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सदास्मृत आशुतोष रंजन
प्रियरंजन सिन्हा
बिंदास न्यूज, गढ़वा
गढ़वा : जनसहभागिता एवं प्रशासनिक सहयोग से संचालित “आपन सरस्वतिया” अभियान के तहत सोमवार को लगातार 15वें दिन भी सरस्वतिया नदी की सफाई, डी-सिल्टिंग एवं पुनर्जीवन का कार्य जारी रहा। आज का अभियान गढ़वा प्रखंड कार्यालय के सामने स्थित जोबरैया एवं पिपरा कला के बीच नदी क्षेत्र में चलाया गया।
नदी के बीच से हटाए गए सूखे पेड़, पुराने अवरोध: अभियान के दौरान नदी के बीचो-बीच गिरे पुराने सूखे एवं टूटे हुए वृक्षों, बड़ी-बड़ी डालियों तथा जल प्रवाह में बाधा उत्पन्न कर रहे स्थायी एवं अस्थायी अवरोधों को हटाया गया। साथ ही कई स्थानों पर नदी का चौड़ीकरण भी किया गया, जिससे जलधारा के प्राकृतिक प्रवाह को सुचारू बनाने में सहायता मिल सके।
स्थानीय लोगों के अनुसार वर्षों से नदी के भीतर पड़े इन अवरोधों के कारण बरसात के दिनों में जल निकासी प्रभावित होती थी तथा कई स्थानों पर गाद का जमाव बढ़ जाता था। अभियान के तहत इन बाधाओं को हटाकर नदी के मूल स्वरूप को पुनर्स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया।
अविनाश देव के सहयोग से चला अभियान: आज का सफाई एवं डी-सिल्टिंग अभियान मेदिनीनगर के संत मरियम आवासीय विद्यालय के चेयरमैन अविनाश देव के सौजन्य से संचालित किया गया। उनके सहयोग से मशीनों की व्यवस्था कर नदी क्षेत्र में व्यापक स्तर पर कार्य कराया गया।
अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने अविनाश देव के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी ही इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि जब गढ़वा की भौगोलिक सीमा से बाहर के नागरिक भी किसी सार्वजनिक उद्देश्य को अपना अभियान मानकर आगे आते हैं, तब सकारात्मक परिणाम आने स्वाभाविक हैं।
स्थानीय लोगों ने भी निभाई सक्रिय भूमिका: अभियान के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। लोगों ने नदी संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए सफाई कार्य में सहयोग किया तथा नदी को स्वच्छ एवं अतिक्रमण मुक्त बनाए रखने का संकल्प लिया।
जनसहयोग से आगे बढ़ रहा है अभियान: अनुमंडल पदाधिकारी ने कहा कि “आपन सरस्वतिया” अभियान अब एक व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप ग्रहण कर चुका है। पिछले 15 दिनों से समाज के विभिन्न वर्गों, शिक्षाविदों, व्यवसायियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं आम नागरिकों का निरंतर सहयोग मिल रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि नदी क्षेत्र में कचरा न फेंकें तथा इसकी स्वच्छता एवं संरक्षण के लिए आगे भी सक्रिय सहयोग प्रदान करें।
उन्होंने कहा कि सरस्वतिया नदी केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि क्षेत्र की प्राकृतिक धरोहर है। जिसके संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए प्रशासन एवं समाज का यह संयुक्त प्रयास आगे भी निरंतर जारी रहेगा।








