Bindash News || वह गांव होने चला नूर से पुरनूर,था जो कल रौशनी से दूर
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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वह गांव होने चला नूर से पुरनूर,था जो कल रौशनी से दूर

Bindash News / 14-04-2021 / 586


मंत्री के प्रयास से पूरी हो रही उजाले की आस:नसीम


आशुतोष रंजन
गढ़वा

क्या मां हम ग़रीबों के क़िस्मत में अंधेरा ही है,क्या ग़रीबों के घरों में रौशनी नहीं होती,तभी तो आज गांव के सबके घरों में बल्ब जलता है पर हमारे झोपड़ी अंधेरे में रहता है,यह कसक भरे करुण सवाल जिला के उस गांव के एक टोले के हर बच्चे कालांतर से अपनी मां से पूछते आ रहे थे,और उनका यह सवाल आजीवन उनके ज़बान से दुहरता रहा,लेकिन उजाले के रूप में उन्हें अपने सवाल का ज़वाब नहीं मिला,हम बात यहां पिछड़े जिलों में शुमार होने वाले गढ़वा जिला के फरठिया गांव के हरिजन टोला की कर रहे हैं,जहां के लोग भी ब्रिटिश हुक़ूमत से आज़ाद तो हुए पर अब तलक अव्यवस्था के ग़ुलाम ही रहे,विडंबना तो देखिये आज़ादी के इतने साल भी इनके हालात को देखने की ज़हमत किसी सरकार ने नहीं उठायी तभी तो अब तलक इस टोले की कई पीढ़ियां अब हमारा घर भी रौशनी से रौशन होगा इसका आस ज़ोहते गुज़र गए,पर उनके लिए उजाला रात का ख़्वाब नहीं बल्कि दिन का दिवास्वप्न ही बना रहा,पर अंधेरे में रहने वाला उनका घर आज बिजली की रौशनी से रौशन होने की ओर तेज़ी से अग्रसर है,आख़िर किसने इनकी सुध ली,और यह कैसे संभव हुआ,आइये आपको इस ख़ास ख़बर के जरिये बताते हैं।

 

था जो रौशनी से बहुत दूर:- वह गांव होने चला नूर से पुरनूर,था जो रौशनी से बहुत दूर",आपको हमने बताया कि फरठिया गांव का हरिजन टोला आज़ाद देश में भी बिजली के मामले में अब तलक ग़ुलाम था,जो अब आज़ाद हुआ और उन्हें रौशनी मिलने का मार्ग प्रसस्त हुआ,ऐसी बात नहीं कि गुज़रे इतने दशकों तक उनके द्वारा किसी से अपनी पीड़ा नहीं बतायी गयी,विधायक,सांसद के साथ साथ सरकारी बाबुओं का ऐसा कोई दर नहीं जहां उनके द्वारा माथा नहीं टेका गया,पर हालात बदलने की बात कौन करे,उन्हें क़रीब से देखना किसी ने गंवारा नहीं किया,आलम रहा कि अब तलक वो अंधेरे में ही रहे,इस बीच उनके लिए एक मसीहा के रूप में नेता मिथिलेश ठाकुर आये,विधायक और मंत्री ना कह कर हमने मात्र नेता कहा ऐसा पढ़ कर आपको थोड़ा आश्चर्य हो रहा होगा,लेकिन हमने ऐसा क्यों कहा इस बावत आपको बताएं कि अपने ग्यारह साला संघर्ष के दरम्यान मिथिलेश ठाकुर ही एकमात्र वो शख़्श हैं जो एक नेता के रूप में उनके क़रीब जा कर उनके दर्द को जानने समझने का प्रयास किया,क्योंकि अब तलक उन्होंने वैसे किसी नेता को अपने पास नहीं देखा था,लोग वोट जरूर देते थे,लेकिन वो नेता को वोट दे कर चुनते जरूर थे,पर कभी नेता जी उन तक नहीं पहुंचे,जब पहली बार मिथिलेश ठाकुर उनके पास पहुंचे तो लोगों ने पूछा कि हमारे पास हमारा हाल जानने कोई नहीं आता है आप कैसे आ गए नेता जी,सवाल के ज़वाब में मिथिलेश ठाकुर ने मुस्कुराते हुए कहा कि हम नेता होते तो सच में नहीं आते,हम आपका बेटा और आपके भाई हैं इसीलिए अपनों के बीच उनका हाल जानने आये हैं,तब लोगों ने खुल कर अपनी व्यथा बतायी,मिथिलेश ठाकुर ने कहा कि आज तो मैं केवल वादा कर सकता हूं,लेकिन यह वादा इस विश्वास और यक़ीन के साथ कर रहा हूं कि जब भी मैं कुछ करने के क़ाबिल हुआ तो इस गांव का अंधेरा जरूर दूर करूंगा,और जब वो इलाक़े के विधायक निर्वाचित हुए और सरकार ने उन्हें मंत्री बनाते हुए मंत्रिमंडल में शामिल किया तो उनके द्वारा पिछड़े गढ़वा को विकसित करने के ख़्याल से शुरू किये गए मैराथन कार्यों में बिजली को भी प्रमुख रूप से शामिल किया गया,और कार्य भी शुरू कर दिया गया,रौशनी से महरूम गांव के लंबे नाम के फ़ेहरिस्त में इस हरिजन टोले का नाम भी जुड़ा और यहां के जड़वत अंधेरे को दूर करने और टोले को रोशनी से रौशन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी,जानकारी देते हुए बिजली विभाग के विधायक प्रतिनिधि नसीम अख्तर ने बताया कि जहां एक तरफ़ विधानसभा क्षेत्र के गांव सहित पूरे जिले को मंत्री के पहल से रौशन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है,इस टोले को विशेष प्राथमिकता दी गयी है,क्योंकि यहां के लोगों ने क़रीब से नहीं बल्कि दूर से ही दूसरे गांव को रौशन होता हुआ देखा है,कहा कि उक्त टोले में दर्जनों पाइप पहुंचा दिया गया है,उधर कई दशकों का ख़्वाब पूरा होने जा रहे को ले कर आह्लादित ग्रामीणों ने मंत्री एवं विधायक प्रतिनिधि को सहृदय धन्यवाद दिया,इधर मंत्री ने कहा कि अब गढ़वा का कोई भी गांव,कोई भी टोला विकास से अछूता नहीं रहेगा,सरकार की विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जाएगा,उन्होंने कहा कि नेता नहीं बल्कि एक बेटा के रूप में वो गढ़वा वासियों की वे सेवा करते रहेंगे।

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