Bindash News || बबुआ देखत रहले ह ग़ुलाबी,आउ हो गईले लाल
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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बबुआ देखत रहले ह ग़ुलाबी,आउ हो गईले लाल

Bindash News / 16-12-2020 / 571


ई बिहार नाहीं झारखंड ह


हम आशुतोष
गढ़वा से

बबुआ के त जा झार के गावे के आदत लागल रहे,साथे साथे गांव जवार में केहू के कुछुओ बोल के मन बढ़ल रहल हा,त एहिजो सोचले की हम आपन गलिये में बानी,आउ लईकी देख के उनकर बोली निकले लागल,लेकिन एहिजा त उ निकले नाहीं परले,आउ बाझ गईले,फेरु का भईल,आयीं बतावत बानी।

आउ होइ गईले लाल
:- बबुआ देखत त रहले ह ग़ुलाबी,लेकिन होइ गईले लाल",एतना पढ़ के त रावा सब नाहीं समझब,कहब की का बुझवनी बुझावत बाड़े,त आयीं हम बतावत बानी,बात ई बा कि आपन गढ़वा शहरिया में एगो बिआह रहल ह,ओहि में हितई में कुछ नवही आईल रहले,सांझ लुपलुपात रहे,त कुछ लड़िका लोग पान खाये मोड़ पर अईले,त कुछ उमर के दोष त कुछ जहवां से आईल रहले उहां के भी दोष,लईकी देख के टोन मारे लगले,बड़ा निक लागत बिया रे,देख न रे पूरा ग़ुलाबी हिय,अपना हिसाब से उ लोग लाइन राइट मारत रहले ह,लेकिन उ लोगन के ना बुझाईल की उ लोग एकदमे से रॉन्ग बाड़े,अब नतीज़ा भईल की पुलिस उ लोग के धर लिहलस,आउ ओकरा बाद का भईल ई त अब बतावे के ज़रूरी नईखे बुझात,ऐहि से हम कहनी की देखत रहले ह ग़ुलाबी,होइ गईले लाल।

त सोचत बाड़े की आपन घरहीं के बाड़ी लईकी आउ मेहरारू:- आ के बिहार से जब उ पियत बाड़े दारू,त सोचत बाड़े की आपन घरहीं के बाड़ी लईकी आउ मेहरारू",का हम ठीक नईखी कहत का,रउआ सभे बराबरे देखतो बानी आउ समझतो बानी,ऐह में फरक एतने बा कि रउआ लोग कहत नइखीं आउ हम कह देनी,जहिया से बिहार में दारू बंद भईल बा न त उहां के सटले झारखंड में दारू खुबे बेचात बा,आउ उहां के सोहदा लोग जब एहिजा आ के दारू पियत बाड़े न त उनका के अपना पर से कंट्रोले ख़तम हो जाता,काहे की ओहिजा त आसानी से मिलत नईखे,अब एहिजा मिलते एकदमे से बोतल उलट लेत बाड़े,तब सोचीं की जे एतना निशा में हो जाई त ओकरा से त दारू कुछुओ करा सकेला,से उहे उ रोज़ भईल,अब त ओहिजा के लोग के सोचे कि पड़ी की,बिहार में भले बाहर बा,लेकिन एहिजा त सीधे प्रहार बा।


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