आज़ाद भले 47 में हुए पर सही आज़ादी 14 में ही मिली : सत्येंद्र नाथ तिवारी


आशुतोष रंजन
गढ़वा

आप उनकी बातों को मज़ाक में और हल्के में ले लेते हों,लेकिन ऐसी बात नहीं है की उन्हें जानकारी नहीं है,और बातों को अभी हम किनारे रखते हुए केवल इतना ही कहें की वो किस जाति से आते हैं उसे विद्वान जाति की संज्ञा दी गई है,और वैसे भी वो पढ़े लिखे शिक्षित हैं,अरे भाई मेरे वो ऐसी भाषा और सीधे सपाट लहज़े में केवल इसलिए बोलते हैं की ग्रामीण इलाक़े के लोगों को भी आसानी से समझ आ जाए,दरअसल हम बात यहां गढ़वा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के पूर्व और आगामी चुनाव के प्रत्याशी सत्येंद्र नाथ तिवारी की कर रहे हैं,वो क्षेत्र के एक गांव में आयोजित क्रिकेट प्रतियोगिता के उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे,जहां उनके द्वारा अपने चिरपरिचित अंदाज़ में गंभीर बातों को बड़े सरल और सहज अंदाज़ में कहा गया,उन्होंने क्या कहा आइए आपको बताते हैं।

लेकिन खेल में राजनीति कतई नहीं होनी चाहिए : – राजनीति में आने के पूर्व से भी समाजसेवा के ज़रिए क्षेत्र में खेल को बढ़ावा देने के प्रति हर वक्त तैयार रहने वाले सत्येंद्र नाथ तिवारी जब विधायक बने उसके बाद तो वो खेल के प्रति दिली प्रतिबद्धता के साथ जुट गए,गांव में खेल समिति को खेलने की सामग्री उपलब्ध कराने से ले कर उनके द्वारा ग्रामीण इलाकों में कई प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं जिससे एक ओर जहां गांव में खेल का आयोजन शुरू हुआ तो वहीं युवाओं में छुपी खेल प्रतिभा भी निखर कर सामने आई,ग्रामीण युवा खिलाड़ियों से उनका किस रूप में लगाव है यह आज भी तब नुमाया हो रहा है जब वो जनप्रतिनिधि यानी विधायक नहीं हैं,लेकिन फिर भी वो खेल आयोजन में पहुंच युवाओं के हौसले को परवाज़ दे रहे हैं,इतना कुछ करने के बाद भी उन्हें कसक इस बात की है की आज के राजनेताओं द्वारा खेल को भी नहीं बख्शा जा रहा है,राजनीति में खेल करने के साथ साथ वो खेल में भी राजनीति करने से बाज़ नहीं आ रहे हैं,उन्होंने कहा की खेल में राजनीति नहीं होनी चाहिए।

प्राथमिकी की चिंता काहे करते हैं : – कार्यक्रम में मौजूद लोगों से मुखातिब होने के क्रम में अपनी बातों को आगे बढ़ाते हुए पूर्व विधायक ने सभी से पूछा की संघर्ष से ले कर सफ़लता तक अपने नाम कई प्राथमिकी होने के बाद भी यह सत्येंद्र नाथ विचलित हुआ,क्या आपने कभी मुझे उद्वेलित होते हुए पाया,सबने एक स्वर से नहीं कहा,तब उन्होंने कहा की यही बात तो हम जवाहर भाई से कहते हैं,मंच पर मौजूद भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष जवाहर पासवान को इंगित करते हुए कहा की हम बराबर कहते हैं की जवाहर भाई आप तो दृढ़ संकल्पित व्यक्ति हैं,फिर क्यों प्राथमिकी और मामले की चर्चा करते हैं,आम जनजीवन से ले कर सामाजिक और राजनीति जीवन में अगर आपके विरुद्ध कोई मामला दर्ज़ नहीं होता है तो आप सीधे रूप में यही समझ लीजिए कि आपने समाज हित में कुछ नहीं किया,इसलिए बस यही सोचते हुए अपनी जिम्मेवारी का बखूबी निर्वहन करते हुए लक्ष्य को हासिल कर लेना है।

पहले ससुराल जाने के लिए भी लेना पड़ता था आदेश : – जान बुझ कर गंभीर बातों को भी सरल अंदाज़ में कह कर लोगों के दिलों में उक्त बातों को घर करा देने में महारत हासिल पूर्व विधायक ने जब यह कहा की एक वक्त था की ससुराल जाने के लिए भी आदेश लेना पड़ता था,लोग एकाएक हंस पड़े,जब लोगों की हंसी रुकी तब उन्होंने कहा की लगता है आप समझे नहीं,कहा की अरे भाई हमारे आपके सभी के पूर्वजों ने उस परेशानी को झेला है,क्योंकि जब अपने देश में अंग्रेजी शासन था तब हर काम के साथ साथ ससुराल में रह रही पत्नी के पास जाने के लिए भी आदेश लेना पड़ता था,कहने का मतलब यही है की आपके बहुमूल्य मत से कोई ऐसे व्यक्ति का चुनाव ना हो जाए जिसके बाद आपका जीवन जीना दुभर हो जाए,आज चुनाव नहीं है पर 2024 का यह साल चुनावी ही है,ऐसे में सोचते हुए फ़ैसला आपको करना है की निर्भीक हो कर आवाजाही करना है या ससुराल जाने के लिए भी आदेश लेना है।