोद सिंह के तबादले के बाद कुछ दिन तक एक सुलझे हुए प्रभारी की ख़ोज करने के उपरांत ही तार्किक सोच वाले एसपी द्वारा लक्ष्मीकांत को शहर थाने का प्रभार दिया गया था,यह कहने में भी कोई गुरेज़ नहीं होनी चाहिए कि उन्होंने अपने कार्यक्षमता से कई महत्वपूर्ण मामलों का सफल अनुसंधान किया और सफ़लता पायी,कप्तान भी खिलाड़ी की प्रतिभा को देख कर ख़ुश हुए पर उन्हें क्या इल्म था कि उनकी खुशी क्षणभंगुर साबित होगी,क्योंकि बाउंसर बॉल को भी हुक कर बाउंड्री पहुंचाने वाले खिलाड़ी द्वारा ड्रेसिंग रूम के अनुशासन को तोड़ दिया जाएगा,हुआ भी कुछ ऐसा ही,दूसरों के मामले को सुलझाने वाले थाना प्रभारी अपनों से ही उलझ पड़े,नतीज़ा हुआ कि लाइन हाज़िर कर दिए गए।

Total view 566

RELATED NEWS