Bindash News || जहां सबका है "दिल" मिला, है वह "गढ़वा" जिला
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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जहां सबका है "दिल" मिला, है वह "गढ़वा" जिला

Bindash News / 20-09-2018 / 891


 ना हो कोई ग़मज़दा,बस हर्षित रहें लोग सदा:हर्ष
 ज़बान कहता रहे आपसी मिल्लत की कहानी:शिवानी
 
आशुतोष रंजन
गढ़वा
 
गढ़वा जिले में हर साल की तरह इस वर्ष भी मुहर्रम शांतिपूर्ण माहौल में बसर कर जाए इस निमित जिला प्रशासन के साथ पुलिस प्रशासन पूरी कवायद में जुटी हुई है,लेकिन गढ़वा के लोग क्या कहते हैं जानने के लिए पढ़िए यह रिपोर्ट-
 
हम कहां फ़रिक होते हैं:- शामिल होते हैं ईद की ख़ुशी में,मुहर्रम के मातम में शरीक होते हैं,रहते हैं हम एक सदा,कहां कभी फ़रिक होते हैं",जी हां यह अल्फ़ाज़ है गढ़वा के उन लाखों लोगों का जो एक संस्कृति और एक तहज़ीब के दायरे में रह कर जीवन बसर करते हैं,तो आइए आज एक बार फ़िर से उसी पुराने शपथ को दुहराते हैं कि कल भी एक थे,हैं आज एक और कल भी एक रहेंगें।
 
धर्म इंसानियत का निभाते हैं:- वो लगाते हैं ईद में गले,हम दशहरे में घर को जाते हैं,हम और कोई मज़हब नहीं,बस धर्म इंसानियत का निभाते हैं",जी हां कुछ इन पंक्तियों को दुहराते हुए जिले के मुसलमानों ने कहा कि दशकों से जिले में कायम गंगा जमुनी तहज़ीब को कभी भी ठेस ना पहुंचे इसकी कोशिश हमदोनों की ओर से बराबर रहती है,जहां हिन्दू भाई हमारे ईद में शामिल हो कर हमें मुबारकबाद देते हुए हमारी ख़ुशियों को दुगुनी कर देते हैं वहीं हम उनके दशहरा में शरीक हो कर उन्हें बधाई देते हैं,साथ ही रामनवमी में मुहर्रम कमेटी को सम्मानित करना तो मुहर्रम में रामनवमी समिति को सम्मान देना एक ऐतिहासिक रिवाज़ के रूप में क़ायम हो चुका है,इसलिए आज एक बार फ़िर से हम अपने उसी हल्फ़ को दुहार रहे हैं कि "हैं आज हम भले मातमी मुहर्रम में ग़मज़दा,पर कायम रहे मिल्लत अपनी,रहेगी कोशिश यही सदा।"
 
कह रहीं शिवानी:- ज़बान कहता रहे बस आपसी मिल्लत की यही कहानी,कह रहीं एसपी शिवानी",मुहर्रम को शांतिपूर्ण माहौल में गुजारने को ले कर पुलिसिया व्यवस्था के साथ क़वायद में जुटीं एसपी कहती हैं कि गढ़वा के बारे में जितना जान पायी हूं उससे यही ज्ञात हुआ है यहां लोग मज़हब से भले अलग हैं पर मन से एक हैं,एक दूसरे के पर्व-त्योहार में शरीक हो कर उसे सौहार्दपूर्ण माहौल में गुजारना यहां की पुरानी परंपरा रही है,ऐसे में बस यही कहना है कि "ना आवे कहीं से कुछ आवाज,निभता रहा है,और निभता रहे बस मिल्लत वाला रिवाज़।"
 
हर्षित रहें लोग सदा:- ख़ुश रहें हर चेहरे,ना हो कभी कोई ग़मज़दा,कह रहे डीसी हर्ष यही,बस हर्षित रहें लोग सदा",जी हां इसी पंक्ति के साथ गढ़वा में सभी के आपसी सौहार्द भाव का दिल से इस्तक़बाल करते हुए उपायुक्त कहते हैं कि राज्य में कई ऐसे जगह हैं जहां प्रशासनिक अधिकारियों को पर्व त्योहार को शांत माहौल में गुजारने को ले कर कठिन परिश्रम करनी पड़ती है,पर गढ़वा एक ऐसा जिला है जहां कहने को लोग जिस्मों से जुदा हैं पर वो दिल से जुड़े हैं,जहां लोग खुद से पहल करते हुए और एक साथ मिल कर रामनवमी के अखाड़े को गुजारते हुए संपन्न कराते हैं,वहीं दूसरी ओर मुहर्रम में ताजिये और निशान को रास्ता देते हुए मैदान-ए-कर्बला में पहलाम कराते हैं,इसीलिए तो मन बरबस बोल पड़ता है कि "मिलता रहे सबों को गढ़वा से यही पैग़ाम,सबके मन में रहीम हैं,हैं सबके दिलों में राम।"

 

 

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