Bindash News || विधायक भानु की कलम से...
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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विधायक भानु की कलम से...

Bindash News / 07-01-2021 / 1481


विचित्र दौर से गुज़र रही है राजनीति हिंदुस्तान की

हल करने में जुटा है सत्तापक्ष,पर समाधान में समस्या ढूंढने में जुटा है विपक्ष

भारतीय राजनीति एक विचित्र दौर से गुजर रही है। सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच सार्थक संवाद की गुंजाइश भी नहीं बची है। सार्थक संवाद के लिए यह जरूरी होता है कि संवाद तर्क तथा तथ्य आधारित हो, बिना तर्क तथा तथ्य के संवाद का कोई नतीजा निकल ही नहीं सकता। यही वजह है कि किसानों के साथ बातचीत का कोई नतीजा अभी तक नहीं निकल पाया है। केंद्र सरकार उन सभी कथित कमियों पर विचार करने के लिए तथा आवश्यक संशोधन करने के लिए तैयार है। जैसे ही सरकार के द्वारा किसान कानून के विभिन्न हिस्सों पर चर्चा की पेशकश की गई, वैसे ही किसान नेताओं ने यह जिद पकड़ ली इस कानून को वापसी से कम उन्हें मंजूर नहीं। यह काफी नहीं था कि अब करोना वैक्सीन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। तरीका वही की जिनको विषय कि जानकारी नहीं है वह आज विशेषज्ञ बन गए।

हिंदुस्तान के इतिहास में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि कोई भी सत्ता पक्ष आज के पहले इतना मजबूत नहीं हुआ था। कांग्रेस का एक लंबे समय तक एकछत्र राज था। केरल में पहली बार वामपंथी सरकार बनी थी वह भी बहुमत से जिसे बर्खास्त कर दिया गया था। संविधान की धारा 356 का दुरुपयोग कई बार कांग्रेस के द्वारा किया गया इसमें तनिक भी संदेह नहीं है। कांग्रेस अपने सत्ता काल के दौरान लगभग तीन दशक तक विपक्ष को प्रतिपक्ष का नेता पद भी नहीं दिया। 1977 में पहली बार हिंदुस्तान के लोकसभा में विपक्ष का नेता मिला। वह भी पहली गैर कांग्रेसी सरकार में।हलाकि 2014 में कांग्रेस के पास प्रतिपक्ष पद के लिए पर्याप्त संख्या भी नहीं थी फिर भी भाजपा ने कांग्रेस से दरियादिली ही दिखाई।

भाजपा के लोकसभा में पूर्ण बहुमत आने के बाद से ही राजनीति ही नहीं देश नीति के सारे नियम भी बदल गए। आजादी के बाद से सत्ता पक्ष तथा विपक्ष में एक अघोषित समझौता था कि राष्ट्रीय सुरक्षा तथा विदेश नीति पर देश के सत्ता पक्ष तथा विपक्ष एक स्वर में बोलेंगे। ऐसा नहीं था कि उस समय के विपक्ष इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष की आलोचना नहीं करता था। परंतु उन्हें लक्ष्मण रेखा का एहसास था। लक्ष्मण  यह थी कि विपक्ष ऐसी किसी बात को नहीं बोलेगा जिससे देश विरोधी इसका फायदा उठा सकें। लेकिन अब देश के दुश्मनों तथा कुछ विपक्षी दलों की भाषा लगभग उसी प्रकार की हो गई है। सबसे ज्यादा अफसोस की बात यह है कि देश की सबसे पुरानी तथा सबसे लंबे अरसे तक शासन करने वाली कांग्रेस में सबसे ज्यादा बदलाव आया है। कांग्रेस में यह नई इबारत वही लिख रहे हैं जिन्हें ना राजनीति की समझ है ना राष्ट्रीय मुद्दों की गंभीरता का अहसास है। पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय प्रणव मुखर्जी ने भी अपनी किताब में लिखा है कि उनके राष्ट्रपति भवन जाने के बाद कांग्रेस को सही राजनीतिक दिशा देने वाला नहीं रहा। फिलहाल कांग्रेस Twitter की पार्टी बनकर रह गई है।

विपक्ष में कांग्रेस के अलावे अखिलेश यादव शरीके नेता भी हैं जिनको वैक्सीन के वैज्ञानिकों की इस शोध में भाजपा का अक्स दिखाई पड़ रहा है। इसे मानसिक दिवालियापन ही कहा जाएगा। कांग्रेस के शशी थरूर आनंद शर्मा और जयराम रमेश जैसे नेताओं की बयानों से तो यही लगता है कि ये लोग उन वैज्ञानिकों से भी ज्यादा जानकारी रखते हैं जो वैज्ञानिक इसको बना रहे।

 शोधकर्ताओं को तथा डॉक्टरों को इस बात का भरोसा है कि वैक्सीन सुरक्षित है लेकिन विपक्ष के नेताओं को नहीं। विपक्ष के नेताओं को इसका भी एहसास नहीं है कि इस उपलब्धि पर सवाल उठाकर सरकार या प्रधानमंत्री को नहीं, बल्कि वैज्ञानिकों का अपमान कर रहे हैं। दरअसल इसकी आड़ में उनके निशाने पर एक ही व्यक्ति है वह नरेंद्र मोदी। मोदी राज में कुछ अच्छा हो रहा हो तो विपक्ष की समस्या बढ़ जाती है। खराब हो तो खुशी की बात है। देश के लिए अच्छी है या बुरी इससे उनका कोई सरोकार नहीं है।

 वर्तमान हिंदुस्तान का विपक्ष समाधान में समस्या ढूंढ रहा है। पता नहीं इनकी इन हरकतों को देखकर कौन आम हिंदुस्तानी खुश होता होगा।

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