Bindash News || उधर होता रहा करोड़ो का टेंडर,इधर होता रहा कौड़ी का जान सरेंडर
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

Economy

उधर होता रहा करोड़ो का टेंडर,इधर होता रहा कौड़ी का जान सरेंडर

Bindash News / 19-03-2021 / 1149


ये मत भूलिए की आप आम आदमी हैं..



आशुतोष रंजन
गढ़वा 
 
यह और बात है कि आपको इसका हमेशा इल्म रहता है कि आपने अपना मत दे कर किसी को सत्ता पर आसीन करते हैं,लेकिन आपको यह भी नहीं भूलना चाहिए कि आप मात्र उसी एक रोज़ के लिए ख़ास हैं,बाक़ी दिन तो आप वही आम आदमी हैं जिसका नीचे वाला नहीं ऊपरवाला ही सुनने वाला होता है,क्योंकि अग़र आपका कोई सुनने और आपकी बातों को अहमियत देने वाला होता तो आप इस क़दर चिलचिलाती धूप में घंटों खड़े नहीं होते,आख़िर कब और कहां आम लोगों को धूप में खड़ा रहना पड़ा आइये आपको बताते हैं।
 
इधर लोग करते रहे कौड़ी का जान सरेंडर:- उधर होता रहा करोड़ो का टेंडर,और इधर होता रहा कौड़ी का जान सरेंडर",कुछ ग़लत हम थोड़े बोल रहे हैं,जो हुआ,जो होता दिखा,अरे केवल हमको ही थोड़े दिखा,कड़ी धूप में भी सैकड़ो आंखें खुली थीं जिन्हें साफ़ तौर पर वही दिखा जो हमें नज़र आया,हां यह बात अलग है कि कुछ लोग सालों से यही हालात से दो चार होने के कारण बर्दाश्त करने के आदि हो चुके हैं सो वो सबकुछ देखते और सहन करते हुए घंटों देर बाद ही सही घर को वापस लौट गए,लेकिन जिन्हें दर्द का शिद्दत से अहसास हुआ वो तो बिलबिला ही उठे,वो पूरी तरह बिफ़र पड़े और साथ ही साथ बोल उठे की क्या हम बस एक रोज़ के लिए ही ख़ास होते हैं बाक़ी रोज़ इतना आम हो जाते हैं कि जो चाह रहा है वही पेड़ के पके आम की तरह चूस रहा है,ऐसे हिक़ारत भरे अंदाज में मत पेश आइये भाई,हम भी आपके बीच के ही हैं,लेकिन सब बोलना बेकाऱ हुआ,क्योंकि जो सालों से होता आ रहा है वही हुआ,लोग बोलते रहे और घंटों धूप में तपते हुए घर को लौटते रहे,अब आप पूछियेगा की पूरी कहानी हो गयी लेकिन कुछ मालूमात नहीं हुआ कि आख़िर माज़रा क्या है,आपका पूछना और जानना भी लाज़िमी है,तो आपको बताऊं की आप तस्वीर में देख भी रहे होंगें की एक तरफ़ सड़क पर लंबा जाम दिख रहा होगा,सैकड़ो गाड़ियां खड़ी हैं और उसके साथ आम लोग भी खड़े हैं,तो उधर दूसरी ओर आपको नगर परिषद कार्यालय नज़र आ रहा होगा,भींड़ वहां भी है,लोग वहां भी खड़े हैं,लेकिन वो आम नहीं ख़ास हैं,क्योंकि वो वहां लाखो करोड़ो की बात जो कर रहे हैं,आपको बताएं कि कार्यालय के अंदर से ले कर बाहर तक (सड़क छोड़ कर) कि यह भींड़ ठेकेदारों की है,जो निविदा भरने यानी ठेठ भाषा मे कहें तो टेंडर डालने आये हैं,यहां यह भी बता ही दें कि नगर परिषद क्षेत्र में कार्यान्वित होने वाली दो दर्जन से अधिक योजनाओं के निमित एक करोड़ तीस लाख रुपये का यह टेंडर हुआ,अब आप बेशक समझ सकते हैं कि जहां ख़ास लोग करोड़ो का करें टेंडर वहां तो आम लोगों को तो करना ही पड़ेगा न सरेंडर,अब इतना तो बर्दाश्त करना ही न पड़ेगा,अरे टेंडर हुआ तो योजना आप तक जाएगा ही,नली,गली,रोड बनेगा ही,अब भले वो छह महीने की अवधि भी पूरा ना करे सो बात अलग है,लेकिन यह सारी क़वायद तो आपके लिए ही हो रहा है,सो सहना सीखिए,साथ ही साथ इस बात का दिल को हमेशा अहसास दिलाइये की आप ख़ास नहीं आम 
 

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