Bindash News || हर ओर से आ रही सिसकने की आवाज़, क्या आ गया जंगलराज.?
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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हर ओर से आ रही सिसकने की आवाज़, क्या आ गया जंगलराज.?

Bindash News / 30-04-2021 / 281


क्या लोग जियें ख़ौफ़ के साथ,पूछ रहे सत्येन्द्रनाथ


आशुतोष रंजन
गढ़वा

हाय रुदन और क्रंदन,अनगिनत चीखें पुकार,क्यों नहीं आ रही गढ़वा से खिलखिलाने की फ़ुहार.?,उक्त पंक्ति के साथ पूर्व विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने राज्य में सत्तासीन सरकार से सवाल पूछा है कि आख़िर किस बिना पर सरकार कहती है कि राज्य में अमन चैन क़ायम हो रहा है,यहां तो लोग ख़ौफ़ के साये में किसी प्रकार जीवन बसर कर रहे हैं,और उन्होंने क्या कहा आइये इस ख़बर के जरिये बताता हूं।

क्या आ गया जंगलराज:- गढ़वा के साथ पूरे राज्य के हालात को नज़र करते हुए पूर्व भाजपा विधायक ने फ़िर एक पंक्ति के साथ अपनी बात की शुरुआत की,उनके द्वारा कहा गया कि "हर ओर से आ रही सिसकने की आवाज़,क्या फ़िर से आ गया जंगलराज.?" आख़िर जंगलराज आपने क्यों कहा यह पूछे जाने पर उनके द्वारा बताया गया कि जब हम बिहार से अलग नहीं हुए थे वह दौर 85,90 का था जब पूरा राज्य नक्सलियों एवं अपराधियों के कुकृत्य से आक्रांत था,रात के अंधेरे में कौन कहे लोग दिन के उजाले में घर की देहरी लांघने से डरते थे,बच्चा स्कूल गया तो शाम में वापस आएगा कि नहीं,पति ऑफिस से सकुशल घर लौट पाएंगें की नहीं,ऐसे डर के साये में पूरे राज्य के लोग रहा करते थे,कमोवेश यही स्थिति आज अपने राज्य की है,अपना राज्य अलग होने के बाद हर किसी के बुझी आंखों में एक उम्मीद की रौशनी आयी थी,लोगों को लगा था कि अब वो सुकून के साथ जियेंगें,पर ये क्या उनकी आंखों की चमक ज़्यादा दिनों तक नहीं रही,वो एक बार फ़िर से बुझने को आन पड़ी,क्योंकि आंखों को अपने झारखंड में भी बिहार वाला ही मंज़र दिख रहा है,हर ओर लूट,खसोट,भ्रष्टाचार,चोरी,डकैती,छेड़ख़ानी,बलात्कार और हत्या,हम अपने गढ़वा की बात करें तो कालांतर में यह जिला भी पूरा आक्रांत था लेकिन बीच में बहुत सुधार हुआ और लोग दहशत से परे अमन और शांत माहौल में जीवन जीने लगे,लेकिन आज स्थिति बिल्कुल विपरीत है,कल घरों से बेख़ौफ़ हो निकलने वाले लोग आज ख़ौफ़ और अनजाने डर के साये में बाहर जाने को विवश हैं,वो जब तलक घर को नहीं लौटते,घर की महिलाएं ऊपरवाले से ख़ैर मनाया करती हैं,क्योंकि नीचे वाले यानी सरकार और प्रशासनिक महकमें से तो कोई उम्मीद रही नहीं,कभी रात के अंधेरे में क्राइम करने वाले अपराधी आज इतने निर्भीक हो गए हैं कि अब वो दिन के उजाले में घटना को अंजाम देने लगे हैं,बस स्टैंड में एजेंट की हुई हत्या का ज़िक्र करते हुए पूर्व विधायक ने कहा कि गढ़वा पूरी तरह अपराधियों के निशाने पर आ गया है इसके लिए इस घटना से बड़ा प्रमाण और क्या हो सकता है,कहा कि जो सरकार नदियों का सीना चिर बालू के अवैध कारोबार में लिप्त हो उससे और क्या उम्मीद की जा सकती है,लगातार हो रहे बालू के अवैध कारोबार और नदियों से निर्बाध होते बालू उठाव को देख यही कहा जा सकता है कि वह दिन दूर नहीं जब बालू भी कागज़ के ठोंगे में बिक़ता मिलेगा,साथ ही साथ मृतक यानी पिंकू केशरी के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि जहां एक तरफ़ इस हत्याकांड की उच्चस्तरीय जांच और हत्यारों की अविलंब गिरफ़्तारी हो वहीं मृतक के पत्नी को पचास लाख रुपया मुआवजा और एक सरकार नौकरी दे,एवं गढ़वा में अमन चैन स्थापित करने में महती भूमिका निभाए।

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